जयपुर। राजस्थान बार काउंसिल चुनाव को लेकर गठित हाई पावर कमेटी आज राजधानी जयपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रही है।
इस बैठक को चुनाव प्रक्रिया के भविष्य और निष्पक्षता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सुबह 11 बजे अधिवक्ता भवन में प्रस्तावित इस बैठक में चुनाव से जुड़े सभी प्रमुख पक्षों—रिटर्निंग ऑफिसर (RO), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) और उम्मीदवारों—को उपस्थित रहने की अनुमति दी गई है, ताकि सभी पक्षों को सुनकर पारदर्शी निर्णय लिया जा सके।
बैठक के दौरान रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत लिखित जवाब, घटनाओं से जुड़े वीडियो और फोटो साक्ष्य, तथा पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
माना जा रहा है कि कमेटी इस बैठक में जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई का औपचारिक ऐलान भी कर सकती है।
पुनर्मतदान की रणनीति पर होगा निर्णय
कमेटी की इस बैठक का एक प्रमुख एजेंडा पुनर्मतदान को लेकर रणनीति तैयार करना है।
जानकारी के अनुसार जयपुर हाईकोर्ट सहित अन्य प्रभावित केंद्रों पर 4 मई को प्रस्तावित दोबारा मतदान के सफल पूर्ण कराने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
22 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान सामने आई अनियमितताओं और विवादों के बाद यह पुनर्मतदान आवश्यक माना जा रहा है।
कमेटी का प्रयास है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
वयोवृद्ध अधिवक्ताओं के लिए ‘वोट फ्रॉम होम’ पर विचार
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित मुद्दा वयोवृद्ध अधिवक्ताओं के लिए “वोट फ्रॉम होम” (घर से मतदान) सुविधा का प्रस्ताव है।
कुछ प्रत्याशियों ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए यह सुझाव दिया है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के अधिवक्ताओं को घर से ही मतदान की सुविधा दी जाए।
4 मई को प्रस्तावित पुनर्मतदान के दौरान जयपुर और जोधपुर जैसे प्रमुख केंद्रों पर तापमान लगातार बढ़ रहा है।
इन शहरों में बड़ी संख्या में वयोवृद्ध अधिवक्ता रहते हैं, जिनके लिए भीषण गर्मी में मतदान केंद्र तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऐसे में यह मांग उठी है कि जिस प्रकार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वरिष्ठ नागरिकों को घर से मतदान की सुविधा दी जाती है, उसी प्रकार बार काउंसिल चुनाव में भी इस व्यवस्था को लागू किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो मतदान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए पूरे मतदान का वीडियो रिकॉर्ड भी किया जा सकता है।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को हुई अव्यवस्थाओं के दौरान कई वयोवृद्ध सदस्यों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, वहीं व्हीलचेयर की उपलब्धता नहीं थी। इसके अलावा लिफ्ट का संचालन बंद रहने और रैंप की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें विशेष असुविधा झेलनी पड़ी।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सौंपी जा सकती है जिम्मेदारी
चुनाव को निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बनाने के लिए जयपुर और जोधपुर के अनुभवी एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी भी चल रही है।
कमेटी ऐसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है जो अनुशासन के मामले में सख्त माने जाते हैं और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित कर सकते हैं।
हालांकि, कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सहयोग के लिए सहमति जताई है, लेकिन उन्होंने कुछ शर्तें भी रखी हैं—जैसे सख्त नियमों का पालन, अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति और स्पष्ट दिशा-निर्देश।
सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती
जयपुर, जोधपुर और श्रीगंगानगर जैसे केंद्रों पर अभी मतदान शेष है, जिनमें जयपुर सबसे बड़ा केंद्र है। यहां मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण प्रदेशभर से प्रत्याशियों और समर्थकों के पहुंचने की संभावना है।
ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसे देखते हुए चुनाव कमेटी अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और कड़े प्रबंधन की योजना पर भी विचार कर रही है।
निष्पक्ष चुनाव पर टिकी सबकी नजर
राजस्थान बार काउंसिल चुनाव को प्रदेश के विधिक जगत का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आयोजन माना जाता है। 24 अप्रैल को हुई पिछली बैठक में भी कमेटी के सभी सदस्यों ने एकमत से माना था कि 22 अप्रैल की घटनाओं की गंभीर जांच जरूरी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
अब पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं की नजर 28 अप्रैल को होने वाली इस बैठक पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि कमेटी ऐसे ठोस और सख्त निर्णय लेगी, जो चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने में मदद करेंगे।
यदि वयोवृद्ध अधिवक्ताओं के लिए “वोट फ्रॉम होम” जैसी सुविधा लागू होती है, तो यह न केवल एक संवेदनशील और व्यावहारिक कदम होगा, बल्कि भविष्य में अन्य पेशेवर संगठनों के चुनावों के लिए भी एक
