जयपुर। करीब 8 साल बाद हो रहे राजस्थान बार काउंसिल चुनाव अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं।
मतदान में महज 15 दिन शेष हैं और पूरे प्रदेश में चुनावी सरगर्मी चरम पर है।
इस बार का चुनाव कई मायनों में खास और चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक ओर दशकों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर हाल ही में वकालत शुरू करने वाले युवा चेहरे भी चुनौती पेश कर रहे हैं।
इस बार का चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक बन गया है—जहां एक ओर 54 साल के अनुभव वाले दिग्गज अधिवक्ता मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर सिर्फ 2 से 4 महीने पहले पंजीयन कराने वाले युवा चेहरे भी चुनावी रण में कूद पड़े हैं।
54 साल की वकालत, फिर भी चुनावी जोश बरकरार
इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र बने हैं अधिवक्ता संतोष कुमार जैन, जो राजस्थान बार काउंसिल के सबसे वरिष्ठ सदस्य के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
उनका पंजीयन 11 सितंबर 1972 का है, यानी लगभग 54 साल का अनुभव। वे इस चुनाव में अनुभव और परंपरा का चेहरा बनकर उभरे हैं। इस प्रकार वे लगभग 54 वर्षों के अनुभव के साथ चुनावी मैदान में उतरने वाले सबसे वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।

उनके साथ ही रणजीत जोशी भी वरिष्ठता की सूची में दूसरे स्थान पर हैं और वरिष्ठता के आधार पर मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। जोशी का पंजीयन 27 अक्टूबर 1979 का है और वे करीब 47 वर्षों से वकालत के पेशे में सक्रिय हैं।
वे राजस्थान एडवोकेट एसोसिएशन, जोधपुर के 19 बार अध्यक्ष रह चुके हैं, जिससे उनका संगठनात्मक अनुभव भी उन्हें बढ़त दिलाता है।
रणनीतिक तौर पर बेहद संजीदा माने जाने वाले रणजीत जोशी अपने अनुभव से बने रिश्तों को सिंचने में लगे हैं।
2–4 महीने पहले बने वकील भी मैदान में-चौंकाने वाली एंट्री
इस बार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा युवा उम्मीदवारों की एंट्री को लेकर है।
इस बार चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कुछ ऐसे प्रत्याशी भी मैदान में हैं, जिनका पंजीयन चुनाव की घोषणा से महज 2 से 4 महीने पहले ही हुआ है।
बीकानेर की माया मेघवाल सबसे युवा प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में हैं। उनका पंजीयन 21 दिसंबर 2025 का है, जो चुनाव की घोषणा से लगभग दो महीने पहले हुआ। नामांकन सूची में अंतिम क्रमांक 234 पर अपना नाम दर्ज कराया है।
खास बात यह है कि माया मेघवाल ने दो पृष्ठों का विजन डॉक्युमेंट भी प्रस्तुत किया है, जबकि कई अनुभवी प्रत्याशियों ने कोई विजन डॉक्युमेंट जारी नहीं किया है।

इसी प्रकार अलवर की पूनम यादव भी युवा प्रत्याशियों में प्रमुख हैं। उनका पंजीयन 4 अक्टूबर 2025 का है, यानी उन्होंने भी चुनाव से करीब चार महीने पहले ही वकालत शुरू की है।
नामांकन सूची में उनका क्रमांक 233 है, जिससे वे दूसरी सबसे युवा प्रत्याशी बनती हैं।
युवा चेहरों की बढ़ती भागीदारी
जयपुर की भावना शर्मा, जिनका पंजीयन 18 दिसंबर 2022 का है, तीसरी सबसे युवा महिला अधिवक्ता के रूप में चुनावी मैदान में हैं।
भावना शर्मा (जयपुर) – तीसरी सबसे युवा महिला अधिवक्ता (पंजीयन: 18 दिसंबर 2022)
रामचन्द्र (झुंझुनूं) – सबसे युवा पुरुष अधिवक्ता
त्रिलोकचंद पिलानिया और हेमंत संत (जयपुर) – युवा पुरुष उम्मीदवारों में प्रमुख
कुल 234 प्रत्याशियों के बीच यह चुनाव अब जनरेशन गैप की लड़ाई बनता जा रहा है।
पूर्व जज की एंट्री से मुकाबला और दिलचस्प
चुनाव को और अधिक रोचक बनाने वाला एक पहलू यह भी है कि इस बार एक पूर्व न्यायाधीश भी मैदान में हैं।
पूर्व जज लक्ष्मण दत्त किराडू, जो राजस्थान न्यायिक सेवा में जिला जज (डीजे कैडर) के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे और पॉक्सो कोर्ट से रिटायरमेंट के बाद वकालत कर रहे हैं,

अब बार काउंसिल चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। उनकी उपस्थिति चुनाव को हाई प्रोफाइल बना रही है।
उनकी एंट्री से चुनाव में न्यायिक अनुभव बनाम बार राजनीति का नया समीकरण बन गया है।
गोवर्धन सिंह की पत्नी सुशीला कंवर मैदान में
राजस्थान बार काउंसिल के चुनावी मैदान में एक नाम ऐसा भी है जो लगातार चर्चा में है। अब तक पर्दे के पीछे रहा यह चेहरा पहली बार बार काउंसिल के चुनाव में सामने आया है।
आरटीआई कार्यकर्ता और अधिवक्ता रहे गोवर्धन सिंह की पत्नी सुशीला कंवर भी चुनावी मैदान में हैं।

गौरतलब है कि गोवर्धन सिंह की सदस्यता राजस्थान बार काउंसिल ने समाप्त कर दी थी, जिसके बाद से ही गोवर्धन सिंह ने निर्वतमान चेयरमैन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे।
गोवर्धन सिंह की सदस्यता समाप्त होने के बाद अब पत्नी सुशीला कंवर के मैदान में आने से माना जा रहा है कि उनके समर्थक और पूरी टीम उन्हें बार में शामिल करने के लिए युद्धस्तर पर जुटी है।
तीन वरिष्ठ अधिवक्ता चुनावी मैदान में
राजस्थान बार काउंसिल के इन चुनावों में प्रदेश के तीन डेजिग्नेटेड वरिष्ठ अधिवक्ता चुनावी मैदान में हैं।
डेजिग्नेटेड सीनियर एडवोकेट में सैयद शाहिद हसन, राजीव सुराणा और राजेश पंवार चुनावी मैदान में हैं।
सैयद शाहिद हसन का पंजीयन 7 सितंबर 1984 का है।
वहीं राजीव सुराणा 5 दिसंबर 1993 से वकालत के पेशे में हैं।
वहीं राजेश पंवार 7 जुलाई 1997 से राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य हैं।
इन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की भागीदारी से चुनाव में प्रतिष्ठा और अनुभव का स्तर और ऊंचा हो गया है।

कुल 234 प्रत्याशियों के साथ यह चुनाव विविधता और प्रतिस्पर्धा का अनोखा उदाहरण बन गया है। जहां एक ओर दशकों का अनुभव रखने वाले अधिवक्ता अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर नए और युवा चेहरे बदलाव की उम्मीद के साथ मैदान में उतरे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अधिवक्ताओं की यह लड़ाई अनुभव के पक्ष में जाती है या युवा ऊर्जा इस बार नया इतिहास रचती है। चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि राजस्थान बार काउंसिल की बागडोर आने वाले समय में किसके हाथों में जाएगी।