जयपुर, 25 अक्टूबर।
लगातार विवादों में रहने वाले गोकुल वाटिका योजना के भूखंड संख्या A-30 का मामला अब Rajasthan Highcourt की खंडपीठ में पहुंच गया है।
Rajasthan Highcourt की खंडपीठ ने गोकुल वाटिका योजना के भूखंड संख्या A-30 से जुड़े मामले में बड़ा आदेश जारी करते हुए यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
Acting Chief Justice Sanjeev Prakash Sharma और Justice Sanjeet Purohit की खंडपीठ ने साथ ही विवादित भूखंड पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगाने का भी आदेश दिया है।
Rajasthan Highcourt की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि विवादित भूखंड की संपूर्ण जांच होने तक कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा।
कब्जे में चल रहे भूखंड पर जारी लीज
याचिकाकर्ता संचित ताम्रा की ओर से अधिवक्ता सुनिल समदड़िया और अरिहंत समदड़िया ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि गोकुल वाटिका योजना के तहत भूखंड संख्या A-30, जो कि ताम्र गार्डन के समीप स्थित है, पहले से ही संदीप ताम्रा के कब्जे में है।
अधिवक्ता ने कहा कि संचित ताम्रा के कब्जे वाली भूमि को गलती से दीपक सिंघल के पक्ष में जारी लीज डीड में शामिल कर दिया गया। इस त्रुटि को लेकर संदीप ताम्रा ने JDA अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दायर की थी।
लीज डीड की सटीकता पर प्रश्न
विवादित भूमि पर जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा जारी लीज डीड में त्रुटि पाई गई थी। अपीलीय न्यायाधिकरण ने सुनवाई के बाद आदेश दिया था कि दोनों पक्षों की भूमि का सुपरइम्पोजिशन (Superimposition) द्वारा मिलान किया जाए, और यदि वास्तव में संचित ताम्रा की भूमि लीज डीड में सम्मिलित पाई जाती है, तो उसकी लीज डीड में आवश्यक संशोधन (Rectification) किया जाए।
इसके साथ ही JDA ट्रिब्यूनल ने तब तक के लिए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे।
अधिवक्ता ने कहा कि इस आदेश को दीपक सिंघल की ओर से Rajasthan Highcourt की एकलपीठ में चुनौती दी गई थी, जिस पर एकलपीठ ने JDA ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगा दी थी। इससे अप्रत्यक्ष रूप से दीपक सिंघल को विवादित भूमि पर निर्माण की अनुमति मिल गई थी।
अधिवक्ता ने Rajasthan Highcourt से अनुरोध किया कि इस मामले में संपूर्ण स्थिति का स्पष्टिकरण होने तक यथास्थिति को बनाए रखा जाए, क्योंकि इसमें JDA जैसी संस्था की लीज डीड की सटीकता और विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़ा हुआ है।
कोर्ट का आदेश
याचिकाकर्ता की ओर से बहस सुनने के बादRajasthan Highcourt की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है।
खंडपीठ ने अब विवादित भूखंड पर पुनः यथास्थिति बनाए रखने और निर्माण कार्य पर पूर्ण रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
Rajasthan Highcourt ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक भूमि का वास्तविक मिलान और रिकॉर्ड की जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा।