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जन्मदिन विशेष: जोधपुर से सुप्रीम कोर्ट तक, राजस्थान की न्यायिक परंपरा के गौरव-जस्टिस संदीप मेहता

Birthday Special: Supreme Court Senior Judge Justice Sandeep Mehta, Pride of Rajasthan’s Judiciary

नई दिल्ली/जोधपुर। देश की न्यायपालिका के अत्यंत प्रतिष्ठित और अनुभवी जजों में शामिल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संदीप मेहता का आज जन्मदिन है।

राजस्थान के साथ ही देशभर के विधि जगत से उन्हें लगातार जन्मदिन पर बधाई दी जा रही है। देशभर से जजों, अधिवक्ताओं, विधि विशेषज्ञों और न्यायिक संस्थाओं की ओर से शुभकामनाएं मिल रही हैं।

राजस्थान की धरती से निकलकर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचे जस्टिस संदीप मेहता का न्यायिक सफर न केवल गौरवपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक भी है।

जोधपुर में जन्म, विधि यात्रा की शुरुआत

11 जनवरी 1961 को राजस्थान के ऐतिहासिक शहर जोधपुर में जन्मे जस्टिस संदीप मेहता ने प्रारंभ से ही अध्ययन, अनुशासन और परिश्रम को जीवन का आधार बनाया।

उन्होंने जोधपुर विश्वविद्यालय से बी.एससी. (B.Sc.) और बाद में विधि (Law) की शिक्षा प्राप्त की।

कानून की पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि संवैधानिक प्रश्नों, आपराधिक न्याय प्रणाली और मानवाधिकारों में गहराई से विकसित हो चुकी थी।

विधि शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वर्ष 1988 में उन्होंने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और अपने विधिक करियर की औपचारिक शुरुआत की।

ट्रायल कोर्ट से

अपने करियर के शुरुआती वर्षों में जस्टिस संदीप मेहता ने जोधपुर के ट्रायल कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ, जोधपुर में नियमित वकालत शुरू की।

कानून पर उनकी मजबूत पकड़, तथ्यात्मक विश्लेषण और तर्कपूर्ण प्रस्तुति ने बहुत कम समय में उन्हें विशिष्ट पहचान दिला दी।

विशेष रूप से आपराधिक कानून के क्षेत्र में वे एक असाधारण अधिवक्ता के रूप में स्थापित हुए। गंभीर आपराधिक मामलों, संवैधानिक विवादों और जटिल विधिक प्रश्नों पर उनकी पैरवी को अदालतों में विशेष सम्मान मिला।

वे न केवल राजस्थान हाईकोर्ट, बल्कि देश के विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी प्रभावी ढंग से पक्ष रखते रहे।

सुप्रीम कोर्ट तक

लगभग 25 वर्षों की सफल वकालत के बाद 30 मई 2011 को जस्टिस संदीप मेहता को राजस्थान हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

हाईकोर्ट में रहते हुए उन्होंने संवैधानिक, आपराधिक, दीवानी और प्रशासनिक कानून से जुड़े अनेक रिपोर्टेबल और ऐतिहासिक फैसले दिए। उनके निर्णयों में कानून की स्पष्टता, मानवाधिकारों की रक्षा और न्यायिक संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

विशेषकर आपराधिक मामलों में उनके फैसले आज भी निचली अदालतों और अधिवक्ताओं के लिए मार्गदर्शक माने जाते हैं।

12 फरवरी 2023 को उन्हे पदोन्नत करते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के 36 वें मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया.

कुछ माह बाद ही उन्हे गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद से पदोन्नत सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में नियुक्त किया गया.

9 नवंबर 2023 को उन्होने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली.

युवा अधिवक्ताओं के लिए आदर्श

राजस्थान में वकालत कर रहे युवा अधिवक्ताओं के लिए जस्टिस संदीप मेहता आज भी प्रेरणास्रोत माने जाते हैं।

उनका पेशेवर आचरण, अदालत में अनुशासन, भाषा की मर्यादा और कानून की निष्पक्ष व्याख्या विधि जगत में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत की जाती है।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन जोधपुर के महासचिव विजय चौधरी कहते हैं कि उनके प्रयासों ने यह सिद्ध किया कि परिश्रम, ईमानदारी और निरंतर अध्ययन से ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर संभव है।

उनकी वकालत का मूल मंत्र था-तथ्यों की ईमानदार प्रस्तुति, कानून की शुद्ध व्याख्या और अदालत के प्रति सर्वोच्च सम्मान।

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद कहते हैं कि राजस्थान के विधि जगत के लिए जस्टिस संदीप मेहता का जीवन एक प्रेरणा है जो आज युवा अधिवक्ताओं को प्रेरणा देता हैं कि कैसे जमीनी स्तर से जुड़कर टॉप तक पहुंचा जा सकता है.

बार काउंसिल में नेतृत्वकारी भूमिका

न्यायिक मंच के साथ-साथ बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में भी जस्टिस संदीप मेहता का योगदान उल्लेखनीय रहा।

वे वर्ष 2004–05 में बार काउंसिल के उपाध्यक्ष और वर्ष 2010 में अध्यक्ष चुने गए।

इस अवधि में उन्होंने अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा, पेशेवर नैतिकता, प्रशिक्षण और बार–बेंच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कीं।

राष्ट्रीय स्तर की लीगल कॉन्फ्रेंस के आयोजन से राजस्थान को विधिक विमर्श के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने में उनकी अहम भूमिका रही। जोधपुर में बार काउंसिल के नव-निर्मित भवन का श्रेय भी उनके प्रयासों को दिया जाता है।

विधिक सेवा और सामाजिक सरोकार

जस्टिस संदीप मेहता ने विधिक सेवा (Legal Aid) के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

कमजोर, वंचित और हाशिए पर खड़े वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने विधिक सेवा संस्थाओं को सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया।

वे नेत्रहीन विकास संस्थान, जोधपुर सहित कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे और सामाजिक उत्थान के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।

पर्यावरण, आम आदमी और कैदियों के अधिकार

उनकी न्यायिक दक्षता, वरिष्ठता और निष्पक्ष छवि को देखते हुए उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति को राजस्थान की न्यायिक परंपरा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

हाल ही में जोजरी नदी प्रकरण में दिए गए रिपोर्टेबल जजमेंट को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस फैसले में न्यायालय ने प्रदूषण के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासनिक जवाबदेही को भी स्पष्ट किया।

राजस्थान हाईकोर्ट में रहते हुए जस्टिस मेहता ने क्लाइमेट चेंज, ई-प्रिजन सॉफ्टवेयर, और तालछापर ब्लैकबक सेंचुरी जैसे मामलों में ऐतिहासिक आदेश दिए।

ई-प्रिजन सॉफ्टवेयर पर उनके फैसले से जेल प्रशासन में पारदर्शिता, कैदियों के अधिकारों की रक्षा और डिजिटल निगरानी प्रणाली को मजबूती मिली।

तालछापर सेंचुरी मामले में स्वप्रेरणा संज्ञान लेकर दिए गए आदेशों ने वन्यजीव संरक्षण और विकास के बीच संतुलन का स्पष्ट संदेश दिया।
उनकी न्यायिक सोच यह दर्शाती है कि न्याय केवल विवादों के निस्तारण तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों और पर्यावरण की रक्षा का भी माध्यम है।

न्यायिक दृष्टि और विरासत

सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट में दिए गए जस्टिस संदीप मेहता के फैसले यह सिद्ध करते हैं कि वे न्याय को संविधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़कर देखते हैं। उनकी न्यायिक और सामाजिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

आज उनके जन्मदिन के अवसर पर देशभर के विधि मंचों पर उन्हें एक निष्पक्ष, विद्वान और अनुकरणीय न्यायाधीश के रूप में याद किया जा रहा है। राजस्थान की न्यायिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

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