नई दिल्ली, 3 दिसंबर
पूर्व मंत्री महेश जोशी को Supreme Court से बड़ी राहत मिली है महेश जोशी को जल जीवन मिशन घोटाला मामले में जमानत मिल गई हैं.
महेश जोशी की याचिका पर जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था.
900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में 24 अप्रैल 2025 को ईडी ने महेश जोशी को गिरफ्तार किया था।
इस मामले में Rajasthan High court ने महेश जोशी की याचिका को 26 अगस्त 2025 को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है।
महेश जोशी का तर्क: फंसाया गया है…
Supreme Court में दायर की गई याचिका में महेश जोशी की ओर से कहा गया है कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। एसीबी में दर्ज मूल केस में उनका नाम नहीं है.
जोशी को एक साल पहले नोटिस दिया गया था, इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
ईडी के पास लेन-देन का सबूत नहीं
महेश जोशी की ओर से कहा गया है कि ED उन पर 2.01 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगा रही है, जबकि इस आरोप को लेकर ईडी के पास कोई सबूत नहीं है।
परिवादी यह राशि कहां से लाया, इसका भी उल्लेख नहीं है।
इसके अलावा ED ने अपनी रिपोर्ट में बेटे की फर्म में 50 लाख रुपए का लेन-देन बताया है। यह राशि महेश जोशी के बेटे की कंपनी ने लोन के तौर पर ली थी और उसे लौटाया भी जा चुका है।
करीब 7 माह से जेल में पूर्व मंत्री
दरअसल, 900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में 24 अप्रैल 2025 को ईडी ने महेश जोशी को गिरफ्तार किया था।
ED की ओर से प्रकरण में एसीबी की ओर से दर्ज अन्य एफआईआर में महेश जोशी की भूमिका बताई गई है।
ED ने हाईकोर्ट में कहा था कि जोशी के बेटे की फर्म में 50 लाख रुपए का लेन-देन किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से इस राशि को लौटाया जाना बताया जा रहा है, किंतु राशि लौटाने से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती। जोशी ने विभाग की टेंडर प्रक्रिया में रिश्वत ली है।
हाईकोर्ट ने कहा था
राजस्थान हाईकोर्ट ने महेश जोशी की जमानत खारिज करते हुए कहा था कि धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 45 के तहत आरोपी को तभी जमानत दी जा सकती है, जब अदालत प्रथम दृष्टया इस बात से संतुष्ट हो जाए कि वह इस अपराध का दोषी नहीं है।