जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में साइबर फ्रॉड का एक ऐसा मामला आया है, जिसमें बिना किसी कारण के व्यवसायियों के खाते को किस तरह से सीज किया जाता है, इसका खुलासा हुआ है।
ज्वैलरी शॉप से एक ग्राहक ने ज्वैलरी खरीदने के बाद भुगतान किया और उसके तुरंत बाद ही ज्वैलरी शॉप के खिलाफ साइबर फ्रॉड की शिकायत भी कर दी।
इस शिकायत के आधार पर संबंधित बैंक ने ज्वेलर्स के खाते में उक्त राशि को होल्ड कर दिया।
अब इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने ज्वैलर्स के बैंक खाते में होल्ड पर रखी गई ₹2.74 लाख की राशि के ट्रांसफर पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार, संबंधित बैंक सहित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार 11 मार्च 2026 को एक व्यक्ति, सुनील, ने M/s DLG Jewellers से ₹2,74,618 की ज्वैलरी खरीदी।
यह फर्म याचिकाकर्ता प्रतिभा गुप्ता की स्वामित्व वाली फर्म है। भुगतान सुनील द्वारा अपने बैंक खाते से किया गया था।
हालांकि, इस लेन-देन के तुरंत बाद खरीदार सुनील ने उसी राशि के फ्रॉड का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिसे शिकायत संख्या 1930 के रूप में पंजीकृत किया गया।
इस शिकायत के आधार पर संबंधित बैंक ने ज्वेलर्स के खाते में उक्त राशि को होल्ड कर दिया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बैंक द्वारा यह कार्रवाई बिना याचिकाकर्ता को कोई पूर्व सूचना दिए की गई।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदर्श सिंघल ने अदालत में दलील दी कि पूरा लेन-देन वैध तरीके से हुआ था और ग्राहक द्वारा स्वयं भुगतान किया गया था।
बैंक द्वारा खाते में रकम होल्ड करने की कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
यदि किसी प्रकार का विवाद था, तो पहले जांच की जानी चाहिए थी, न कि सीधे खाते को प्रभावित किया जाए।
इस प्रकार की कार्रवाई से व्यापारी की प्रतिष्ठा और व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ता है।
इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने स्वयं भी साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह भी इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहती हैं।
राज्य सरकार का जवाब
मामले में राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता ने जवाब पेश कर यह स्वीकार किया कि शिकायत के आधार पर ही बैंक ने रकम को होल्ड किया।
मामले में हाईकोर्ट ने सरकार सहित बैंक और पक्षकार को नोटिस जारी करते हुए बैंक द्वारा होल्ड की गयी राशि के ट्रांफसर करने पर रोक लगा दी हैं.
मामले में हाईकेार्ट अब विस्तृत सुनवाई करेगा.