जजों की नियुक्तियों के नाम रहा राजस्थान की न्यायपालिका में वर्ष 2025
जयपुर/जोधपुर। वर्ष 2025 राजस्थान की न्यायपालिका के इतिहास में एक ऐसे निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज हुआ, जिसने बीते कई वर्षों से चली आ रही जजों की कमी, नियुक्तियों में देरी और न्यायिक ठहराव की स्थिति को काफी हद तक तोड़ा।
जहां वर्ष 2024 राजस्थान हाईकोर्ट के लिए जजों की नियुक्ति के लिहाज से पूरी तरह निराशाजनक साबित हुआ और पूरे वर्ष में एक भी नई नियुक्ति नहीं हो सकी, वहीं वर्ष 2025 लगातार नियुक्तियों का वर्ष बनकर सामने आया।
पिछले पांच वर्षों में वर्ष 2024 ही ऐसा साल रहा, जब राजस्थान हाईकोर्ट में एक भी जज की नियुक्ति नहीं हो पाई। इस दौरान हाईकोर्ट से लेकर जिला न्यायपालिका तक अदालतें सीमित न्यायाधीशों के सहारे भारी कार्यभार संभालती रहीं।
इसके विपरीत वर्ष 2025 ने न केवल इस निराशा को पीछे छोड़ा, बल्कि न्यायिक ढांचे को नई मजबूती देने का काम भी किया।
कभी नहीं भर पाए 100 प्रतिशत पद
देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में अपने स्वीकृत 34 पदों पर 33 जजों के साथ कार्य कर रही है, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट इस मामले में कभी भी पूर्ण रूप से सफल नहीं रहा।
हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पद 50 होने के बावजूद अब तक कभी भी सभी पद नहीं भरे जा सके। यहां तक कि 50 पद स्वीकृत होने के बाद भी राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की संख्या कभी स्थायी रूप से 40 तक नहीं पहुंच पाई।
वर्ष 2024 राजस्थान की उच्च न्यायपालिका के लिए विशेष रूप से निराशाजनक रहा। जजों की कमी के कारण मामलों की सुनवाई पर सीधा असर पड़ा और लंबित प्रकरणों का दबाव लगातार बढ़ता गया।
हालांकि वर्ष 2025 ने इस स्थिति में बड़ा बदलाव करते हुए नियुक्तियों की प्रक्रिया को नई गति दी। और पहली बार हाईकोर्ट में जजों की संख्या ने 40 के आंकड़े को पार कर रिकॉर्ड बनाया.
2025 में रिकॉर्ड 15 जजों की नियुक्ति
वर्ष 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट को लंबे समय से प्रतीक्षित नए न्यायाधीश मिले।
केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद अधिवक्ता कोटे और न्यायिक अधिकारी कोटे से बड़ी संख्या में नियुक्तियां की गईं।
वर्ष की शुरुआत 23 जनवरी 2025 को हुई, जब न्यायिक अधिकारी कोटे से जिला एवं सत्र न्यायाधीश चन्द्रशेखर शर्मा, प्रमिल कुमार माथुर और चन्द्र प्रकाश श्रीमाली को राजस्थान हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया गया।

इन तीन नियुक्तियों ने वर्ष की शुरुआत में ही यह संकेत दे दिया कि 2025 नियुक्तियों का वर्ष बनने जा रहा है।
इसके बाद फरवरी 2025 में अधिवक्ता कोटे से जस्टिस मनीष शर्मा की नियुक्ति हुई। यह नियुक्ति इसलिए भी खास रही क्योंकि उनके नाम की सिफारिश राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा मई 2020 में की गई थी।
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महंति की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम बैठक में अधिवक्ता कोटे से 12 और जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोटे से 8 नामों की सिफारिश की गई थी, जिनमें से जस्टिस मनीष शर्मा की नियुक्ति लगभग साढ़े तीन वर्ष बाद संभव हो सकी।
मार्च 2025 राजस्थान हाईकोर्ट के लिए बेहद शानदार रहा। 26 मार्च को अधिवक्ता कोटे से आनंद शर्मा, सुनील बेनीवाल, मुकेश राजपुरोहित और संदीप शाह को हाईकोर्ट जज नियुक्त किया गया। इन नियुक्तियों से हाईकोर्ट की कार्यक्षमता और न्यायिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
22 जुलाई 2025: एक दिन में सात जज
वर्ष 2025 का 22 जुलाई राजस्थान की न्यायपालिका के इतिहास में विशेष रूप से दर्ज हो गया, जब एक ही दिन में सात नए जजों की नियुक्ति हुई।

अधिवक्ता कोटे से संदीप तनेजा, बलजिंदर सिंह संधु, बिपिन गुप्ता, संजीत पुरोहित, रवि चिरानिया और अनुरूप सिंघी, जबकि न्यायिक अधिकारी कोटे से संगीता शर्मा को हाईकोर्ट जज नियुक्त किया गया।
वर्ष 2025 के शुरुआती सात महीनों में कुल 15 जजों की नियुक्ति हुई, जिसके चलते राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की कार्यरत संख्या एक समय पर बढ़कर 43 तक पहुंच गई।
राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के बाद यह पहला अवसर था, जब इतनी बड़ी संख्या में जज एक साथ कार्यरत रहे।
सेवानिवृत्तियों ने फिर घटाई संख्या
जहां एक ओर नियुक्तियों ने राहत दी, वहीं वर्ष 2025 में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में सर्वाधिक जजों की सेवानिवृत्ति भी हुई।
जनवरी 2025 में जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस मदन गोपाल व्यास सेवानिवृत्त हुए। मई में जस्टिस बीरेंद्र कुमार, सितंबर में जस्टिस नरेंद्र ढढा और नवंबर में जस्टिस मनोज कुमार गर्ग सेवानिवृत्त हुए।
इन सेवानिवृत्तियों और वर्ष के अंत में हुए तबादलों के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की संख्या घटकर 39 रह गई। यानी स्वीकृत 50 पदों की तुलना में अभी भी बड़ी संख्या में पद रिक्त बने हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान
वर्ष 2025 राजस्थान की न्यायपालिका के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज और तत्कालीन गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विजय बिश्नोई को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।

राष्ट्रपति द्वारा 29 मई 2025 को जारी नियुक्ति वारंट के साथ ही राजस्थान की उपस्थिति देश की सर्वोच्च न्यायपालिका में और मजबूत हुई।
वरिष्ठ जज संदीप मेहता सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान से जज है। जस्टिस विजय बिश्नोई के साथ अब सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान से जुड़े दो जजों की मौजूदगी हैं
तबादलों का भी रहा साल
वर्ष 2025 जहां राजस्थान की न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति का साल रहा वही यह सबसे ज्यादा जजों के तबादलों का साल भी रहा.
राजस्थान हाईकोर्ट वर्ष 2025 तबादलों का गवाह रहा, क्योंकि इस साल सबसे ज्यादा जजों के ट्रांसफर हुए.
14 जुलाई -तबादलों का दिन
14 जुलाई को प्रदेश ही देश की न्यायपालिका में भी तबादलों का दिन कहा जा सकता हैं. इसी दिन देश के कई हाईकोर्ट न्यायाधीशों के साथ ही 4 हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का तबादला किया गया.
राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालिन मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव के साथ ही जस्टिस अरूण मोंगा और जस्टिस चन्द्रशेखर का भी दूसरे हाईकोर्ट में तबादला किया गया.
वही मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम श्रीवास्तव को राजस्थान में तबादला किया गया. इसके साथ ही जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का भी राजस्थान हाईकोर्ट में तबादला किया गया.
चौंकाने वाला ट्रांसफर
14 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस दिनेश मेहता का दिल्ली हाईकोर्ट में तबादला किया गया, जिसे वर्ष का सबसे चौंकाने वाला ट्रांसफर माना गया।
इसी दिन जस्टिस अवनीश झींगन का भी राजस्थान हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर हुआ।

जयपुर–दिल्ली–जयपुर
वर्ष 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस अरूण मोंगा का जयपुर—दिल्ली—जयपुर ट्रांसफर काफी सुर्खियों में रहा.
14 जुलाई 2025 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट भेजा गया और ठीक तीन माह बाद 14 अक्टूबर 2025 को उनका दोबारा राजस्थान हाईकोर्ट में तबादला किया गया।
मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक बदलाव
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एम. श्रीवास्तव का मद्रास हाईकोर्ट स्थानांतरण किया गया, जबकि मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.आर. श्रीराम को राजस्थान हाईकोर्ट भेजा गया।

राष्ट्रपति भवन से जारी आदेश की पालना में जस्टिस के.आर. श्रीराम ने 21 जुलाई 2025 को राजस्थान के 43वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उनका कार्यकाल 69 दिनों का रहा और वे 27 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो गए।

इसके बाद 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति ने जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। 27 सितंबर को उन्होंने कार्यभार संभाला और इसके बाद रोस्टर में बदलाव, प्रशासनिक पुनर्गठन और कार्यदिवसों से जुड़े कई अहम निर्णय लिए।
11 पद रिक्त, कॉलेजियम का इंतजार
वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट अपने स्वीकृत 50 जजों के पदों पर 39 जजों के साथ कार्य कर रहा है। इसका अर्थ है कि हाईकोर्ट में अभी भी 11 पद रिक्त हैं।
हाईकोर्ट के रिक्त 11 पदों में से 1 नाम पहले से ही केन्द्र सरकार के पास पेडिंग है जिसके चलते फिलहाल हाईकोर्ट कॉलेजिमय 10 नाम भेज सकता है।.
पिछले माह हाईकोर्ट कॉलेजियम की बैठक आयोजित करने को लेकर चर्चाएं चलीं।
इन चर्चाओं में जयपुर और जोधपुर पीठ के 5 अधिवक्ताओं तथा 5 जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के नामों पर विचार किए जाने की बात सामने आई। हालांकि कॉलेजियम बैठक का औपचारिक एजेंडा या निर्णय सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया।
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट का कॉलेजियम कुछ नामों पर एकराय बनाने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट से इस बात पर दिशानिर्देशों का इंतजार किया जा रहा है कि क्या कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश कॉलेजियम कर जजों के नामों की सिफारिश कर सकते हैं या नहीं।
देश में पहले भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं, जब किसी हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के पत्र के आधार पर कॉलेजियम कर जजों के नामों की सिफारिश की है।
2026 में एक सेवानिवृत्ति
वर्ष 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट के एकमात्र जज की सेवानिवृत्ति प्रस्तावित है। कानून मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा आगामी सितंबर 2026 में सेवानिवृत्त होंगे।
शीतल मिर्धा की नियुक्ति संभव!
राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम ने अधिवक्ता कोटे से शीतल मिर्धा का नाम सुप्रीम कोर्ट को भेजा गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2025 को अन्य साथी अधिवक्ताओं के साथ शीतल मिर्धा के नाम पर भी मुहर लगाते हुए केन्द्र को सिफारिश भेजी थी.
7 माह के बाद भी केन्द्र सरकार ने शीतल मिर्धा के नाम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. अधिवक्ता समुदाय को उम्मीद हैं कि नए साल में शीतल मिर्धा की नियुक्ति की जा सकती हैं.
आगे की राह
वर्ष 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि नियुक्तियों की रफ्तार बढ़ने से मामलों के शीघ्र निस्तारण, लंबित प्रकरणों में कमी और न्यायिक विश्वास को मजबूत करने में मदद मिलती है।
हालांकि अभी भी कई पद रिक्त हैं, लेकिन वर्ष 2025 राजस्थान की न्यायपालिका के लिए एक मजबूत आधार वर्ष के रूप में सामने आया है, जिससे आने वाले वर्षों में और बेहतर सुधारों की उम्मीद की जा सकती है.
वर्ष 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम नए नाम की कवायद पूर्ण कर सकता हैं ये शुरूआती महिनों में ही सामने आ सकता हैं जिससे राजस्थान की न्यायपालिका को नए जज मिल सकते हैं.
कॉलेजियम के एकराय नही होने की स्थिती पर एडहॉक जजों की प्रक्रिया भी सामने लाई जा सकती हैं.
एडहॉक जजों की नियुक्ति
लंबे समय से देश में एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर चर्चा होती रही हैं जहां सेवानिवृत हो चुके जजों को पुन: कुछ समय के लिए नियुक्ति कि जा सकती हैं.
एडहॉक जज एक रिटायर जज होता है, जिसे किसी विशिष्ट रिक्ति या उद्देश्य के लिए सीमित अवधि के लिए अस्थायी आधार पर नियुक्त किया जाता है।
जानकारी के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट एडहॉक जजों की नियुक्ति के मामले की अधिकांश शर्तो को पुरा करता हैं ऐसे में इस पर विचार किया जा सकता हैं.