भारतीय अधिवक्ता परिषद के 17वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ, देशभर से 4000 से अधिक अधिवक्ता जुटे
जोधपुर/बालोतरा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस विजय बिश्नोई ने कहा कि जाति और भाषा के आधार पर राष्ट्र की अवधारणा बेहद घातक है।
उन्होंने कहा कि यह विचार कि राजस्थान में केवल राजस्थानी, महाराष्ट्र में केवल मराठी या केरल में केवल मलयाली ही रह सकता है, पूर्णतः गलत है।
जस्टिस विजय बिश्नोई ने कहा कि देश के अधिवक्ताओं को ऐसी सोच और सामाजिक समस्याओं के खिलाफ सजग रहना होगा।
जस्टिस विजय बिश्नोई शुक्रवार को बाड़मेर के बालोतरा में आयोजित भारतीय अधिवक्ता परिषद के 17वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
बालोतरा के नाकोड़ा स्थित लालबाग परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने लोकतंत्र की सफलता के लिए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को अनिवार्य बताया था।
उन्होंने कहा कि जब तक समाज में लिबर्टी, इक्वालिटी और फ्रैटरनिटी एक साथ मौजूद नहीं होंगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता।
1562 कानून हुए समाप्त
समारोह के विशिष्ट अतिथि और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार अब तक देश के 1562 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त कर चुकी है और हाल ही में 71 अन्य अनुपयोगी कानूनों को भी निरस्त किया गया है।
कानून मंत्री ने अधिवक्ताओं को आश्वस्त किया कि वकीलों के लिए मेडिकल पॉलिसी लाने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
साथ ही कानून मंत्री ने ऐडवोकेट्स प्रोटेक्शन को लेकर कहा कि यह एक्ट अभी लॉ कमीशन के समक्ष विचाराधीन है, जिसके लिए आगे कवायद जारी है।
सामाजिक समरसता का मंच
राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विविधताओं का देश है और यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में ही हर 20 किलोमीटर पर पगड़ी, बोली और वेशभूषा बदल जाती है।
ऐसे में संविधान निर्माताओं के सामने सामाजिक समरसता बनाए रखने की कितनी बड़ी चुनौती रही होगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के मंच को सामाजिक समरसता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए अधिवक्ताओं को संविधान का प्रहरी और सिपाही बताया।
कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से
समारोह को भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संबोधित करते हुए कहा कि शहीदी दिवस के अवसर पर अधिवक्ता परिषद का यह सम्मेलन आयोजित होना विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल भाषणों और आयोजनों से नहीं आएगी, बल्कि इसके लिए जमीन पर ठोस कार्य करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि हम संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत न्यायालयों से राहत की अपेक्षा रखते हैं, तो हमें अपने संवैधानिक कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना होगा।
समारोह को अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के. श्रीनिवास मूर्ति ने संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में संगठन की वैचारिक प्रतिबद्धता और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला।
परिषद के महासचिव एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता डी. भरत कुमार ने परिषद की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
समारोह में जोनल सेक्रेटरी कमल परसवाल, प्रांत सचिव श्याम पालीवाल तथा स्वागत समिति की ओर से उद्योगपति रमेश मुथा ने अपने विचार रखे।
ये रहे मौजूद
अधिवेशन के उद्घाटन समारोह में जस्टिस मुकेश राजपुरोहित, जस्टिस विवेक ठाकुर, राज्य के महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद, बालोतरा जिला एवं सत्र न्यायाधीश एम.एल. सुथार, जिला कलेक्टर सुशील कुमार यादव, परिषद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीरा ताई, प्रांत अध्यक्ष सुनील जोशी, नागालैंड से अधिवक्ता लवी लोथा, प्रांत सचिव पूनम शर्मा सहित देशभर से आए परिषद के पदाधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे।
विधायक भी पहुंचे समारोह में
अधिवक्ताओं के इस राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह में चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल, पचपदरा विधायक अरुण चौधरी और बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी भी पहुंचीं।
समारोह में अधिवक्ता परिषद की ओर से इन सभी विधायकों का स्वागत किया गया।
समारोह के अंत में अधिवक्ता परिषद जोधपुर हाईकोर्ट इकाई के महामंत्री देवकीनंदन व्यास, अधिवक्ता प्रतिष्ठा सिंहा और प्रांत अध्यक्ष सुनील जोशी ने देशभर से आए अधिवक्ताओं का आभार जताया।
देर रात तकनीकी सत्र आयोजित
उद्घाटन सत्र के साथ ही इस तीन दिवसीय अधिवेशन में तकनीकी सत्रों की शुरुआत हो गई है।
शुक्रवार शाम 6 बजे कोर्ट रूम कल्चर को लेकर पहला तकनीकी सत्र आयोजित किया गया, वहीं शाम 7.45 बजे अधिवेशन का दूसरा तकनीकी सत्र आयोजित हुआ।
शनिवार को 4 तकनीकी सत्र और रविवार को 1 तकनीकी सत्र आयोजित होगा।
4000 से अधिक अधिवक्ता
अधिवक्ता परिषद के तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के सभी राज्यों से 4000 से अधिक अधिवक्ता शामिल हो रहे हैं।
संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अधिवेशन का मुख्य विषय “भारतीय संविधान के 75 वर्ष : सामाजिक समरसता” रखा गया है।