बालोतरा, राजस्थान। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् का 17वां राष्ट्रीय अधिवेशन 26 से 28 दिसंबर 2025 तक राजस्थान के बालोतरा–नाकोड़ा स्थित लालबाग परिसर में आयोजित किया जाएगा।
तीन दिवसीय इस भव्य राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर सभी प्रशासनिक, संगठनात्मक और व्यवस्थागत तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।
आयोजन स्थल को गुरुवार को अंतिम रूप दे दिया गया, वहीं पूरे जोधपुर प्रांत के अधिवक्ता कार्यकर्ता पिछले कई दिनों से बालोतरा में डेरा डालकर व्यवस्थाओं को अंतिम स्वरूप देने में जुटे हुए हैं।
राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के सभी राज्यों से करीब 4000 से अधिक अधिवक्ता भाग लेंगे। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट एवं देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, भारत सरकार के वरिष्ठ विधि अधिकारी, केंद्रीय मंत्री तथा कानून जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल होंगी।
कला और संस्कृति का भव्य प्रदर्शन
परिषद् के जोधपुर प्रांत के तत्वावधान में 26 से 28 दिसंबर तक बाड़मेर के बालोतरा में आयोजित होने जा रहे राष्ट्रीय अधिवेशन में राजस्थान की समृद्ध कला और संस्कृति का भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा।
इस अधिवेशन में जालौर जिले के बावड़ी गांव की प्रसिद्ध गेर नृत्य मंडली अपनी लोककलात्मक प्रस्तुति देगी। इस प्रस्तुति के जरिए देशभर से आए अधिवक्ताओं और अतिथियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया जाएगा।
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बावड़ी गांव के गेरिये गेर दल के प्रमुख तानसेन के नेतृत्व में 12 सदस्यीय दल इस राष्ट्रीय मंच पर पारंपरिक गेर नृत्य की प्रस्तुति देगा।
ढोल-थाली की सजीव थाप, एकरूप वेशभूषा और समूह में की जाने वाली तालबद्ध नृत्य शैली गेर नृत्य को विशेष बनाती है। यह नृत्य जालौर जिले और संपूर्ण मारवाड़ क्षेत्र की लोकसंस्कृति की पहचान माना जाता है, जिसे पुरुष नर्तक पारंपरिक अंदाज में प्रस्तुत करते हैं।
जस्टिस विनीत माथुर ने किया निरीक्षण
राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियों को लेकर गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस विनीत माथुर ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया।

जस्टिस माथुर बालोतरा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंशालाल के साथ दोपहर में लालबाग पहुंचे, जहां उन्होंने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिवक्ता परिषद् के जोधपुर प्रांत महामंत्री श्याम पालीवाल एवं आयोजन समिति के सदस्यों के साथ कॉन्फ्रेंस हॉल, भोजन पांडाल, जल मंदिर, अतिथियों के आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
जस्टिस विनीत माथुर ने आयोजन को सुव्यवस्थित और गरिमामय बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए और सभी तैयारियों को समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
उन्होंने विशेष रूप से देशभर से आने वाले अतिथियों के आगमन, आवागमन और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान बावड़ी गांव की गेर नृत्य मंडली ने एक संक्षिप्त लेकिन शानदार प्रस्तुति दी, जिसे देखकर न्यायाधीश सहित उपस्थित सभी अतिथियों ने सराहना की।
इस अवसर पर अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् की केंद्रीय समिति एवं प्रांत समिति के कई सदस्य भी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय अधिवेशन में जहां एक ओर विधि, न्याय और अधिवक्ता समाज से जुड़े गंभीर मंथन होंगे, वहीं दूसरी ओर राजस्थान की लोकसंस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियां आयोजन को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

अधिवेशन का उद्घाटन समारोह 26 दिसंबर को दोपहर 2.30 बजे से आयोजित होगा। उद्घाटन से पूर्व सुबह परिषद् की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न होगी, जिसमें संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।
उद्घाटन सत्र का केंद्रीय विषय “भारतीय संविधान के 75 वर्ष : सामाजिक समरसता” रखा गया है, जो वर्तमान समय में संविधान की भूमिका और सामाजिक एकता के महत्व को रेखांकित करेगा।
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