नई दिल्ली, 8 दिसंबर
शिष्या के साथ दुष्कर्म के मामले में आजीवन उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से मेडीकल आधार पर मिली जमानत को रदृद करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया हैं.
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जमानत के फैसले में हस्तक्षेप से इंकार किया हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा आसाराम को दी गयी जमानत के खिलाफ पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
पीड़िता की ओर से दायर कि विशेष अनुमति याचिका में राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा आसाराम को उनकी अपील लंबित होने के दौरान दी गई अंतरिम चिकित्सा ज़मानत पर को चुनौती दी गयी हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह आसाराम की 2018 से लंबित आपराधिक अपील को तीन माह के भीतर निपटाए.
हस्तक्षेप से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने आसाराम को जमानत उसकी उम्र (86 वर्ष), मेडिकल स्थिति और प्रस्तुत रिपोर्टों को आधार बनाते हुए अंतरिम जमानत दी है.
कोर्ट ने कहा कि मौजूदा स्थिति में यह आदेश “ऐसा नहीं है जिसमें सुप्रीम कोर्ट को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़े।”
पीड़िता की दलील
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता की ओर से विरोध जताया गया.
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पैरवी करते हुए कहा कि आसाराम को जमानत देने में जमानत शर्तों का उल्लंघन किया गया हैं.
अधिवक्ता ने कहा कि आसाराम पर POCSO Act और IPC की गंभीर धाराओं के तहत दोष सिद्ध हुआ है।
मेडिकल जमानत के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रम किए, जो स्पष्ट रूप से जमानत शर्तों का उल्लंघन है.
पीड़िता की ओर से कहा गया कि आसाराम की चिकित्सा स्थिति उतनी गंभीर नहीं है कि उन्हें निरंतर जमानत पर रखा जाए.
सरकार ने भी जमानत का किया विरोध
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा और अधिवक्ता सोनाली गौर पेश हुए.
सरकार ने भी पीड़िता की दलीलों का समर्थन करते हुए कहा कि अपील वर्षों से लंबित है और जमानत शर्तों के उल्लंघन के तथ्य पहले भी सामने आ चुके हैं।
आजीवन उम्रकैद की सजा
शिष्या के साथ दुष्कर्म के मामले में 15 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी।
आसाराम को IPC सहित पॉक्सों और जुवेनाई जस्टिस एक्ट की धारा 23 सहित विभिन्न धाराओं में दोषी घोषित किया गया.
ट्रायल कोर्ट के फैसले को आसाराम ने वर्ष 2028 में चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की.
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में आसाराम की उम्र और चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए उनकी सज़ा पर रोक लगाई और जमानत देते हुए कई कड़े प्रतिबंध लगाए.