नई दिल्ली,
दिल्ली देश की राजधानी हैं, यहां से पूरे देश को न्याय और प्रशासन को दिशा मिलती है। लेकिन हैरानी की बात है कि आज भी दिल्ली हाईकोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा नहीं हैं.
जब पूरा देश डिजिटलाइजेशन की दौड़ में पूरी दुनिया से कोसों आगे है, उस दौर में भी दिल्ली हाईकोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा नहीं दे पा रहा हैं. यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि उन्हें अपनी कार्यवाही की अब लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करनी चाहिए.
जस्टिस विक्रम नाथ ने दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह करते हुए कहा कि न्याय सभी के लिए समान रूप से सुलभ होना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट जैसे अहम संस्थान को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए.
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा “न्याय पर किसी खास वर्ग का अधिकार नहीं है। यह सबके लिए हैं। चाहे हाईकोर्ट का केस हो या नगरपालिका का, सबको आसान पहुंच मिलनी चाहिए।”
जस्टिस विक्रमनाथ दिल्ली हाईकोर्ट में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट में कई डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया गया.
समारोह में दिल्ली हाईकोर्ट के मोबाइल ऐप, न्यायिक अधिकारियों के लिए ई-एचआरएमएस पोर्टल, ई-ऑफिस पायलट प्रोजेक्ट और एमसीडी अपीलीय न्यायाधिकरण व किशोर न्याय बोर्ड (JJB) को ई-कोर्ट से जोड़ने जैसी परियोजनाएं का उद्घाटन किया गया.
इस उद्घाटन समारोह के दौरान ही जस्टिस नाथ ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम हैं.
टेक्नोलॉजी से बदलाव
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि पारदर्शिता विश्वास का निर्माण करती है। विश्वास ही वो आधार है, जिस पर न्याय टिका हैं। इसके बिना कानून दूर रहता हैं.
न्यायपालिका द्वारा डिजिटलीकरण की दिशा में उठाया गया हर नया कदम, अधिक पारदर्शिता की दिशा में भी एक कदम है, जहां जानकारी केवल फाइलों और अदालतों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि नागरिकों के हाथों में पहुंचती है.
जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि दशकों से पक्षकार और अधिवक्ता न्याय में होने वाली देरी, चक्कर और अपने मामलों की स्थिति न जानने जैसी समस्याओं से जूझते रहे हैं. लेकिन अब डिजिटल डैशबोर्ड और रीयल-टाइम अपडेट से यह जानकारी उनकी उंगलियों पर होगी.
जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक तेज, सरल और सुलभ बनेगी। उन्होंने बताया कि अब रीयल-टाइम अपडेट और डिजिटल डैशबोर्ड से लोगों को तुरंत जानकारी मिल सकती है। इससे इंतजार कम होगा और ध्यान केवल विवाद के हल पर रहेगा.
जस्टिस नाथ ने कहा कि पारदर्शिता विश्वास पैदा करती है और विश्वास ही न्याय की नींव हैं। तकनीक जजों का विकल्प नहीं है, लेकिन यह उनकी क्षमता को बढ़ाकर न्याय को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक न्यायपालिका को नागरिकों के और करीब लाती है और इसका अंतिम उद्देश्य लोगों की सेवा करना हैं।
क्यों जरूरी है लाइव स्ट्रीमिंग?
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि जब बैंकिंग, ट्रांजैक्शन, और यहां तक कि पंचायत की बैठकों तक ऑनलाइन हो सकती हैं, तो आखिर न्यायपालिका की कार्यवाही क्यों नहीं? जरा सोचिए, अगर आप अपने केस की सुनवाई अपने घर बैठे देख पाएं तो? लाइव स्ट्रीमिंग से आम आदमी अपने केस की जानकारी बिना वकील पर निर्भर हुए पा सकेगा.
लोग खुद देख सकेंगे कि कोर्ट में क्या हो रहा है। इससे भरोसा बढ़ेगा और न्याय प्रणाली लोगों के और करीब आएगी.
दिल्ली में हर साल लाखों केस दाखिल होते हैं। सुनवाई में देरी, तारीख पर तारीख और केस की जानकारी न मिलना सबसे बड़ी समस्या है। अगर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हो जाती है, तो लोग अपने घर बैठे सुनवाई देख सकेंगे। कोर्ट और केस दोनों की पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों में न्याय को लेकर भरोसा भी मजबूत होगा।