टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

राजस्थान के कुल 1050 पुलिस थानों में से 915 में लगे CCTV, कैमरों की संख्या भी बढ़ाकर कि गयी 6 से 16

Supreme Court Reviews CCTV Compliance: Rajasthan Emerges as Model State with 915 Police Stations Covered

पुलिस थानों में CCTV कैमरे स्थापित करने के मामले पर SC में सुनवाई, राजस्थान सरकार ने शपथपत्र के साथ पेश किया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। राजस्थान सरकार ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के मामले में देशभर में मजबूत और प्रभावी रिकॉर्ड पेश किया है।

राज्य के कुल 1050 पुलिस थानों में से 915 थानों में CCTV सिस्टम पूरी तरह स्थापित किया जा चुका है, जबकि शेष थानों में भी चरणबद्ध तरीके से काम जारी है।

इसके साथ ही राजस्थान सरकार ने प्रत्येक पुलिस थाने में CCTV कैमरों की संख्या 6 से बढ़ाकर 16 करने का नीतिगत निर्णय लिया है, जिससे निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को और सुदृढ़ किया जा सके।

यह जानकारी राजस्थान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने यह रिपोर्ट पेश की है।

सरकार ने पेश किए रिकॉर्ड

सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में संपूर्ण राजस्थान में कुल 1050 पुलिस थानों में से 915 में सीसीटीवी स्थापित हैं।

ये हैं राजस्थान के आंकड़े—

राजस्थान में कुल पुलिस थाने: 1,050

सीसीटीवी सिस्टम से लैस पुलिस थाने: 915

जहां स्थापना अभी शेष: 135

निर्माणाधीन पुलिस थाने: 10

कैमरों की संख्या पूर्व में: प्रति थाना 6 CCTV कैमरे

नई नीति के अनुसार: प्रति थाना 16 CCTV कैमरे

75.12 करोड़ का अतिरिक्त बजट

अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) शिव मंगल शर्मा ने सरकार की ओर से जानकारी देते हुए अदालत को बताया कि पुलिस थानों में सीसीटीवी और उससे जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और उपकरणों के लिए राज्य सरकार ने ₹75.12 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है।

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि यह केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का औपचारिक पालन नहीं है, बल्कि हिरासत में पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को लेकर लिया गया एक ठोस नीतिगत निर्णय है।

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि कैमरों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य हिरासत से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की मनमानी, शिकायत या मानवाधिकार उल्लंघन की संभावनाओं को न्यूनतम करना है।

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले के प्रभावी अनुपालन के लिए स्पष्ट समय-सीमा के साथ चरणबद्ध योजना तैयार की है।

स्वतः संज्ञान पर सुनवाई

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी मामलों को लेकर स्वतः संज्ञान से दायर याचिका पर सुनवाई की।

यह सुनवाई Suo Motu Writ Petition (Civil) No. 7 of 2025 – In Re: Lack of Functional CCTVs in Police Stations in Rajasthan के तहत हुई, जिसे वर्ष 2021 के ऐतिहासिक परमवीर सिंह सैनी बनाम भारत संघ फैसले से जोड़ा गया है।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी पुलिस थानों और जांच एजेंसियों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए थे।

न्यायमित्र ने की सराहना

सुनवाई के दौरान मामले में नियुक्त न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने राजस्थान सरकार द्वारा की गई पालना और अनुपालन ढांचे की सराहना करते हुए कहा कि सीसीटीवी स्थापना को लेकर राजस्थान ने जो योजना, बजट आवंटन और निगरानी तंत्र विकसित किया है, वह देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक मॉडल बन चुका है।

राज्यों के DGP, गृह सचिव को निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सीसीटीवी निर्देशों के समान और प्रभावी अनुपालन पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह सचिव 21 फरवरी 2026 को न्यायमित्र के साथ एक वर्चुअल बैठक में भाग लेंगे, जिसमें परमवीर सिंह सैनी (2021) के फैसले के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक राज्य को सभी पुलिस थानों के सीसीटीवी कैमरों को जोड़ने के लिए एक केंद्रीकृत सर्वर सिस्टम स्थापित करना होगा, जिससे निगरानी, डेटा सुरक्षा, ऑडिट और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

अदालत ने दोहराया कि सीसीटीवी कैमरे केवल तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा का एक अहम माध्यम हैं।

सबसे अधिक लोकप्रिय