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राजस्थान के एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश के लिए Supreme Court ने अपने आदेश में क्यों कहा-प्रतिभाशाली हैं, इसलिए किए जाते हैं ट्रांसफर !

Supreme Court Says Frequent Transfers of Rajasthan Principal District Judge Are Based on Merit, Not Punishment

जयपुर। Supreme Court ने राजस्थान न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश गुप्ता द्वारा बार-बार किए जा रहे तबादलों के खिलाफ दायर रिट याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

Supreme Court ने इस मामले में याचिका का निस्तारण करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।

Supreme Court में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस ज्योमाला बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को न्यायिक प्रशासनिक मामलों के लिए गठित समिति से परामर्श के बाद दो सप्ताह के भीतर उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया हैं.

ट्रांसफर को दी थी चुनौती

राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता ने अपने ट्रांसफर आदेश को विशेष अनुमति याचिका दायर कर Supreme Court में चुनौती दी थी।

हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने वरिष्ठ जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैडर के अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता का तबादला ब्यावर जिला न्यायालय से जालोर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर किया था।

याचिका में कहा गया कि वे राजस्थान उच्च न्यायिक सेवा में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं और बहुत कम समय में बार-बार ट्रांसफर किए गए, जिससे उन्हें गंभीर व्यक्तिगत, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में जज दिनेश कुमार गुप्ता ने अपने अब तक के सेवा रिकॉर्ड और पूर्व पदस्थापनों का भी उल्लेख किया है।

प्रतिभाशाली न्यायिक अधिकारी

Supreme Court ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता डी.जे. दिनेश कुमार गुप्ता की पूर्व नियुक्तियां, जिनमें राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव तथा जयपुर विकास प्राधिकरण में लॉ डायरेक्टर के रूप में पदस्थापन शामिल है, किसी भी रूप में दंडात्मक नहीं मानी जा सकतीं।

Supreme Court ने कहा कि ये पोस्टिंग याचिकाकर्ता के उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और एक प्रतिभाशाली न्यायिक अधिकारी के रूप में उनकी पहचान को दर्शाती हैं।

हालांकि, Supreme Court ने यह माना कि याचिकाकर्ता को अपनी वर्तमान पदस्थापना, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जालोर, को लेकर वास्तविक और गंभीर चिंता है।

10 माह बाद सेवानिवृत्ति

Supreme Court में दायर की गई याचिका में जज दिनेश कुमार गुप्ता ने अपने पक्ष में दलील दी कि उनकी सेवानिवृत्ति में अब केवल 10 माह का समय शेष है।

इसके साथ ही वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं, जिनके लिए उन्हें जयपुर में नियमित और निरंतर चिकित्सा उपचार की आवश्यकता है।

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता जज की पत्नी राज्य के शिक्षा विभाग में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं और वे भी शीघ्र ही सेवानिवृत्त होने वाली हैं।

ऐसे में दूरस्थ जिले में पदस्थापना न केवल पारिवारिक संतुलन को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके स्वास्थ्य उपचार में भी बाधा उत्पन्न कर रही है।

जयपुर में नियुक्ति का अनुरोध

जज दिनेश कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर स्वास्थ्य, पारिवारिक परिस्थितियों और सेवानिवृत्ति में 10 माह शेष रहने के आधार पर अनुरोध किया कि उन्हें जयपुर या उसके आसपास किसी ऐसे पद पर नियुक्त किया जाए, जो उनके वर्तमान पद, वरिष्ठता और अनुभव के अनुरूप हो।

याचिका में यह भी कहा गया कि इस संबंध में 3 दिसंबर 2025 को एक विस्तृत प्रतिवेदन राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन को सौंपा जा चुका है।

सहानुभूतिपूर्वक विचार करें हाईकोर्ट, हम प्रशंसा करेंगे

मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रशासन में तबादले एक संवेदनशील विषय हैं, जिनमें संस्थागत आवश्यकताओं के साथ-साथ अधिकारी की व्यक्तिगत, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे प्रतिवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि इस मामले में दो सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाता है, तो हम उसकी प्रशंसा करेंगे।

सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं जज गुप्ता

जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता अपने फैसलों को लेकर हमेशा ही चर्चा में रहे हैं।

बॉम्बे ब्लास्ट के दौरान देश के बड़े नेताओं से लेकर अधिकारियों को जिला अदालत से नोटिस जारी करना हो, या फिर जयपुर कमर्शियल कोर्ट के जज रहते हुए सांगानेर में सैकड़ों फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ आदेश पारित करना.

जज दिनेश कुमार गुप्ता हमेशा ही चर्चा में रहे हैं।

लेकिन पिछले दिनों देश के एक बड़े उद्योगपति से जुड़े एक फैसले के चलते वे सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक चर्चा में रहे।

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