कांग्रेस नेता अंकुर मंगलानी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका, ट्रस्ट प्रबंधन विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की अध्यक्ष की याचिका
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सार्वजनिक न्यास (पब्लिक ट्रस्ट) से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट करते हुए कहा है कि ट्रस्ट के विरुद्ध पारित आदेश को कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत हैसियत में चुनौती नहीं दे सकता, भले ही वह ट्रस्ट का अध्यक्ष ही क्यों न हो।
जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश से वास्तविक रूप से प्रभावित पक्ष ट्रस्ट है, तो ट्रस्ट को ही याचिकाकर्ता बनना होगा, अन्यथा याचिका सुनवाई योग्य नहीं मानी जाएगी।
याचिकाकर्ता ट्रस्ट के अध्यक्ष अंकुर मग्लानी की ओर से दायर याचिका को कोर्ट ने लोकस स्टैंडी (अधिकारिता) और आवश्यक पक्षकार को शामिल न करने के आधार पर खारिज करते हुए यह आदेश दिया है।
ये है मामला
श्रीगंगानगर स्थित श्री अरोड़वंश सनातन धर्म मंदिर ट्रस्ट से संबंधित कुछ निजी व्यक्तियों ने राजस्थान सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1959 की धारा 38 के तहत देवस्थान विभाग में शिकायत दी।
इस शिकायत में ट्रस्ट के वर्तमान प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
शिकायत में मुख्य रूप से आरोप था कि ट्रस्ट के मामलों में कुप्रबंधन (Mismanagement) हो रहा है, ट्रस्ट संपत्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है, लेखा-जोखा पारदर्शी नहीं है और ट्रस्ट के संचालन में नियमों की अनदेखी की जा रही है।
देवस्थान विभाग, हनुमानगढ़ के सहायक आयुक्त ने 16 सितंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए धारा 38 के अंतर्गत आंशिक रूप से आवेदन स्वीकार किया और निजी प्रतिवादियों को ट्रस्ट के विरुद्ध सिविल न्यायालय में वाद दायर करने की अनुमति दे दी।
देवस्थान विभाग के आदेश को चुनौती
देवस्थान विभाग के आदेश को चुनौती देते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष अंकुर मग्लानी ने राजस्थान हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और ट्रस्ट के संपूर्ण प्रबंधन के लिए उत्तरदायी हैं।
याचिका में कहा गया कि धारा 38 के तहत दायर आवेदन में लगाए गए आरोप सीधे तौर पर उन्हीं पर हैं। इसलिए वे इस आदेश से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं।
अधिवक्ता ने दलील दी कि देवस्थान विभाग द्वारा दी गई अनुमति गलत तथ्यों और रिपोर्ट पर आधारित है और आदेश से उनकी प्रतिष्ठा और ट्रस्ट के हितों को नुकसान पहुंचा है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि ट्रस्ट को पक्षकार बनाए बिना भी याचिका सुनवाई योग्य है क्योंकि विवाद व्यक्तिगत आरोपों से जुड़ा हुआ है।
निजी प्रतिवादियों की आपत्तियां
मामले की सुनवाई के दौरान निजी प्रतिवादियों/शिकायतकर्ताओं ने प्रारंभिक स्तर पर ही याचिका की सुनवाई योग्यता (Maintainability) पर गंभीर आपत्तियां उठाईं।
प्रतिवादी अजय नागपाल और अशोक भूतना के अधिवक्ता राजेश परिहार ने दलील दी कि याचिका में लोकस स्टैंडी का अभाव है और आवेदन धारा 38 के तहत ट्रस्ट के विरुद्ध दायर किया गया था, किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं।
देवस्थान विभाग का आदेश भी ट्रस्ट से संबंधित है, ऐसे में अध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से याचिका दायर नहीं कर सकते।
अधिवक्ता राजेश परिहार ने कहा कि याचिका में यह कहीं नहीं दर्शाया गया कि ट्रस्ट ने किसी प्रस्ताव द्वारा अध्यक्ष को रिट दायर करने के लिए अधिकृत किया हो।
आवश्यक पक्षकार को शामिल न करना
अधिवक्ता ने दलील दी कि जिस ट्रस्ट के खिलाफ सिविल वाद दायर करने की अनुमति दी गई है, उसे ही याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया।
बिना ट्रस्ट को पक्षकार बनाए रिट याचिका अस्वीकार्य है।
कारण-कार्य (Cause of Action) का अभाव
अधिवक्ता ने कहा कि अनुमति देने मात्र से याचिकाकर्ता के किसी वैधानिक अधिकार का हनन नहीं हुआ और वास्तविक विवाद सिविल न्यायालय में तय होना है।
हाईकोर्ट का आदेश
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका व्यक्तिगत हैसियत में दायर की गई है।
कोर्ट ने कहा कि याचिका के शीर्षक और तथ्यों से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने रिट व्यक्तिगत क्षमता में दायर की है, न कि ट्रस्ट की ओर से। केवल यह कहना कि वह ट्रस्ट का अध्यक्ष है, पर्याप्त नहीं है।
हाईकोर्ट ने माना कि देवस्थान विभाग का आदेश केवल ट्रस्ट के कथित कुप्रबंधन से जुड़ा है। चुनाव या अध्यक्ष के कार्यकाल से जुड़े आरोपों पर विभाग ने कोई निर्णय नहीं दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी को इस आदेश से शिकायत हो सकती है, तो वह ट्रस्ट ही है, न कि अध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ट्रस्ट को पक्षकार बनाए याचिका दायर करना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। ट्रस्ट इस मामले में न केवल आवश्यक बल्कि अनिवार्य पक्षकार है।
अंतिम आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु तय करते हुए याचिका को खारिज करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास रिट दायर करने का लोकस स्टैंडी नहीं है।