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साइबर सुरक्षा पर जयपुर में सेमिनार – सीजेआई करेंगे शिरकत , हाईकोर्ट को 4 माह में 8 बार बम धमकी, एजेंसियां अब तक सोर्स तलाशने में नाकाम

SCBA, SCAORA Condemn Public Calls for CJI Surya Kant’s Resignation, Cite Judicial Dignity

जयपुर। राजस्थान की न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बने लगातार मिल रहे बम धमकी के ई-मेल और कॉल्स के बीच जयपुर में साइबर सुरक्षा पर बड़ा राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सहित सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ न्यायाधीश इस सप्ताह राजस्थान दौरे पर रहेंगे और 20 से 22 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन के सत्र में शिरकत करेंगे।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का विषय “Cyber Safety: Awareness, Protection and Inclusive Access to Justice” रखा गया है।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य न्यायिक संस्थानों, सरकारी विभागों और आम नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना है।

हाईकोर्ट को 4 माह में 8 बार बम धमकी

इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब साइबर सुरक्षा पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है, तब राजस्थान हाईकोर्ट को पिछले 4 माह में लगातार बम धमकियां मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ को 4 माह में कुल 8 बार बम धमकी मिलने के कारण अदालत की कार्यवाही रोकनी पड़ी, जबकि जोधपुर मुख्यपीठ में भी तीन बार धमकी के चलते सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

हर बार सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन अब तक किसी भी धमकी का वास्तविक स्रोत सामने नहीं आ पाया है।

यह स्थिति न्यायिक कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि बार-बार अदालत की कार्यवाही रोकना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है और जांच एजेंसियों की धीमी प्रगति कई सवाल खड़े कर रही है।

21 फरवरी को हाईकोर्ट में अवकाश घोषित

साइबर सुरक्षा सम्मेलन के आयोजन को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने 21 फरवरी 2026 (शनिवार) को जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ दोनों में अवकाश घोषित किया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार (प्रशासन) द्वारा 13 फरवरी को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।

हालांकि न्यायिक हलकों में इसे केवल सम्मेलन से जुड़ा निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बार-बेंच के बीच चल रहे गतिरोध और प्रस्तावित न्यायिक कार्य बहिष्कार से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या धमकियों के पीछे कोई बड़ी साजिश?

लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद अब तक किसी आरोपी का पता नहीं चल पाने से कई तरह की आशंकाएं सामने आ रही हैं।

अधिवक्ताओं के बीच चर्चा है कि कहीं यह किसी विशेष मामले की सुनवाई को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं, या फिर न्यायिक व्यवस्था को अस्थिर करने की सुनियोजित साजिश तो नहीं है।

हालांकि सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं पर जांच करने का दावा कर रही हैं, लेकिन ठोस परिणाम सामने न आने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बार-बेंच के बीच बढ़ता टकराव

हाईकोर्ट में शनिवार को कार्यदिवस बनाए जाने के मुद्दे पर तीनों बार एसोसिएशन लगातार विरोध कर रही हैं।अधिवक्ताओं ने कई बार न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया है और आगामी 21 फरवरी को भी बहिष्कार का ऐलान कर रखा है।

लंबे समय बाद जयपुर और जोधपुर दोनों बार एसोसिएशनों का किसी मुद्दे पर संयुक्त विरोध सामने आया है, जिससे बार और बेंच के बीच तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

न्यायपालिका में लगातार घटनाक्रम से बढ़ी चिंता

पिछले कुछ महीनों में राजस्थान हाईकोर्ट में कई प्रशासनिक और न्यायिक घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनमें लंबे समय तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति और रोस्टर से जुड़े मुद्दों पर चर्चाएं शामिल हैं।

इन घटनाओं ने न्यायिक व्यवस्था के भीतर चल रही उठापटक को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है।

साइबर सुरक्षा सम्मेलन पर सबकी नजर

ऐसे संवेदनशील माहौल में आयोजित होने जा रहा साइबर सुरक्षा सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि न्यायिक संस्थानों की डिजिटल सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार मिल रही धमकियों और बढ़ते साइबर अपराधों के बीच यह सम्मेलन भविष्य की सुरक्षा रणनीति तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब देश के मुख्य न्यायाधीश साइबर सुरक्षा पर चर्चा करने जयपुर आ रहे हैं, तब क्या जांच एजेंसियां हाईकोर्ट को मिल रही धमकियों के पीछे छिपे असली चेहरे तक पहुंच पाएंगी, या फिर अदालतों की कार्यवाही बार-बार इसी तरह बाधित होती रहेगी।

राजस्थान में जिस शनिवार कार्यदिवस के मुद्दे पर बार और बेंच के बीच गतिरोध बढता जा रहा हैं क्या सीजेआई इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे.

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