सीटें बढ़ने पर RTE बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य, निजी स्कूल नहीं कर सकेंगे प्रवेश से इनकार, बच्चों की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिए आदेश
जयपुर। शिक्षा के मौलिक अधिकार को मजबूती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूल आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009) के तहत आवंटित छात्रों को प्रवेश देने से इनकार नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने जयपुर स्थित महाराजा सवाई भवानी सिंह स्कूल, जयपुर को आदेश दिया है कि वह आरटीई के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा-1 में प्रवेश दे।
जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने मास्टर खुशांश शर्मा सहित 10 अन्य छात्रों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
बच्चों की याचिका पर आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह आदेश 11 नाबालिग छात्रों की ओर से उनके अभिभावकों द्वारा दायर की गई याचिका पर दिया है।
सभी छात्रों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत ऑनलाइन आवेदन किया था।
राज्य शिक्षा विभाग की प्रक्रिया के अनुसार प्रवेश के लिए इन छात्रों को महाराजा सवाई भवानी सिंह स्कूल, जगतपुरा (जयपुर) आवंटित की गई थी।
हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने इन छात्रों को कक्षा में बैठने और प्रवेश लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
स्कूल का तर्क था कि आरटीई के तहत प्रवेश केवल एंट्री लेवल (प्री-प्राइमरी) तक सीमित है और कक्षा-1 में आरटीई के तहत प्रवेश नहीं दिया जा सकता।
स्कूल के इस रवैये से आहत होकर अभिभावकों ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं की दलील
छात्रों की ओर से अधिवक्ता प्रांजल सिंह, रिद्धी चंद्रावत, सार्थक सक्सेना और एस.एस. नरूका ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ इस मामले में पहले ही विस्तृत फैसला दे चुकी है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यह तय हो चुका है कि स्कूल का एंट्री लेवल प्री-प्राइमरी तक ही क्यों न हो, यदि स्कूल में कक्षा-1 में भी सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो स्कूल को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत कक्षा-1 में भी प्रवेश देना होगा।
हाईकोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि—
यदि स्कूल में कक्षा-1 की सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो आरटीई के तहत चयनित छात्रों को भी कक्षा-1 में प्रवेश पाने का पूरा अधिकार है, भले ही स्कूल का एंट्री लेवल प्री-प्राइमरी ही क्यों न हो।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
याचिका में दी गई दलीलों के आधार पर जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि यह निर्विवाद तथ्य है कि सभी याचिकाकर्ता छात्र आरटीई अधिनियम के तहत पूरी तरह पात्र हैं।
छात्रों को प्रवेश देने से इनकार करना कानूनन गलत है और कोई भी स्कूल आरटीई के प्रावधानों से बच नहीं सकता।
कोर्ट ने कहा कि जब राज्य सरकार द्वारा छात्रों को स्कूल आवंटित किया जा चुका है, तो स्कूल प्रबंधन की यह जिम्मेदारी है कि वह उन्हें शिक्षा प्रदान करे।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने महाराजा सवाई भवानी सिंह स्कूल, जयपुर के प्रबंधकों को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता सभी छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा-1 में प्रवेश दें।
यदि छात्र प्रवेश लेकर पढ़ाई प्रारंभ करते हैं, तो राज्य सरकार स्कूल को आरटीई के तहत निर्धारित शुल्क की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) करेगी।