जयपुर। प्रदेश में बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) की चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
बीसीआर चुनाव में नामांकन शुल्क को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने के बाद हाईकोर्ट ने भी इस प्रकरण की सुनवाई स्थगित कर दी है।

राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा ने याचिका दायर कर नामांकन शुल्क को बढ़ाने को चुनौती दी थी.
मंगलवार को यह मामला जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ में सूचीबद्ध था, सुनवाई शुरू होने के साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अधिवक्ता निखिलेश कटारा ने अदालत को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित स्थगन आदेश पेश किया।
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रहलाद शर्मा द्वारा दायर याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराने के लिए बीसीआई की ओर से ट्रांसफर पिटीशन दाखिल की गई है।
जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर पिटीशन पर सुनवाई करते हुए न केवल याचिका को अपने समक्ष विचाराधीन रखा है, बल्कि राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही पर भी रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रहलाद शर्मा को 20 फरवरी 2026 के लिए नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की जानकारी सामने आने के बाद जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ ने प्रकरण की सुनवाई स्थगित करने का आदेश पारित किया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आगामी आदेश तक इस याचिका में कोई आगे की कार्यवाही नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा विवाद
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने 25 सितंबर को एक नोटिफिकेशन जारी कर बीसीआर चुनाव में प्रत्याशी बनने के लिए नामांकन शुल्क को 10 हजार रुपये से सीधे 1.25 लाख रुपये कर दिया था।
इस फैसले के बाद प्रदेशभर के अधिवक्ताओं में असंतोष फैल गया। कई अधिवक्ताओं और संगठनों ने इसे अनुचित, असंवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताया।
हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा ने एक याचिका दायर इस निर्णय को चुनौती दी.
याचिका में कहा गया है कि इतनी अधिक चुनाव फीस छोटे और मध्यम स्तर के अधिवक्ताओं को चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर देगी, जिससे चुनाव कुछ गिने-चुने प्रभावशाली लोगों तक सीमित रह जाएगा।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि बार काउंसिल का गठन अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित है, ऐसे में अत्यधिक फीस लगाना इन मूल उद्देश्यों के विपरीत है।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता प्रहलाद शर्मा की ओर से अधिवक्ता लखन शर्मा और अक्षय शर्मा ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने नियमों और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय लिया है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि नामांकन शुल्क बढ़ाने के साथ-साथ चुनाव समिति का गठन भी नियमों के विपरीत किया गया।
याचिका में मांग की गई है कि बीसीआई द्वारा जारी इस नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए और बीसीआर चुनाव प्रक्रिया को पूर्व की व्यवस्था के अनुसार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाए जाने के बाद यह मामला पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के पाले में चला गया है।
अब सभी की निगाहें 20 फरवरी 2026 को होने वाली सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं.