राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार कार्यदिवस का मामला फिर गरमाया, सैकड़ो अधिवक्ताओं ने बार अध्यक्ष महासचिव को लिखा पत्र
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट फुल कोर्ट द्वारा प्रत्येक माह के दो शनिवार कार्यदिवस घोषित करने के खिलाफ जयपुर हाईकोर्ट के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने एक बार फिर से आवाज उठाई है।
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर के सैकड़ों अधिवक्ताओं के हस्ताक्षरयुक्त एक प्रतिवेदन हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष और महासचिव को दिया गया है।
इस प्रतिवेदन में मांग की गई है कि शनिवार को कार्यदिवस घोषित नहीं किया जाए।

रिपोर्ट का इंतजार
शनिवार कार्यदिवस को लेकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा मामले में गठित की गई कमेटी की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, ऐसे में अधिवक्ताओं के बीच आगामी शनिवार को लेकर काफी संशय है।
इसी के चलते 24 जनवरी के शनिवार से ठीक दो दिन पूर्व यह प्रतिवेदन बार को सौंपा गया है।
युवा अधिवक्ताओं के हित में नहीं
अधिवक्ताओं के इस प्रतिवेदन में शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने से विशेषकर युवा अधिवक्ताओं पर पड़ने वाले दुष्परिणामों को लेकर चिंता की गई है।
पत्र में कहा गया है कि शनिवार को मामलों की सुनवाई से कार्य-दबाव बढ़ रहा है और इससे न्यायिक गुणवत्ता तथा अधिवक्ताओं के पेशेवर विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
प्रतिवेदन में कहा गया है कि सप्ताह में पहले से निर्धारित कार्यदिवसों में भारी work pendency के बावजूद, शनिवार को नियमित सुनवाई रखने से अधिवक्ताओं—खासकर नवप्रवेशी व युवा वकीलों—के लिए अध्ययन, शोध और केस तैयारी का समय सीमित हो रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि युवा अधिवक्ताओं को अनुभव, मार्गदर्शन और संतुलित कार्य-जीवन की आवश्यकता होती है, ताकि वे अदालतों में प्रभावी प्रस्तुति दे सकें।

जजों की नियुक्ति की जाए
अधिवक्ताओं ने प्रतिवेदन में मांग की है कि अगर लंबित प्रकरणों की संख्या को ही कम करना है तो सबसे पहले जजों की नियुक्ति की जाए।
प्रतिवेदन में कहा गया है कि शनिवार को पूर्ण कार्यदिवस रखने से अधिवक्ताओं की पेशेवर थकान बढ़ती है, जिसका असर बहस की गुणवत्ता और न्यायिक परिणामों पर पड़ सकता है।
पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि युवा अधिवक्ताओं के लिए शनिवार का दिन प्रशिक्षण, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ संवाद, निर्णयों के अध्ययन और कौशल-विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
पहले 15-20 हजार वजीफा करें तय
अधिवक्ताओं ने बार को सौंपे प्रतिवेदन में कहा है कि इसके बावजूद भी अगर शनिवार को कार्यदिवस घोषित किया जाता है, तो पहले युवा अधिवक्ताओं के लिए कम से कम 15 से 20 हजार रुपये का वजीफा तय किया जाए।
लंबे समय में नकारात्मक प्रभाव
प्रतिवेदन में युवा अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि शनिवार के दिन युवा नियमित सुनवाई में व्यस्त रहेगा, तो उनके दीर्घकालिक करियर निर्माण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
शनिवार को अधिवक्ताओं को अपने क्लाइंट्स से समन्वय, दस्तावेज़ी तैयारी और कानूनी शोध के लिए पर्याप्त समय मिलने की जरूरत बताई गई है।
प्रतिवेदन के साथ करीब 12 से अधिक पेज पर सैकड़ों अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षर कर शनिवार को कार्यदिवस घोषित नहीं करने की मांग की है।