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राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर को 7 दिन में चौथी, 40 दिन में पांचवीं बम की धमकी, अधिवक्ताओं और पक्षकारों में बढ़ता आक्रोश

Jaipur High Court Receives 5th Bomb Threat in 40 Days; Rajasthan Records 58 Threat Emails in 2025

राजस्थान में ‘बम धमकी’ का रिकॉर्ड, साल 2025 में मिले 58 ईमेल, जयपुर हाई कोर्ट 40 दिनों में 5 बार धमकी

जयपुर, 10 दिसंबर

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन जयपुर में बुधवार सुबह पांचवी बार बम की धमकी मिली हैं.

धमकी भरे मेल के बाद पिछले एक सप्ताह में चौथी बार तत्काल सुनवाई स्थगित करते हुए सभी जज, अधिवक्ताओं सहित कर्मचारियों को बाहर निकाल गया.

पिछले 40 दिनों में यह पांचवीं धमकी थी, जिसने न केवल राजस्थान की न्यायपालिका बल्कि पूरे कानूनी समुदाय और आम जनता में चिंता और असुरक्षा की लहर पैदा कर दी है.

स्थिति यह है कि अदालत परिसर में लगातार मिल रही धमकियों के कारण पाँच बार सुनवाई रोकनी पड़ी, जिससे हजारों मामलों की कार्यवाही प्रभावित हुई है.

जयपुर हाईकोर्ट ही क्यों…

राजस्थान में बम धमकी वाले ईमेल का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। जयपुर हाईकोर्ट से लेकर कोटा कलेक्ट्रेट और बड़े कोचिंग सेंटर तक—प्रशासनिक दफ्तर बार-बार खाली कराए जा रहे हैं। जांच होती है, तलाशी होती है, लेकिन हर बार नतीजा वही—कहीं कोई विस्फोटक नहीं मिलता।

सबसे बड़ा सवाल यह कि कौन है जो राजस्थान की पूरी सिस्टम को चुनौती दे रहा है? कौन है जो 40 दिनों में 5 बार जयपुर हाईकोर्ट को निशाना बना चुका है?

साल 2025 में अब तक 58 धमकी भरे ईमेल सामने आ चुके हैं। इस संख्या ने जयपुर को देश में बम धमकी मामलों में पाँचवें स्थान पर ला दिया है।

पांचवीं बार हाईकोर्ट को निशाना

बुधवार सुबह हाईकोर्ट प्रशासन जयपुर को एक मेल मिला, जिसमें लिखा था कि सीढ़ियों के पास बम लगाया गया है। मेल पढ़ते ही सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पूरी बिल्डिंग को खाली कराया गया।

तुरंत ही बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, ATS और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे और लगभग ढाई घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया.
जांच में हमेशा की तरह कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।

अब तक राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर को 5 बार बम की धमकी मिल चुकी है। यह धमकी 31 अक्टूबर, 3 दिसंबर, 5 दिसंबर, 8 दिसंबर और 9 दिसंबर के बाद अब पाँचवाँ मामला बन गई है। हाईकोर्ट के इतिहास में इससे पहले इतने कम दिनों में इतनी बड़ी संख्या में धमकियाँ नहीं मिलीं।

राजस्थान में 2025 में अब तक 58 ईमेल

राजस्थान में संवेदनशील स्थानों और सरकारी संस्थानों को मिल रहे बम धमकी ईमेलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। केवल साल 2025 में अब तक 58 धमकी भरे ईमेल मिले हैं। इस सूची में जयपुर हाईकोर्ट, कोटा कलेक्ट्रेट, विभिन्न कोचिंग संस्थान, प्रशासनिक दफ्तर और कई निजी प्रतिष्ठान तक शामिल हैं।

देशभर में बम धमकी ईमेल मामलों के आंकड़ों में जयपुर अब दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के बाद पाँचवें स्थान पर पहुंच गया है। यह स्थिति सुरक्षा-व्यवस्था और साइबर-सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अदालत का कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित

लगातार मिल रही बम धमकी के चलते लगातार तलाशी अभियानों के कारण सैकड़ों मामलों की सुनवाई स्थगित कि जा रही हैं. अधिवक्ता और पक्षकार घंटों बाहर खड़े रहते हैं, जजों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ता है.

बीते 7 दिनों में ही 4 बार अदालतों की सुनवाई रोकनी पड़ी, जिसके चलते न्यायिक प्रणाली पर बड़ा दबाव बन गया है।

अधिवक्ता बताते हैं कि—

“सुनवाई रुकने से न सिर्फ समय और ऊर्जा बर्बाद होती है, बल्कि कई मामलों में तत्काल राहत चाहने वाले पक्षकारों पर इसका सीधा असर पड़ता है।”

हाईकोर्ट प्रशासन: 5 एफआईआर, साइबर जांच तेज

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन अब तक 4 एफआईआर दर्ज करा चुका है और बुधवार को मिली धमकी के संबंध में पाँचवीं एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है।
राजस्थान पुलिस, ATS और साइबर सेल लगातार इन मामलों की जांच कर रही हैं।

लेकिन 58 ईमेल मिल जाने के बावजूद अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी का न होना चिंता बढ़ाता है।

सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, फिर भी चुनौतियाँ कायम

राजस्थान हाईकोर्ट का सुरक्षा ढांचा पहले से काफी मजबूत है, तीन प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा कर्मी 24 घंटे तैनात रहते है। और प्रत्येक प्रवेश पर आईडी सत्यापन किया जाता हैं.

बिना वकील की सिफारिश के पास जारी नहीं किए जाते है और जजों के लिए अलग सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था हैं.

CCTV कैमरों का विस्तृत नेटवर्क

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने संपूर्ण हाईकोर्ट परिसर में सीसीटीवी लगा रखे है। इसके साथ ही एक कंट्रोल रूम 24 घंटे इसकी मोनिटरिंग करता हैं.

इसके बावजूद ईमेल धमकियों का सिलसिला जारी रहना सुरक्षा तंत्र को चुनौती देता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि धमकी देने वाले या तो तकनीकी रूप से दक्ष हैं, VPN या डार्क वेब साधनों का उपयोग करते हैं, या देश के बाहर से मेल भेज रहे हैं।

अधिवक्ताओं में बढ़ा आक्रोश

बम धमकियों से लगातार अराजकता के बीच राजस्थान हाईकोर्ट के अनेक अधिवक्ता अब खुलकर नाराज़गी जता रहे है।
कई वकीलों ने पूछा—

“जब देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियाँ इतनी सक्षम हैं, तो ईमेल भेजने वाले तक पहुँचने में देरी क्यों हो रही है? क्या ये लापरवाही नहीं है?”

कुछ अधिवक्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि—

“जब अदालत का कामकाज प्रभावित हो रहा है, तो अब तक किसी न्यायाधीश द्वारा इस पर स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?”

वकीलों का कहना है कि अगर समय रहते आरोपी सामने नहीं आते, तो यह किसी बड़े खतरे में बदल सकता है।

क्या यह किसी संगठित गैंग का काम? या कोई साइबर मस्ती करने वाला?

सुरक्षा एजेंसियाँ कई प्रमुख संभावनाओं पर काम कर रही हैं

जांच एजेंसिया यह देख रही हैं लगातार धमकियां किसी गहरी साजिश का हिस्सा ना हो कि हाईकोर्ट की ध्यान भटकाकर किसी आम जगह को निशाना बनाया जा रहा हो.

जांच एजेसिंयो के सामने कई बिंदूओ में से यह भी कि संगठित गिरोह या असामाजिक तत्व जिसका उद्ददेश्य दहशत फैलाना, सरकारी काम काज बाधित करना, सिस्टम की परीक्षा लेना या सुरक्षा हलकों में भ्रम पैदा करना करना हो सकता हैं

साइबर अपराधी या “रैंडम ट्रोल”, VPN/प्रॉक्सी के जरिए ईमेल भेजना, पकड़े न जाने की मानसिकता, शरारत या मानसिक विकृति कारक हो.

साईबर एक्सपर्ट के अनुसार लगातार मिल रही धमकियों का पैटर्न यह बताता है कि यह किसी अनुशासित और योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। धमकियाँ अक्सर

क्योंकि ये सभी मेल सुबह कोर्ट शुरू होने से पहले, भारी भीड़ के समय या महत्वपूर्ण कार्यदिवसों में भेजी जा रही हैं।

जनता में दहशत और अनिश्चितता

हाईकोर्ट परिसर में मौजूद पक्षकारों और आम लोगों का कहना है कि अब “हर बार कोर्ट आने में डर लगता है, “परिवार भी चिंता में रहता है।”

“कानूनी प्रक्रिया पहले ही लंबी है, ऊपर से हर दूसरे दिन सुनवाई रुक जाती है।”

इस अनिश्चित माहौल ने लोगों की मानसिक सुरक्षा को भी प्रभावित किया है।

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