जोधपुर। बार काउंसिल राजस्थान में चुनावी नियंत्रण और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर बड़ा टकराव खुलकर सामने आ गया है।
हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की चौथी बैठक में लिए गए फैसलों ने पूरे अधिवक्ता समुदाय में हलचल मचा दी है।
कमेटी ने साफ शब्दों में कहा है कि चुनाव प्रक्रिया पर उसका पूर्ण नियंत्रण है और किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता जस्टिस जे.आर. मिधा ने की। सूत्रों के अनुसार, कमेटी ने बार काउंसिल राजस्थान के चेयरमैन द्वारा 23 फरवरी को जारी संचार और शो-कॉज नोटिस को अमान्य करार दे दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
कमेटी ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के 18 नवंबर 2025 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया—नामांकन से लेकर मतगणना तक—हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की प्रत्यक्ष निगरानी में होगी।
कमेटी का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना उसकी वैधानिक जिम्मेदारी है और इसी के तहत सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
चुनाव प्रक्रिया पर सीधा नियंत्रण
बैठक में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के 18 नवंबर 2025 के आदेश के तहत पूरी चुनाव प्रक्रिया—मतदान से लेकर मतगणना तक—हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की प्रत्यक्ष निगरानी में होगी। कमेटी ने दो टूक कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है और इसके लिए वह सभी आवश्यक शक्तियों का प्रयोग करेगी।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया बनाम राज्य बार काउंसिल
मामला तब और गरमा गया जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के बीच अधिकारों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए। चेयरमैन की ओर से यह दावा किया गया कि विशेष समिति गठित करने का अधिकार केवल बार काउंसिल ऑफ इंडिया को है, लेकिन हाई-पावर्ड कमेटी ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धाराओं का हवाला देते हुए अपने अधिकारों को वैधानिक ठहराया।
विशेष समिति का गठन, महाधिवक्ता बने अध्यक्ष
हाई-पावर्ड कमेटी ने बड़ा कदम उठाते हुए विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति में राजस्थान के महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता जगमाल सिंह चौधरी व अशोक मेहता को सदस्य नियुक्त किया गया है।
यह समिति तब तक बार काउंसिल के कार्यों की निगरानी करेगी, जब तक नया निर्वाचित निकाय कार्यभार ग्रहण नहीं कर लेता।
चेयरमैन के आदेश अमान्य, स्टाफ को सख्त निर्देश
बैठक के अंत में कमेटी ने 23 फरवरी 2026 को चेयरमैन द्वारा जारी संचार और शो-कॉज नोटिस को अवैध और अमान्य बताते हुए खारिज कर दिया।
साथ ही स्पष्ट किया गया कि एक्टिंग सेक्रेटरी को इन नोटिसों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है। बार काउंसिल के सभी कर्मचारियों को विशेष समिति के निर्देशों का पालन करने के आदेश दिए गए हैं।
चेयरमैन व अन्य सदस्यों के हस्तक्षेप पर कड़ी टिप्पणी
कमेटी ने अपने निर्णय में उल्लेख किया कि बार काउंसिल राजस्थान के चेयरमैन एवं अन्य सदस्यों द्वारा जारी संचार (communications) तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजे गए पत्र, हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी के कार्य में हस्तक्षेप की श्रेणी में आते हैं।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि राज्य में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।
बार मेंबर्स को चेतावनी
कमेटी ने यह भी दर्ज किया कि 19 फरवरी 2026 की बैठक के मिनट्स और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट प्रभावी हो चुके हैं। यदि कोई सदस्य या पदाधिकारी कमेटी के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो इसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना जाएगा।
इतना ही नहीं, यदि कोई सदस्य चुनाव लड़ते समय या किसी प्रत्याशी का प्रस्तावक/समर्थक बनते हुए इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसे चुनाव से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
विशेष समिति (Special Committee) का अनुमोदन
कमेटी ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 8ए के तहत गठित विशेष समिति को औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान की। यह समिति नव-निर्वाचित निकाय के कार्यभार ग्रहण करने तक बार काउंसिल राजस्थान के कार्यों की देखरेख करेगी।
विशेष समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं—
श्री राजेन्द्र प्रसाद, महाधिवक्ता, राजस्थान – अध्यक्ष
श्री जगमाल सिंह चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता – सदस्य
श्री अशोक मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता – सदस्य
कमेटी ने स्पष्ट किया कि यह समिति विधिक रूप से धारा 8ए के अंतर्गत गठित मानी जाएगी।
स्टाफ के लिए सख्त निर्देश
कमेटी ने आदेश दिया कि बार काउंसिल राजस्थान के सभी कर्मचारी विशेष समिति के निर्देशों का पालन करेंगे। किसी भी प्रकार का उल्लंघन ‘दुराचार’ (misconduct) माना जाएगा।
हालांकि, खर्चों से संबंधित चेक जारी करने के मामले में यह स्पष्ट किया गया कि चेक विशेष समिति की स्वीकृति के बाद ही तैयार किए जाएंगे और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही उन्हें हस्ताक्षरित करेंगे।
बढ़ सकता है विवाद
कानूनी हलकों में चर्चा है कि यह टकराव आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है। चुनाव प्रक्रिया, प्रशासनिक अधिकार और वैधानिक शक्तियों की व्याख्या को लेकर अब मामला उच्च स्तर पर कानूनी चुनौती का रूप ले सकता है।
फिलहाल, बार काउंसिल राजस्थान में चुनावी माहौल शुरू हो चुका हैं दूसरी तरफ इन घटनाक्रमों के बाद अधिवक्ता समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।