जयपुर। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जयपुर मध्यस्थता (Mediation) पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए सबसे उपयुक्त शहर है, क्योंकि इसकी मूल अवधारणा ही संतुलन, सामंजस्य और संवाद पर आधारित है।
कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए CJI ने कहा कि जयपुर के निर्माण का सिद्धांत था कि शहर का कोई भी भाग दूसरे पर हावी न हो। यही सिद्धांत मध्यस्थता का भी आधार है, जहां कोई भी पक्ष कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, उसकी आवाज़ दूसरे पक्ष पर हावी नहीं होनी चाहिए।
AI–तकनीक इंसानी संवेदना की जगह नहीं ले सकती
मुख्य न्यायाधीश ने ऑनलाइन मध्यस्थता (Online Mediation) के विस्तार का स्वागत करते हुए कहा कि तकनीक न्याय तक पहुंच आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म दूर-दराज़ के लोगों को भी मध्यस्थता प्रक्रिया से जोड़ रहे हैं।
हालांकि उन्होंने AI आधारित मध्यस्थता पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति आगाह करते हुए कहा कि कोई भी एल्गोरिद्म मानवीय भावनाओं, करुणा और संवेदनशीलता की बराबरी नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि “तकनीक इंसानी आवाज़ तो दे सकती है, लेकिन इंसानी सहानुभूति नहीं दे सकती।”
इसलिए न्याय व्यवस्था में तकनीक का उपयोग सहयोगी के रूप में होना चाहिए, प्रतिस्थापन के रूप में नहीं।

सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता (Mediation) केवल कानून की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, विश्वास और सहानुभूति पर आधारित न्याय का माध्यम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्याय प्रणाली की सहायता तो कर सकते हैं, लेकिन वे कभी भी मानवीय संवेदना और समझ का स्थान नहीं ले सकते।
उन्होने कहा कि मध्यस्थता कानूनी पेशे की सबसे कठिन और सबसे मूल्यवान क्षमताओं में से एक है।
एक सफल मध्यस्थ का कार्य केवल बातचीत कराना नहीं, बल्कि दो विरोधी पक्षों के बीच ऐसा समाधान तैयार करना है, जिसे दोनों पक्ष स्वेच्छा से स्वीकार कर सकें।
संघर्ष को सहमति में बदलना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि एक मध्यस्थ का उद्देश्य संघर्ष को सहमति में बदलना होता है और यह कोई साधारण कौशल नहीं, बल्कि विधि व्यवसाय की सबसे चुनौतीपूर्ण कला है।
सीजेआई ने कहा कि किसी विवाद में मध्यस्थ की भूमिका केवल समझौता कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह दोनों पक्षों की भावनाओं, हितों और परिस्थितियों को समझते हुए ऐसा रास्ता निकालता है, जो न्यायपूर्ण होने के साथ-साथ सभी के लिए स्वीकार्य भी हो।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता लोगों को अपना समाधान स्वयं खोजने का अवसर देती है, जबकि न्यायालय तब अंतिम निर्णय देता है जब विवाद का समाधान अन्य माध्यमों से संभव नहीं हो पाता।
‘न्यायालय और मध्यस्थता एक-दूसरे के पूरक’
अपने संबोधन में सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायालयों और मध्यस्थता के संबंध को अत्यंत प्रभावशाली शब्दों में समझाते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के पूरक स्तंभ हैं।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी नदी को बहने के लिए दोनों किनारों की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार न्याय प्रणाली को भी न्यायालयों और मध्यस्थता—दोनों की समान रूप से आवश्यकता है।
दुनिया की सबसे बड़ी आवश्यकता
उन्होंने कहा कि ‘पीस, मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ’ केवल सम्मेलन का विषय नहीं, बल्कि आज की दुनिया की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते विवादों के बीच संवाद, सहमति और मध्यस्थता ही स्थायी शांति और न्याय का सबसे प्रभावी मार्ग हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने राजस्थान हाईकोर्ट, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और निवारण की सराहना करते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने दुनिया भर के न्यायाधीशों, विधि विशेषज्ञों और मध्यस्थों को एक मंच पर लाकर वैश्विक न्यायिक सहयोग को नई दिशा देने का कार्य किया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन के निष्कर्ष कॉमनवेल्थ देशों में शांति, मध्यस्थता और विधि के शासन को और अधिक मजबूत करेंगे.
युवा वकीलों से मध्यस्थता कौशल अपनाने का आह्वान
सीजेआई सूर्यकांत ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत में मध्यस्थता की संस्कृति लगातार मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि विधायी सुधार, न्यायपालिका का समर्थन तथा बार और बेंच की प्रतिबद्धता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे मध्यस्थता को अपने पेशेवर जीवन का अनिवार्य कौशल बनाएं। उनका कहना था कि भविष्य की न्याय व्यवस्था केवल मुकदमों के निर्णय पर नहीं, बल्कि सहमति आधारित विवाद समाधान की संस्कृति पर भी आधारित होगी।
उन्होंने कहा कि यदि भारत को अधिक मानवीय, सुलभ और प्रभावी न्याय प्रणाली विकसित करनी है, तो मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था के केंद्र में स्थान देना होगा।
भारत बन रहा डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन हब-केन्द्रीय कानून मंत्री
कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि मध्यस्थता (Mediation) आज केवल मुकदमों का विकल्प नहीं, बल्कि न्याय, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता की आधारशिला बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी प्राचीन ‘पंच परमेश्वर’ परंपरा से लेकर आधुनिक कानूनी सुधारों तक संवाद आधारित न्याय व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहा है।

भारत उभर रहा हैं…
मेघवाल ने कहा कि मेडिएशन अधिनियम, 2023, इंडिया इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर, कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट और ई-कोर्ट्स फेज-III जैसी पहलें भारत को तकनीक-सक्षम और निवेश-अनुकूल न्याय प्रणाली की ओर ले जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में Singapore International Arbitration Centre (SIAC) का कार्यालय खुलना इस बात का संकेत है कि भारत तेजी से वैश्विक डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन हब के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि Artificial Intelligence (AI), Blockchain, FinTech, IoT और डिजिटल अर्थव्यवस्था के दौर में प्रभावी विवाद समाधान पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।
सहयोग का आहवान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले तीन वर्षों में 1.5 लाख से अधिक मामलों का समाधान मध्यस्थता और सुलह के माध्यम से किया है।
उन्होंने कॉमनवेल्थ देशों से मध्यस्थता, सीमा-पार विवाद समाधान और न्यायिक सहयोग को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत ‘विवाद नहीं, संवाद’ और ‘मुकदमेबाजी नहीं, समाधान’ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
समाधान समारोह’ से घटेगा मुकदमों का बोझ, मध्यस्थता से जुड़े रिश्ते भी-जस्टिस संदीप मेहता
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में चल रहा ‘समाधान समारोह’ अभियान न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक पहल है, जिसका उद्देश्य प्री-सेटलमेंट मेडिएशन के जरिए लंबित मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान करना है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत 35 हजार से अधिक मामलों की पहचान की गई है और विभिन्न हाईकोर्ट इसमें उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट की सराहना
कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जस्टिस मेहता ने विशेष रूप से राजस्थान हाईकोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित करीब 50 पुराने मामलों का मध्यस्थता के माध्यम से समाधान एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता (Mediation) वैकल्पिक विवाद निस्तारण (ADR) की सबसे प्रभावी प्रक्रिया है, क्योंकि इससे केवल कानूनी विवाद ही समाप्त नहीं होते, बल्कि रिश्तों में आई दूरियां भी कम होती हैं।
एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एक पारिवारिक विवाद में केवल माता-पिता के चरण स्पर्श करने की सलाह ने वर्षों पुराने विवाद का अंत करा दिया।
जस्टिस मेहता ने कहा कि सरकार से जुड़े मामलों में भी मध्यस्थता को बढ़ावा दिया जा रहा है और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा और न्याय अधिक प्रभावी व मानवीय बनेगा।
जयपुर घोषणा दुनिया को देगी नई दिशा-CM भजनलाल शर्मा
कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आज की दुनिया में सबसे बड़ी आवश्यकता शांति और मध्यस्थता (Peace & Mediation) की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्याय का उद्देश्य किसी की हार-जीत नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी समाधान है जिसे सभी पक्ष स्वीकार करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते मुकदमों के बीच मध्यस्थता ही न्याय व्यवस्था का भविष्य है। भारतीय परंपरा के ‘पंच परमेश्वर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संवाद और आपसी विश्वास से विवादों का समाधान भारत की सदियों पुरानी संस्कृति रही है।
उन्होंने कहा कि पीस मेडिएशन केवल मुकदमों का निपटारा नहीं करती, बल्कि पक्षकारों के बीच वर्षों से चले आ रहे अविश्वास और कटुता को भी समाप्त कर स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय न्याय परंपरा में ‘पंच परमेश्वर’ और न्याय पंचायतें इसी सोच का उदाहरण रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र अधिनियम, 2019 और मध्यस्थता अधिनियम, 2023 जैसे कानूनों ने देश में संस्थागत मध्यस्थता को नई मजबूती दी है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में अब तक 5.84 लाख से अधिक लोगों को विधिक सहायता, 4 हजार पीड़ितों को 84 करोड़ रुपये से अधिक का प्रतिकर, 1.20 लाख से अधिक विधिक साक्षरता शिविरों के माध्यम से 77 लाख लोगों को जागरूक किया गया है।
वहीं 21 हजार से अधिक मामलों का मध्यस्थता से समाधान तथा ‘मेडिएशन फॉर द नेशन’ अभियान के तहत करीब 22 हजार मामलों का सफल निस्तारण किया गया।
