Rajasthan High Court Bar Association Jaipur के 42 वें अध्यक्ष, महासचिव सहित कार्यकारिणी के लिए चुनाव 11 दिसंबर को
जयपुर, 22 नवंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर एक बार फिर से चुनावी माहौल में है। राजस्थान की 250 बार एसोसिएशनों में से यह बार न केवल राज्य की दूसरी सबसे बड़ी बार है, बल्कि राजनीतिक, न्यायिक और विधिक परंपराओं के लिहाज से सबसे अधिक प्रभावशाली बार एसोसिएशन है।
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, जो 1987 में जयपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे, इस प्रतिष्ठा का प्रमुख उदाहरण हैं। यही वह बार है जिसने कई अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया है।
एक वर्ष में जहां जयपुर शहर औसतन पाँच साल बाद चुनाव देखता है, वहीं प्रतिवर्ष होने वाले हाईकोर्ट बार के चुनाव अपनी प्रतिष्ठा, इतिहास और भविष्य गढ़ने की क्षमता के कारण सबसे अलग पहचान रखते हैं।
11 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट बार के अधिवक्ता करेंगे, जो अपने 42वें अध्यक्ष, महासचिव और 17 पदाधिकारियों के चुनाव के लिए वोट डालेंगे।
यह वह परंपरा है जिसने पिछले 48 वर्षों में न केवल सैकड़ों अधिवक्ताओं को नेतृत्व दिया बल्कि कई को हाईकोर्ट, अन्य राज्यों के हाईकोर्टों और सुप्रीम कोर्ट के शिखर तक पहुंचाया।
संघर्ष, स्थापना और इतिहास
आज जिस राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ को “अधिवक्ताओं की राजनीतिक पाठशाला” कहा जाता है, उसकी स्थापना लंबी लड़ाई और संघर्ष का परिणाम थी।
1958 में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश के बाद जयपुर पीठ समाप्त कर दी गई, और न्यायिक कार्यों का केंद्रीकरण जोधपुर में कर दिया गया था।
इससे जयपुर के सैकड़ों अधिवक्ता प्रतिदिन जोधपुर जाकर पैरवी करने को मजबूर हुए, लेकिन इनमें से कोई भी अधिवक्ता जोधपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का हिस्सा नहीं बना।
जयपुर के अधिवक्ताओं ने अपने संघर्ष का ऐलान करते हुए जोधपुर में ही “राजस्थान बार” नाम से एक अलग इकाई बनाई और जयपुर पीठ की पुनःस्थापना के लिए संघर्ष जारी रखा।
इस लंबे संघर्ष का परिणाम था कि 8 दिसंबर 1976 को राष्ट्रपति ने जयपुर पीठ की स्थापना का आदेश जारी किया।
31 जनवरी 1977 से जयपुर में हाईकोर्ट पीठ ने विधिवत रूप से कार्य शुरू किया और इसी के साथ जयपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की स्थापना हुई।
इसलिए प्रतिवर्ष जयपुर हाईकोर्ट और जयपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन 31 जनवरी को स्थापना दिवस मनाते हैं। इस वर्ष 31 जनवरी को जयपुर हाईकोर्ट के साथ बार अपने 49 वर्ष पूरे कर 50वें वर्ष में प्रवेश करेगी।
जोधपुर से जयपुर लाया गया फर्नीचर
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ की स्थापना के साथ ही जोधपुर से राजस्थान बार जयपुर शिफ्ट हो गई और इसके साथ ही शुरू हुई हाईकोर्ट बार एसोसिएशन।
शुरुआती समय में जोधपुर हाईकोर्ट बार का फर्नीचर भी जयपुर लाकर नए कार्यालय में स्थापित किया गया।
पहले अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुट बिहारीलाल शर्मा को चुना गया।
यहां से शुरू हुई परंपरा आगे चलकर न्यायपालिका में नेतृत्व देने वाली मजबूत नींव बन गई।
48 वर्षों में 42 अध्यक्ष–महासचिव
राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर को हमेशा प्रदेश की न्यायिक राजधानी के रूप में पहचाना गया है, जबकि जयपुर पीठ को वर्षों से अधिवक्ताओं की राजनीतिक पाठशाला कहा जाता रहा है।
इसका कारण भी स्पष्ट है—राज्य की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियां, जनआंदोलन और विधिक संघर्ष राजधानी जयपुर से संचालित होते रहे हैं, जिनमें जयपुर पीठ के अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही है।
यही वजह है कि राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर का अध्यक्ष और महासचिव पद वर्षों से अधिवक्ताओं के बीच अत्यधिक प्रतिष्ठित माना जाता है।
1977 से 2024 के बीच बार ने 42 अध्यक्ष और महासचिव चुने हैं. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की स्थापना से अब तक अध्यक्ष और महासचिव
वर्ष अध्यक्ष महासचिव
1977 मुकुटबिहारी लाल भार्गव हरीशचन्द्र रस्तोगी
1978 सागरमल मेहता नगेन्द्र कुमार जैन
1979 विनोद शंकर दवे अभय कुमार भण्डारी
1980 चन्द्रनाथ शर्मा गिरधारी सिंह बापना
1981 लाडली लाल शर्मा नगेन्द्र कुमार जैन
1982 सुरेन्द्र नाथ भार्गव सिताराम जोशी
1983 विनोद शंकर दवे अरूण भण्डारी
1984 उम्मेदनाथ भण्डारी कमलाकर शर्मा
1985 नवरंगलाल टीबरेवाल विरेन्द्र डांगी
1987 जगदीप धनखड़ सुरेश पारीक
1988 बजरंगलाल शर्मा सज्जनसिंह नरूका
1989 अभय कुमार भण्डारी मनिन्दर कुमार कौशिक
1990 कमलाकर शर्मा त्रिपुरारी शर्मा
1991 नन्द कुमार जोशी लोकेश कुमार शर्मा
1992 सुरेश पारीक विरेन्द्र अग्रवाल
1993 बी एस सिनसिनवार अमृत सुरोलिया
1994 अरविन्द्र कुमार गुप्ता माधवमित्रा
1995 एस एस बाजवा करणपालसिंह
1996 दिलीपसिंह मनोज शर्मा
1997 विरेन्द्र डांगी राजेश गोस्वामी
1998 अजय रस्तोगी गोवर्धन बारधार
2000 डॉ पी सी जैन प्रेम शंकर शर्मा
2001 लोकेश शर्मा आर बी माथुर
2002 मनीष भण्डारी अश्विन गर्ग
2003 एन के जोशी उदय प्रताप गौड़
2004 आर पी सिंह महेन्द्र शांडिल्य
2005 करणी ओला राजेन्द्र कुमार शर्मा
2007 आर माथुर डॉ विभूतिभूषण शर्मा
2008 माधवमित्र भगवतसिंह राजावत
2009 माधवमित्र मनीष कुमावत
2010 करणपालसिंह कपिल प्रकाश माथुर
2012 डॉ विभूतिभूषण शर्मा गौरव गुप्ता
2013 मनोज शर्मा भुवनेश शर्मा
2015 राममनोहर शर्मा प्रहलाद शर्मा
2016 राजेन्द्र कुमार शर्मा सतीश खाण्डल
2018 अनिल उपमन संगीता शर्मा
2019 महेन्द्र शांडिल्य अंशुमान सक्सेना
2021 भुवनेश शर्मा गिरिराज प्रसाद शर्मा
2022 महेन्द्र शांडिल्य बलराम वशिष्ठ
2023 प्रहलाद शर्मा सुशील पुजारी
2024 महेन्द्र शांडिल्य रमित पारीक
चुनाव में जीत सम्मान
और यही वह बार है जिसने देश को—
एक उपराष्ट्रपति,
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश,
कई मुख्य न्यायाधीश,
कई हाईकोर्ट जज,
कई आयोगों के चेयरमैन,
और कई बड़े संवैधानिक पदाधिकारी दिए हैं।
बार से शुरू होकर जज बनने वाले प्रतिष्ठित नाम
जगदीप धनखड़ – 1987 के अध्यक्ष, देश के उपराष्ट्रपति
जस्टिस अजय रस्तोगी – सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज
जस्टिस मनीष भंडारी – SAFEMA चेयरमैन
जस्टिस वी.एस. दवे, एस.एन. भार्गव, नवरंग टिबरेवाल, एन.के. जैन, जस्टिस गोवर्धन बर्धार – राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज
जस्टिस अनिल कुमार उपमन – वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट के जज
हारकर भी जज बन जाना परंपरा
इस बार का एक ऐसा रिकॉर्ड है जो देशभर में अद्वितीय है।
यहां चुनाव हारने वाले कई अधिवक्ता भी आगे चलकर मुख्य न्यायाधीश और जज बने।
जस्टिस मोहम्मद रफीक – महासचिव चुनाव हारे लेकिन हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश बने
जस्टिस आर.एस. चौहान – चुनाव हारे, बाद में तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने
जस्टिस आलोक शर्मा – अध्यक्ष चुनाव हारे लेकिन हाईकोर्ट जज बने
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा – चुनाव हारे, आज कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
यह परंपरा साबित करती है कि जयपुर हाईकोर्ट बार में हार भी भविष्य का रास्ता नहीं रोकती।
चुनाव क्यों महत्वपूर्ण ?
जयपुर हाईकोर्ट बार के चुनाव इसलिए खास हैं, क्योंकि यह राज्य की सबसे प्रभावी बार है, इसके पदाधिकारी अक्सर राजनीतिक और न्यायिक गतिविधियों में केंद्र में होते हैं, यहां से उभरकर आगे बढ़ने की परंपरा मजबूत है,
मतदाताओं की संख्या बड़ी व सक्रिय है, प्रदेशभर की निगाहें इस चुनाव पर टिकी रहती हैं।
इस बार एसोसिएशन के चुनावों का प्रभाव सीधे-सीधे प्रदेश की न्यायिक और विधिक गतिविधियों पर पड़ता है.
प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी बार
जयपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी बार मानी जाती है। इससे करीब 18,570 अधिवक्ता जुड़े हुए हैं।
11 दिसंबर को होने वाले मतदान में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव सहित 17 पदों के लिए अधिवक्ता वोट करेंगे।
इसके लिए चुनाव समिति गठित की जा चुकी है और उम्मीदवारों के नामांकन और शपथपत्र जमा हो चुके हैं।
50वें वर्ष में प्रवेश
लेकिन यह बार अपने वैभवपूर्ण 50वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है, ऐसे में आने वाले अध्यक्ष और महासचिव के लिए एक अवसर होगा कि वे अपने इस इतिहास को आगामी कार्यकाल में भुना सकें।
यह अवसर होगा जब अध्यक्ष–महासचिव से लेकर संपूर्ण कार्यकारिणी वर्षभर कार्यक्रमों का आयोजन कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बना सकेगी।
क्योंकि इस बार के 25वें वर्ष में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय सेमिनार इसके वैभव का हिस्सा रहे हैं।
बदलता वोट पैटर्न
वर्ष 2000 तक बार के अधिकांश अध्यक्ष और महासचिव हाईकोर्ट जज बनते रहे। लेकिन बदलते समय के साथ इस बार में भी बाहरी जिलों से जुड़े अधिवक्ताओं की भूमिका बढ़ी, सीनियर एडवोकेट चुनावी राजनीति से दूर होते गए और प्रैक्टिसिंग वकीलों की भागीदारी चुनावों में कम होती गई।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में अधिवक्ताओं की संख्या वक्त के साथ बढ़ती गई है, लेकिन एक हकीकत यह भी है कि चुनावों में प्रैक्टिसिंग एडवोकेट से ज्यादा बाहरी एडवोकेट की भूमिका बढ़ती गई… और सीनियर एडवोकेट ने भी चुनाव लड़ने से दूरी बना ली।
इसका परिणाम रहा कि वर्ष 2000 के बाद अब तक चुने गये अध्यक्ष या महासचिव में से सिर्फ जस्टिस एम.एन. भंडारी और जस्टिस अनिल उपमन ही हाईकोर्ट के जज बने हैं।
ये अलग बात है कि कई अध्यक्ष, महासचिव और हारे प्रत्याशियों के नाम हाईकोर्ट जज बनने की कतार में हैं…
चुनाव एक नया इतिहास
इस बार एसोसिएशन के चुनाव हर बार एक नया इतिहास लिखते हैं। और इस बार के चुनाव काफी रोमांचक होने वाले हैं।
यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह बार न्यायिक परंपराओं का निर्माण करती है, विधिक नेतृत्व गढ़ने की प्रयोगशाला है, यहां से निकले नाम देश की न्याय व्यवस्था की धुरी रहे हैं।
क्योंकि इस बार एसोसिएशन में चुनाव हारना भी आगे का रास्ता बंद नहीं करता।
इसलिए इस बार फिर कहा जा रहा है—
“हाईकोर्ट बार के चुनाव में जीत सम्मान है…
और हारकर भी जज बन जाना परंपरा है।”
बार एसोसिएशन– एक दृष्टिकोण
पिछले 48 सालों का रिकॉर्ड देखा जाए तो 1977 से 2025 के बीच बार में अध्यक्ष या महासचिव के पद के लिए चुनाव लड़ने वाले अधिकांश अधिवक्ता हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं।
देश के उपराष्ट्रपति रह चुके जगदीप धनखड़ राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष रह चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट जज रह चुके जस्टिस अजय रस्तोगी हाईकोर्ट बार अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने अपने समय में सेवानिवृत्त जस्टिस आलोक शर्मा को शिकस्त दी थी।
कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस नरेंद्र कुमार जैन भी इस बार के अध्यक्ष रह चुके हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष रह चुके कई अधिवक्ता बाद में हाईकोर्ट में जज नियुक्त हो चुके हैं, जिनमें जस्टिस वी.एस. दवे, जस्टिस एस.एन. भार्गव, जस्टिस नवरंग टिबरेवाल शामिल हैं।
वर्तमान में SAFEMA के चेयरमैन, इलाहाबाद और मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस एम.एन. भंडारी भी इस बार के अध्यक्ष रहे हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान सिटिंग जज जस्टिस अनिल कुमार उपमन इस बार के अंतिम अध्यक्ष हैं जो हाईकोर्ट में जज नियुक्त हुए हैं।
इस बार के चुनावों का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि बार अध्यक्ष–महासचिव के पद पर चुनाव हारने वाले कई अधिवक्ता भी हाईकोर्ट जज से लेकर मुख्य न्यायाधीश तक बन चुके हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा भी राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ चुके हैं—जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा भी चुनाव हार गए थे।
मध्यप्रदेश और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस मोहम्मद रफीक ने राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में महासचिव पद का चुनाव लड़ा था—वे मनिंदर कौशिक से चुनाव हार गए थे।
तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस आर.एस. चौहान ने हाईकोर्ट बार के महासचिव पद पर चुनाव लड़ा, लेकिन वे अपने प्रतिद्वंदी जस्टिस गोवर्धन बर्धार से चुनाव हार गए थे।
राजस्थान हाईकोर्ट के जज रह चुके जस्टिस आलोक शर्मा ने भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जस्टिस अजय रस्तोगी से अध्यक्ष का चुनाव हार गए थे।