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शांति धारीवाल को बड़ा झटका, एकल पट्टा प्रकरण में ट्रायल कोर्ट ने ACB को दी जांच की अनुमति, पुराने आदेशों की फिर हुई पुष्टि

ACB Gets Nod for Further Probe in JDA Single Lease Case; Trial Court Rejects Withdrawal Plea

जयपुर। प्रदेश के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण घोटाले में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल को एसीबी कोर्ट से बड़ा झटका लगा हैं.

जयपुर एसीबी कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को इस मामले में अग्रिम जांच करने की अनुमति दे दी है।

यह आदेश एसीबी द्वारा दायर उस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया, जिसमें पूर्व में पेश क्लोजर रिपोर्ट के बावजूद आगे की जांच की अनुमति मांगी गई थी।

एसीबी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुनील यादव अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व आदेशों के मद्देनज़र एसीबी अग्रिम अनुसंधान कर सकती है।

धारा-321 के तहत आवेदन खारिज

कोर्ट ने एसीबी के उस आवेदन को भी खारिज कर दिया, जो धारा-321 के तहत अभियोजन वापसी के आवेदन को वापस लेने से संबंधित था।

अदालत ने कहा कि यह विषय पहले ही तय हो चुका है और अभियोजन वापसी की अर्जी पूर्व में खारिज की जा चुकी है, ऐसे में उसे वापस लेने का प्रश्न ही नहीं उठता।

अभियोजन वापसी पर अदालत का सख्त रुख

गौरतलब है कि गहलोत सरकार के कार्यकाल में एसीबी ने 19 जनवरी 2021 को तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) जी.एस. संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर और जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ अभियोजन वापस लेने का आवेदन किया था।

उस समय ट्रायल कोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया था।

करीब पांच वर्ष बाद भजनलाल सरकार के कार्यकाल में उसी आवेदन को वापस लेने का प्रार्थना पत्र दायर किया गया, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वर्ष 2021 में इस मुद्दे पर पहले ही निर्णय दिया जा चुका है।

कोर्ट ने दो टूक कहा कि जब अभियोजन वापसी की अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है, तो उसे वापस लेने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि मामले में जांच का रास्ता खुला रहेगा।

क्या है एकल पट्टा प्रकरण?

पूरा मामला 29 जून 2011 का है, जब जयपुर विकास प्राधिकरण ने गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम एकल पट्टा जारी किया था।

इस पट्टे को लेकर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे।

वर्ष 2013 में परिवादी रामशरण सिंह ने इसकी शिकायत ACB में दर्ज कराई।

शिकायत के बाद जांच आगे बढ़ी और तत्कालीन ACS जी.एस. संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, शैलेंद्र गर्ग सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

एसीबी ने मामले में चालान पेश किया और विवाद बढ़ने पर विभाग ने 25 मई 2013 को उक्त एकल पट्टा निरस्त कर दिया। इसके बावजूद मामला अदालतों में चलता रहा और अलग-अलग स्तरों पर कानूनी फैसले आते रहे।

सरकार बदलते ही क्लोजर रिपोर्ट

प्रदेश में सरकार बदलने के बाद गहलोत सरकार के कार्यकाल में एसीबी ने इस मामले में तीन क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश कीं।

इन रिपोर्टों में पूर्व आईएएस जी.एस. संधू, पूर्व आरएएस निष्काम दिवाकर और ओंकारमल सैनी को क्लीन चिट दी गई।

इसके बाद सरकार ने वर्ष 2021 में इन अधिकारियों के खिलाफ केस वापस लेने का आवेदन भी दायर कर दिया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ तीनों अधिकारियों ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

17 जनवरी 2023 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा केस वापस लेने को सही ठहराया। इस आदेश के खिलाफ अशोक पाठक ने Supreme Court of India में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामले की पुनः सुनवाई के निर्देश दिए और कहा कि इस पर Rajasthan High Court के मुख्य न्यायाधीश स्वयं सुनवाई करें।

इसके बाद हाईकोर्ट ने एसीबी को अग्रिम अनुसंधान के लिए ट्रायल कोर्ट का रुख करने के निर्देश दिए थे।

एसीबी के लिए राह

ट्रायल कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब एसीबी के लिए रास्ता साफ हो गया है कि वह इस बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में अग्रिम जांच करे।

जांच के दायरे में एक बार फिर वे सभी निर्णय, फाइलें और प्रक्रियाएं आएंगी, जिनके आधार पर एकल पट्टा जारी किया गया था और बाद में उसे निरस्त किया गया।

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