आरसीए के कन्वीनर डीडी कुमावत की नियुक्ति पर अंतरिम रोक
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) की कार्यकारिणी समिति के कन्वीनर डीडी कुमावत उर्फ दीनदयाल कुमावत की नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक उन्हें कन्वीनर के रूप में कार्य करने से प्रतिबंधित कर दिया है। यह महत्वपूर्ण आदेश जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने देवी सिंह द्वारा दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद पारित किया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य सिंह राठौड़ ने दलील दी कि आरसीए के उपविधानों के अनुच्छेद 26 के अनुसार, जिस पदाधिकारी के खिलाफ आपराधिक अदालत द्वारा आरोप तय हो चुके हों, वह कार्यकारिणी समिति का सदस्य बनने के लिए अयोग्य होता है।
उन्होंने अदालत को बताया कि डीडी कुमावत के खिलाफ 18 सितंबर 2025 को आपराधिक आरोप तय हो चुके हैं, इसके बावजूद उनकी नियुक्ति की गई।
महावीर सिंह सरवाड़ी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में 85 वर्षीय महावीर सिंह सरवाड़ी को बड़ी राहत दी है।
जस्टिस बलजिंदर सिंह संधु की एकलपीठ ने उनके खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में लगाए गए आरोपों पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि आरोप तय करने के लिए आवश्यक ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।
मामला एक कथित भड़काऊ भाषण से जुड़ा है, जिसके आधार पर भीड़ के हिंसक होने और दंगे की स्थिति पैदा होने का आरोप लगाया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हेमंत नाहटा और संजय बिश्नोई ने दलील दी कि न तो किसी भाषण का ट्रांसक्रिप्ट मौजूद है और न ही जांच एजेंसी द्वारा पेश दस्तावेजों में उनका नाम दर्ज है। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में आरोप तय कर दिए थे।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी महत्वपूर्ण माना कि याचिकाकर्ता के खिलाफ न तो धारा 153 (दंगा भड़काने) का आरोप लगाया गया और न ही आपराधिक साजिश का कोई मामला बनाया गया। ऐसे में केवल धारा 109 के सहारे अन्य गंभीर आरोप टिक नहीं सकते।
अदालत ने आदेश दिया कि 8 अगस्त 2025 को पारित आरोप तय करने के आदेश और 9 अक्टूबर 2025 के चार्ज फ्रेमिंग आदेश के प्रभाव पर अंतिम सुनवाई तक रोक रहेगी। मामले की अंतिम सुनवाई आठ सप्ताह बाद तय की गई है
राजस्थान के सभी जिलों में केंद्र सरकार के वकीलों की नई सूची जारी, 78 स्टैंडिंग और एडिशनल काउंसल नियुक्त
नियुक दिल्ली/जयपुर। केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने राजस्थान के जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करने वाले स्टैंडिंग गवर्नमेंट काउंसल (SGC) और एडिशनल स्टैंडिंग गवर्नमेंट काउंसल (ASGC) की नई जिलावार सूची जारी कर दी है।
यह आदेश मंत्रालय के न्यायिक अनुभाग द्वारा जारी किया गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इस आदेश के माध्यम से राज्य के लगभग सभी जिलों में केंद्र सरकार के मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को अधिकृत किया गया है।
जिलावार अधिवक्ताओं की सूची
जारी सूची में अजमेर, अलवर, बाड़मेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू, दौसा, डीडवाना–कुचामन, डीग, धौलपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनूं, जोधपुर, करौली, खैरथल–तिजारा, कोटपूतली–बहरोड़, नागौर, पाली, फलोदी, सांचोर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, श्रीगंगानगर और उदयपुर सहित सभी प्रमुख जिलों को शामिल किया गया है।
वकील–पुलिस विवाद पर राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती रंग लाई, PIL निस्तारित
जोधपुर। वकील समुदाय और पुलिस के बीच 2 दिसंबर 2025 को हुए टकराव के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती असरदार साबित हुई है। राज्य सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने सरकार द्वारा पेश की गई प्रगति रिपोर्ट को पर्याप्त मानते हुए कहा कि अब किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है।
यह जनहित याचिका राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी, जिसमें घटना के बाद उत्पन्न तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई गई थी। सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है और भविष्य में ऐसे विवाद रोकने के लिए जिला स्तर पर समन्वय समितियां गठित की जा रही हैं।
धालोप मेला विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, दोनो पक्षों को शांति बनाए रखने का आदेश
जोधपुर। 38वें राज्य स्तरीय धालोप मेला को लेकर उपजे विवाद पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह खंडपीठ ने दो टूक कहा कि यह मेला पिछले 37 वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित होता आ रहा है और क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
यह मामला श्री रघुनाथ पीर धूणी एवं मेघवाल समाज महासभा विकास न्यास द्वारा दायर विशेष अपील से जुड़ा है, जिसमें मेला आयोजन का अधिकार न्यास के अधीन होने का दावा किया गया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मेला उसी संयुक्त व्यवस्था के तहत आयोजित हो, जैसा पिछले वर्ष किया गया था, और यदि अतिरिक्त व्यवस्थाओं की आवश्यकता हो तो उन्हें भी पूरा किया जाए। इसके अलावा, मेले से संबंधित किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन का विस्तृत लेखा-जोखा दोनों पक्षों द्वारा रखा जाएगा।
हाईकोर्ट ने मेला संपन्न होने के बाद दान-पेटी को उपखंड अधिकारी, देसूरी के नियंत्रण में रखने का आदेश दिया हैं.
साथ ही दोनों पक्षों को मेले के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने चार सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई तय की है।
ऐसे रुकेगा भ्रष्टाचार? एसीबी की धीमी जांच पर डीआईजी को हाईकोर्ट की फटकार
जोधपुर। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग में करोड़ों रुपये के कथित घोटालों की जांच में देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने एसीबी को कड़ी फटकार लगाई है। एसीबी के उपमहानिरीक्षक आनंद शर्मा अदालत में उपस्थित हुए और जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इस पर याचिकाकर्ता डॉ. टी.एन. शर्मा की ओर से अधिवक्ता पूनम चंद भण्डारी ने बताया कि न्यायालय ने 06.09.2024 को टेंडरों की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद परिवादी ने 27 मामलों के दस्तावेज एसीबी व अदालत में पेश किए, लेकिन किसी में भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत को यह भी बताया गया कि केवल एक मामले में 27.10.2025 को एफआईआर दर्ज हुई, पर चार माह बीतने के बावजूद शिकायतकर्ता के बयान तक दर्ज नहीं किए गए।
इस पर जस्टिस अशोक कुमार जैन ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि जब एक प्रतिशत भ्रष्टाचार पर भी अंकुश नहीं लग पा रहा, तो यह गंभीर विषय है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी शिकायतों पर तत्काल प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट दर्ज की जाए। डीआईजी आनंद शर्मा को दो सप्ताह में जांच पूरी कर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 23.02.2026 तय की गई है।
NEET PG में चयनित सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल रिलीव करने का आदेश
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने NEET PG के माध्यम से चयनित सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को उन्हें तत्काल रिलीव करने के आदेश दिए हैं.
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने डॉ. विवेक लबाना सहित कई याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता डॉक्टर वर्तमान में राज्य सरकार के अधीन मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे और NEET PG के जरिए सीनियर रेजिडेंट के रूप में चयन के बाद 3 फरवरी 2026 तक जॉइनिंग अनिवार्य थी। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय पर रिलीव नहीं किए जाने के कारण वे जॉइन नहीं कर पा रहे थे।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि सभी याचिकाकर्ताओं को 4 फरवरी 2026 तक रिलीव कर दिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने उनकी जॉइनिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 7 फरवरी 2026 कर दी और सभी याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
इस फैसले से कई युवा डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है।
अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट की सख्ती, नगर परिषद सीकर को तय समय में कार्रवाई के आदेश
जयपुर। अवैध और अनधिकृत निर्माण के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर परिषद सीकर के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। विनोद कुमार जांगिड़ व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कानून के आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जस्टिस सुधेश बंसल और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने कोर्ट में पेश हुए नगर परिषद सीकर के कार्यवाहक आयुक्त प्रमोद कुमार को फटकार लगाते हुए आदेश की पालना करने को कहा.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अविश मोर्य और एचसी मोर्य ने अदालत को बताया कि नगर परिषद ने स्वयं सेटबैक क्षेत्र में अवैध निर्माण होना स्वीकार किया है और 22 जुलाई 2021 को राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 194 के तहत नोटिस जारी किया गया था।
हाईकोर्ट ने आयुक्त को 4 फरवरी 2026 तक स्थल निरीक्षण रिपोर्ट व साइट प्लान प्रस्तुत करने, दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने तथा अवैध निर्माण हटाने की ठोस कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की निगरानी के लिए आदेश की प्रति स्थानीय स्वशासन विभाग के निदेशक को भी भेजी गई है।
₹82.78 लाख की डिक्री की वसूली नहीं होने पर रियाजुद्दीन कागजी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, जयपुर पुलिस कमिश्नर को पत्र
जयपुर। जयपुर की कॉमर्शियल कोर्ट संख्या 3 की अदालत ने डिक्री राशि की वसूली में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए जयपुर महत्वपूर्ण आदेश पारित दिया हैं.
आकाश एसोसिएट्स बनाम मैसर्स सांग ऑटोमोबाइल्स मामले में दायर इरायज याचिका पर सांगानेर के प्रसिद्ध व्यापारी रियाजुद्दीन कागजी के खिलाफ गिरफतारी वारंट जारी किया हैं.
अदालत ने स्पष्ट किया कि 30 जनवरी 2023 को पारित डिक्री के तहत डिक्रीधारक के पक्ष में कुल ₹82,78,183 की राशि देय है, जिसमें ₹68,32,383 मूलधन, ₹14,34,800 ब्याज एवं ₹11,000 निष्पादन खर्च शामिल है। इसके बावजूद मद्देनजर रियाजुद्दीन कागजी द्वारा राशि का भुगतान नहीं किया गया।
अदालत ने आदेश दिया कि यदि उक्त राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित मद्देनजर को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। इससे पहले न्यायालय द्वारा 2 दिसंबर 2025 और 15 दिसंबर 2025 को भी पत्र भेजे गए थे, जिनका पालन नहीं हुआ।
अदालत ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में गिरफतारी वारंट की तामिल नही होने पर चिंता जताई हैं. न्यायालय ने इसे आदेश की जानबूझकर अवहेलना मानते हुए अगली पेशी से पूर्व गिरफ्तारी वारंट की तामील सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में डिक्रीधारक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीसी जैन ने पैरवी की।
स्कूल व्याख्याता का नियम विरुद्ध तबादला, सिविल सेवा अपील अधिकरण ने लगाई रोक
जयपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए गए नियमों के कथित उल्लंघन पर राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। रा. उच्च माध्यमिक विद्यालय, नोहर (हनुमानगढ़) में कार्यरत स्कूल व्याख्याता ग्रेड-प्रथम प्रताप सिंह के तबादला आदेश पर अधिकरण ने अंतरिम रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायिक सदस्य पूनम दरगन एवं सदस्य प्रकाशचन्द्र शर्मा की पीठ ने दिया है।.
प्रताप सिंह की ओर से अधिवक्ता श्रेयांश धारीवाल ने अधिकरण में अपील दायर कर बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने 10 जनवरी को आदेश जारी कर उनका तबादला डूंगरपुर जिले में कर दिया, जो मिड-सेशन में बिना किसी प्रशासनिक आवश्यकता के किया गया है।
अपील में कहा गया कि यह तबादला नीति की अवहेलना करते हुए अन्य कार्मिकों को समायोजित करने तथा राजनीतिक दुर्भावना से किया गया है। अधिकरण ने प्रथम दृष्टया तर्कों को गंभीर मानते हुए तबादला आदेश पर रोक लगाई और मामले में आगे की सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।