जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित सहायक अभियोजन अधिकारी (Assistant Prosecution Officer – APO) भर्ती परीक्षा 2024 के विवादित परिणाम के मामले में RPSC मुख्य परीक्षा नियंत्रक गुरूवार को हाईकोर्ट में पेश हुए.
जस्टिस समीन जैन की इन कैमरा सुनवाई करते हुए परीक्षा नियत्रंक द्वारा उपलब्ध सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध कराई गयी उत्तर पुस्तिकाओं को देखा.
सार्वजनिक हित का मामला
एकलपीठ ने इस मामले केा सार्वजनिक महत्व का बताते हुए राज्य सरकार से वरिष्ठ स्तर पर पक्ष रखने का आदेश दिया हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है, इसलिए संबंधित अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) को भी अनिवार्य रूप से पेश होकर पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जिसके बाद आज फिर से इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया हैं.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि परीक्षा के मूल्यांकन में अपनाए गए मापदंड मनमाने हैं और संबंधित विज्ञापन की शर्तों व दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं हैं।
याचिका में दलील
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया हैं समकक्ष परीक्षाओं में याचिकाकर्ताओं ने न्यूनतम से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जिससे उनकी तैयारी स्पष्ट होती है। इसके बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जो न्यायसंगत नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के प्रणव वर्मा एवं अन्य बनाम रजिस्ट्रार जनरल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट मामले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने ऐसे मामलों में सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से ग्रेस मार्क्स देकर मॉडरेशन करने के निर्देश दिए थे। इसी आधार पर आरपीएससी परीक्षा में भी निष्पक्ष मॉडरेशन की मांग की गई।
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