FIR रद्द करने की मांग पर अगली सुनवाई तक रहेगी जांच जारी, पुलिस जांच में सहयोग करने के निर्देश
नई दिल्ली, 1 दिसंबर
Supreme Court ने ज़ी राजस्थान न्यूज़ चैनल Zee Media के पूर्व चैनल हेड आशीष दवे की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को ज़ी मीडिया और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है।
पूर्व चैनल हेड आशीष दवे ने अपनी याचिका में थाना अशोक नगर, जयपुर में दर्ज FIR नंबर 257/2025 को रद्द करने की मांग करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
जयपुर के अशोक नगर थाने में दर्ज FIR में उन पर जबरन वसूली, दबाव बनाने और निजी लाभ के लिए संपादकीय प्रभाव के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
FIR में दावा किया गया है कि उन्होंने नकारात्मक खबर प्रसारित करने की धमकी देकर व्यापारियों, संस्थानों और व्यवसायियों से धन की मांग की, जबकि आशीष दवे की ओर से इन सभी आरोपों को पूरी तरह “झूठा और निराधार” बताया गया है।
Supreme Court में हुई सुनवाई
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल, राज्य सरकार की ओर से AAG शिव मंगल शर्मा तथा ज़ी मीडिया की ओर से विकास गोगने की दलीलें सुनीं।
पीठ ने FIR पर तत्काल रोक लगाने से स्पष्ट रूप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक ज़ी मीडिया के किसी भी कर्मचारी या स्टाफ के खिलाफ कोई दंडात्मक/जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
Zee Media का आंतरिक विवाद
सोमवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान पूर्व चैनल हेड आशीष दवे के अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह FIR ज़ी मीडिया के भीतर उत्पन्न आंतरिक व्यावसायिक विवादों की उपज है और इसमें जबरन वसूली (Extortion) का आवश्यक मामला मौजूद ही नहीं है।
आशीष दवे की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष धमकी नहीं है और न ही कोई दबावपूर्वक धन मांगने का प्रमाण है।
अधिवक्ता ने कहा कि FIR का उद्देश्य व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना है।
Zee Media का जवाब
सुनवाई के दौरान Zee Media की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विकास गोगने ने FIR को सही बताते हुए कहा कि शिकायतों का पैटर्न बेहद गंभीर है और कई शिकायतकर्ताओं ने एक समान आरोप लगाए हैं।
अधिवक्ता ने दलील दी कि संपादकीय अधिकारों के दुरुपयोग के माध्यम से प्रभावशाली लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
राज्य सरकार का रुख
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि इस मामले में अब तक हुई जांच में कई शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में कई डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिनसे वित्तीय लेनदेन (Money Trail) का संकेत मिलता है कि यह संगठित जबरन वसूली रैकेट जैसा मामला है।
सरकार ने कहा कि इस मामले की जांच बेहद जरूरी है और इसे रोका नहीं जाना चाहिए, ताकि इस मामले का अंतिम निर्णय सामने आ सके।
जांच जारी रहेगी, गिरफ्तारी पर रोक
Supreme Court के नोटिस जारी होने के बाद अब ज़ी मीडिया और राज्य सरकार अपने लिखित जवाब दाखिल करेंगी।
मामले में पूर्व चैनल हेड आशीष दवे की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है और उनके खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। वहीं दूसरी तरफ, इस मामले में पुलिस द्वारा की जा रही जांच जारी रखी जा सकेगी।
मामले में याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करना होगा।