टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

आदर्श क्रेडिट सोसायटी घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने Official Liquidator के आवेदन पर जवाब के लिए सभी पक्षों को दिया एक सप्ताह का समय

Rajasthan SI Recruitment 2021 Row Reaches Supreme Court: Caveat Filed Seeking Hearing Before Any Order

नई दिल्ली। बहुचर्चित आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े घोटाले के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की डिफॉल्ट बेल (डिफॉल्ट जमानत) की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए लाखों निवेशकों की गाढ़ी कमाई की वापसी को प्राथमिक मुद्दा बताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से ठोस पुनर्भुगतान तंत्र पर जवाब मांगा है।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ में आरोपी राहुल मोदी व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

यह मामला आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाले से जुड़ा है, जिसमें देशभर के 20 लाख से अधिक निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी सामने आई थी।

राजस्थान सरकार का विरोध: “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग”

राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. डी. संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने आरोपियों की डिफॉल्ट बेल याचिका का कड़ा विरोध करते हुए इसे “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” करार दिया।

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता पहले भी इसी प्रकार की राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं।

6 मार्च 2024 के आदेश के तहत उन्होंने अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस ले ली थी और वैकल्पिक उपाय अपनाने की बात कही थी।

ऐसे में अब दोबारा उसी राहत के लिए नई याचिका दायर करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है और इसे ‘नॉट मेंटेनेबल’ माना जाना चाहिए।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी लगातार अलग-अलग मंचों पर बार-बार याचिकाएं दाखिल कर न्यायिक प्रक्रिया को लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ट्रायल में देरी हो रही है।

20 लाख निवेशक, हजारों करोड़ की ठगी

राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष मामले की गंभीरता बताते हुए कहा कि जांच में सामने आया है कि देशभर में फैले 20 लाख से अधिक निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये एकत्रित किए गए, जिन्हें कथित रूप से शेल कंपनियों और फर्जी लेन-देन के जरिए हड़प लिया गया।

सरकार के अनुसार, इस मामले में आरोपी न केवल मुख्य साजिशकर्ता हैं, बल्कि अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के अंतिम लाभार्थी भी हैं। यह एक संगठित आर्थिक अपराध है, जिसने लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है।

अपराध की गंभीरता और ट्रायल की स्थिति

राजस्थान सरकार ने डिफॉल्ट बेल का विरोध करते हुए तीन प्रमुख आधार रखे।

सरकार ने कहा कि अपराध का व्यापक प्रभाव हुआ है और यह एक विशाल आर्थिक अपराध है, जिससे लाखों निर्दोष निवेशक प्रभावित हुए हैं।

सरकार ने चार्जशीट दाखिल होने पर ट्रायल को लेकर कहा कि मामले में कई चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं और वर्तमान में आरोप तय (फ्रेमिंग ऑफ चार्ज) का चरण चल रहा है।

सरकार ने प्रक्रिया में देरी के प्रयास का आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी लगातार विभिन्न अदालतों में याचिकाएं दाखिल कर कार्यवाही को टालने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार ने स्पष्ट कहा कि ऐसे गंभीर आर्थिक अपराध में आरोपियों को डिफॉल्ट बेल का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।

“निवेशकों का पैसा कैसे लौटे?”

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ने जमानत देने का अनुरोध किया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया—“लाखों निवेशकों के पैसे की वापसी कौन सुनिश्चित करेगा? क्या राज्य सरकार इसके लिए तैयार है?”

कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उसका मुख्य उद्देश्य आरोपियों की जमानत पर निर्णय करना नहीं, बल्कि निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।

कोर्ट ने इस मामले में संपत्तियों को लेकर जानकारी मांगी।

प्रवर्तन निदेशालय और परिसंपत्तियों की स्थिति

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस घोटाले से जुड़ी सभी प्रमुख संपत्तियों को पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अटैच किया जा चुका है।

ये संपत्तियां फिलहाल केंद्र सरकार के अधीन नियुक्त आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) के नियंत्रण और अभिरक्षा में हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया कि निवेशकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया इन अटैच संपत्तियों के परिसमापन (लिक्विडेशन) और बिक्री के जरिए ही संभव होगी।

यह पूरी प्रक्रिया न्यायालय की निगरानी में की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अधिकतम वसूली हो सके।

अधिकतम वसूली का प्रस्ताव

इस दौरान आधिकारिक परिसमापक की ओर से दाखिल एक आवेदन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें अदालत से संपत्तियों को सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचने की अनुमति मांगी गई है।

राजस्थान सरकार ने इस आवेदन का समर्थन करते हुए कहा कि सार्वजनिक नीलामी से संपत्तियों का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त किया जा सकेगा। इससे अधिकतम धनराशि एकत्रित होगी, जिससे यह राशि सत्यापित निवेशकों को लौटाने में उपयोग की जा सकेगी।

सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार निवेशकों के हित में हर संभव सहयोग करेगी।

पहले रिकवरी तंत्र तय होगा

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस समय डिफॉल्ट बेल के मुद्दे पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। अदालत ने कहा कि उसका प्राथमिक फोकस निवेशकों की रकम की वापसी सुनिश्चित करना है।

पीठ ने सभी पक्षों को आधिकारिक परिसमापक द्वारा दायर आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

अदालत ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में वह सभी पक्षों को सुनने के बाद निवेशकों के धन की वसूली और पुनर्भुगतान के लिए एक उपयुक्त तंत्र (मैकेनिज्म) तय करेगी।

किसने की पैरवी

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. डी. संजय और राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने राजस्थान सरकार का पक्ष रखा।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक।

आधिकारिक परिसमापक की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पैरवी की।

सबसे अधिक लोकप्रिय