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LiveLaw Media पर 60 हजार का हर्जाना, अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए दोषी, उपभोक्ता से अधिक वसूली राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश

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जयपुर/पाली। राजस्थान के पाली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम फैसले में डिजिटल सब्सक्रिप्शन सेवाओं से जुड़े उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती देते हुए LiveLaw Media Pvt. Ltd. को दोषी ठहराया है।

आयोग ने पाया कि कंपनी ने उपभोक्ता से ली गई राशि और जारी किए गए बिल में अंतर रखकर अनुचित व्यापार व्यवहार किया, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का स्पष्ट उल्लंघन है।

यह फैसला आयोग ने पाली निवासी हिमांशु राजपुरोहित की ओर से दायर किए गए परिवाद पर एकपक्षीय रूप से दिया है।

टैक्स इनवॉइस से ज्यादा वसूली राशि

परिवादी हिमांशु राजपुरोहित ने आयोग के समक्ष दर्ज कराई शिकायत में बताया कि उसने 20 फरवरी 2024 को LiveLaw मोबाइल ऐप पर एक वर्ष का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लिया था, जिसकी कीमत 2,999 रुपये बताई गई थी।

भुगतान UPI के माध्यम से Google Pay से किया गया, जो Apple India Private Limited के इन-ऐप पेमेंट सिस्टम के जरिए LiveLaw को प्राप्त हुआ।

भुगतान सफल होने के बाद जब परिवादी को ई-मेल के माध्यम से टैक्स इनवॉइस प्राप्त हुआ, तो उसमें सब्सक्रिप्शन की कुल राशि केवल 2,181.82 रुपये दर्शाई गई।

परिवादी के अनुसार, जब उनसे 2,999 रुपये वसूले गए थे, तो बिल में कम राशि दिखाना न केवल भ्रमित करने वाला था, बल्कि आर्थिक नुकसान और विश्वासघात भी था।

परिवादी की ओर से कहा गया कि अंतर की राशि 817.18 रुपये बनती है। परिवादी ने इसे धोखाधड़ी और सेवा में कमी बताते हुए पहले कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब या रिफंड नहीं मिला, जिसके बाद परिवाद पेश किया गया।

कंपनियों का पक्ष

मामले में मुख्य विपक्षी पक्षकार LiveLaw Media Pvt. Ltd. की ओर से आयोग के समक्ष कोई पेश नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई।

वहीं दूसरे पक्षकार Apple India Private Limited ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह केवल भुगतान माध्यम उपलब्ध कराती है और उपभोक्ता का सीधा अनुबंध LiveLaw से है।

Apple ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवादी ने उनसे किसी प्रकार की राहत की मांग नहीं की, इसलिए उनके खिलाफ दायित्व नहीं बनता।

आयोग का फैसला

मामले में परिवादी की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट, इनवॉइस और भुगतान विवरण का गहन परीक्षण किया गया।

आयोग ने माना कि परिवादी से 2,999 रुपये की राशि प्राप्त करने के बावजूद LiveLaw ने 2,181.82 रुपये का बिल जारी किया, जो स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी का मामला है।

आयोग ने यह भी कहा कि डिजिटल और कानूनी सूचना सेवाएं लेने वाले उपभोक्ता, विशेषकर विधि के छात्र और अधिवक्ता, प्लेटफॉर्म पर भरोसा करते हैं और इस प्रकार का व्यवहार उनके विश्वास को ठेस पहुंचाता है।

Apple India Private Limited के संबंध में आयोग ने कहा कि उनके विरुद्ध सेवा में कमी या अनुचित व्यवहार का कोई ठोस आरोप सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए उन्हें मामले से मुक्त किया जाता है।

आदेश और हर्जाना

आयोग ने LiveLaw Media Pvt. Ltd. को निर्देश दिया कि वह परिवादी हिमांशु राजपुरोहित को अधिक वसूली गई राशि 817.18 रुपये का भुगतान 9% वार्षिक ब्याज सहित करे।

आयोग ने इसके साथ ही LiveLaw पर परिवादी को मानसिक पीड़ा के लिए 18,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 12,000 रुपये, कुल 30,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही आयोग ने उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यापार करने और उनके विश्वास को ठेस पहुंचाने के कारण LiveLaw पर कुल 30,000 रुपये का हर्जाना लगाया है।

आयोग ने यह राशि उपभोक्ता कल्याण कोष, जयपुर में 30,000 रुपये बतौर दंड जमा कराने के आदेश दिए हैं।

साथ ही आयोग ने LiveLaw Media Pvt. Ltd. को भविष्य में केवल वास्तविक रूप से ली गई राशि के अनुरूप ही इनवॉइस जारी करने का निर्देश दिया है।

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