राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति के समय किए गए माप का रिकॉर्ड नहीं किया गया पेश
जयपुर। राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गई है।
2016 की SI भर्ती में शारीरिक मापदंडों खासतौर पर हाइट मापन में कथित अनियमितता को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन ADGP (Recruitment & Promotion Board) सचिन मित्तल को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने तत्कालीन ADGP और वर्तमान में जयपुर पुलिस कमिश्नर को 30 जनवरी सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश प्रताप मीणा व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने दिए हैं।
याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने न केवल 05 अक्टूबर 2016 के विज्ञापन के तहत उप निरीक्षक (सशस्त्र पुलिस), उप निरीक्षक (खुफिया शाखा) एवं प्लाटून कमांडर (आरएसी) पदों पर नियुक्ति की मांग की है, बल्कि कथित रूप से अपात्र निजी प्रतिवादियों की नियुक्ति को गलत बताते हुए भी चुनौती दी है।
सचिन मित्तल क्यों!
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिस समय यह भर्ती हुई उस समय अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड) के पद पर सचिन मित्तल थे और वे भर्ती से जुड़े तथ्यों से भली-भांति अवगत थे तथा उन्होंने प्रमाणित किया था कि किसी भी अभ्यर्थी को शारीरिक माप में छूट नहीं दी गई।
हाईकोर्ट ने 14 मार्च 2024 को आदेश दिया था कि भर्ती में शामिल हुए याचिकाकर्ता और चयनितों के हाइट व चेस्ट मापन रिपोर्ट की डिटेल दी जाए।
आदेश के बावजूद राज्य सरकार द्वारा अब तक ऐसा कोई शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें याचिकाकर्ताओं और निजी प्रतिवादियों की लंबाई, सीने की माप तथा शारीरिक माप परीक्षण (पीएसटी) से संबंधित संपूर्ण विवरण उपलब्ध हो।
हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश में स्पष्ट रूप से पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय भर्ती) का शपथपत्र प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए थे।
भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर आरोपों और आदेश की अनुपालना न होने को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने सचिन मित्तल, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को 30 जनवरी 2026 को प्रातः 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति राज्य के डीजीपी को अनुपालना हेतु भेजने का भी आदेश दिया है।
हाइट में “छूट” या हेराफेरी
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि SI भर्ती में नियमों को ताक पर रखकर कुछ अभ्यर्थियों को हाइट में अनुचित छूट (Relaxation) दी गई।
याचिका में कहा गया कि नियम साफ कहते हैं कि वैध फिटनेस/फिट प्रमाणपत्र के बिना किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद आरोप है कि 168 सेंटीमीटर से कम लंबाई वाले उम्मीदवार भी रिकॉर्ड में लंबाई बढ़ाकर थानेदार बना दिए गए।
योग्य बाहर, अयोग्य भीतर?
याचिकाकर्ता प्रताप मीणा सहित अन्य अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि वे सभी निर्धारित शारीरिक मानकों पर खरे उतरते थे, फिर भी उन्हें चयन से बाहर कर दिया गया।
वहीं, नियमों का उल्लंघन कर कुछ उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया। इससे न केवल अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की साख पर भी सवाल खड़े हो गए।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
राजस्थान हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद 14 मार्च 2024 को राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं और निजी प्रतिवादियों की हाइट व चेस्ट मापन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
इसके साथ ही नियुक्त अभ्यर्थियों के नियुक्ति-कालीन मापन विवरण (Measurement Details) भी रिकॉर्ड पर लाने के आदेश दिए थे।
इसके बावजूद विभाग की ओर से तीन बार शपथपत्र दाखिल किए गए, लेकिन अदालत को जवाब संतोषजनक नहीं लगे। रिकॉर्ड में विसंगतियां और विरोधाभास सामने आने पर कोर्ट ने इसे गंभीर अवमानना के रूप में देखा।
सीधे सवालों के घेरे में ADGP
राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि एसआई भर्ती जैसे संवेदनशील मामले में अधूरी जानकारी और टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसी कारण ADGP सचिन मित्तल की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
कोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस सब-इंस्पेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर यदि गलत तरीके से नियुक्तियां हुई हैं, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम होंगे।