जयपुर। जयपुर की पॉक्सो अदालत संख्या 2 ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक बेहद गंभीर मामले में आरोपी को अलग-अलग धाराओं में 5 साल, 10 साल, 20-20 साल की सजा सुनाई है।
सभी सजाएं एक साथ चलने के चलते आरोपी को कुल 20 साल जेल में बिताने होंगे।
पॉक्सो अदालत के विशेष जज कैलाशचन्द्र अटवासिया ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाना, उसके साथ शारीरिक शोषण करना समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध है, जिसे किसी भी दृष्टि से सहन नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों में अदालत को न केवल पीड़िता के अधिकारों की रक्षा करनी होती है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखना भी आवश्यक होता है।
अदालत ने कहा कि POCSO अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करना है, और ऐसे मामलों में कानून का कठोर अनुपालन किया जाना आवश्यक है।
जबरन दुष्कर्म का आरोप
मामला जयपुर के पुलिस थाना सामोद से जुड़ा है, जिसमें आरोपी मोहनलाल के खिलाफ पॉक्सो के तहत मामला दर्ज किया गया था।
01 जून 2022 को नाबालिग पीड़िता के पिता ने पुलिस थाना सामोद में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले में आरोप लगाया गया था कि उसकी बेटी को आरोपी 26 मई 2022 को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था।
साथ ही नाबालिग के साथ जबरन दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। अदालत द्वारा आरोप-पत्र पर संज्ञान लेते हुए अभियुक्त के विरुद्ध ट्रायल किया। ट्रायल के दौरान अभियोजन ने कुल 13 गवाह और 29 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए।
अलग-अलग धाराओं में सजा
पॉक्सो अदालत ने आरोपी मोहनलाल को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है।
बीएनएस की धारा 363 में 5 साल जेल और 25 हजार का जुर्माना
बीएनएस की धारा 366 में 10 साल जेल और 50 हजार का जुर्माना
पॉक्सो की धारा 5एल/6 में 20 साल जेल और 1 लाख का जुर्माना
पॉक्सो की धारा 3/4एल में 20 साल जेल और 1 लाख का जुर्माना
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिसके चलते आरोपी को कुल 20 साल जेल में बिताने होंगे। आरोपी पर कुल 2 लाख 75 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
पीड़िता को 7 लाख की सहायता
पॉक्सो विशेष अदालत के जज कैलाशचन्द्र अटवासिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और पीड़िता को हुई पीड़ा के लिए आरोपी पर लगाए गए जुर्माने की राशि में से 2 लाख रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही अदालत ने पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 5 लाख रुपये की राशि प्रदान करने का आदेश दिया है।