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सांगानेर भूमि विवाद में जेडीए को बड़ा झटका: सांगानेर की बहुचर्चित 200 करोड़ की जमीन पर जेडीए का दावा खारिज

Jaipur Court Acquits IB Employee Nathulal Dhobi After 16 Years, No Witness Appeared in Case

जयपुर, जयपुर की एक सिविल कोर्ट ने सांगानेर स्थित बेशकिमती करीब 200 करोड़ की जमीन पर जेडीए का दावा खारिज करते हुए जेडीए के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा जारी की हैं.

जयपुर महानगर प्रथम स्थित सिविल कोर्ट दक्षिण ने फूलचंद की ओर से दायर वाद पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया हैं.

अदालत ने स्पष्ट किया है कि विवादित भूमि पर बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जा सकती।

मामला सांगानेर तहसील के ग्राम रामसिंहपुरा उर्फ ढोला स्थित खसरा संख्या 198, 200 से 203, 205 से 207, 255, 256, 260 सहित कुल 17 खसरों की लगभग 2.98 हेक्टेयर भूमि जुड़ा हैं.

इस मामले में वादी फूलचंद ने अदालत में दावा किया था कि उनके परिवार का लंबे समय से उक्त भूमि पर कब्जा है और जेडीए द्वारा भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90-बी के तहत की गई कार्यवाही अवैध है.

वादी की ओर से अधिवक्ता अरविंद सोनी ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि अनुसूचित जाति की भूमि के हस्तांतरण के लिए कानूनन आवश्यक अनुमति और प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना जरूरी हैं.

अधिवक्ता ने कहा कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के इस प्रकार की कार्यवाही विधिसंगत नहीं मानी जा सकती.

बहस सुनने के बाद सिविल जज डॉ. नीलम सुलभ जैन ने अपने आदेश में जेडीए को आदेश दिया कि वह विवादित भूमि को न तो किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करे, न ही बेचने, पट्टा देने या किसी योजना के नाम पर कब्जा हटाने की कोशिश करे.

अदालत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जेडीए सार्वजनिक मंदिर निर्माण, सड़क या हरित क्षेत्र विकसित करने के नाम पर भी वादी के कब्जे की जमीन पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन न किया जाए, तब तक वादी और उसके परिवार को भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता.

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