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जयपुर के 679 गांवों में निर्माण पर राजस्थान हाईकोर्ट की रोक, JDA क्षेत्र बढ़ाने पर हाईकोर्ट से राज्य सरकार और JDA को नोटिस जारी

Rajasthan High Court Stays Construction in 679 Jaipur Villages, Seeks Justification for JDA Expansion

जयपुर, 18 मार्च। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के दायरे में शामिल किए गए नए 679 गांवों में निर्माण गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस बलजिंदर संधू की खंडपीठ ने संजय जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

कोर्ट ने राज्य सरकार और JDA से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि आखिर किन आधारों पर इतने बड़े स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों को जेडीए में शामिल किया गया।

मामला जयपुर के शहरी विस्तार और उससे जुड़े पर्यावरणीय व प्रशासनिक प्रभावों को लेकर काफी अहम माना जा रहा है।

कैसे किया शहर का दायरा दोगुना

सरकार द्वारा 1 अक्टूबर 2025 को जारी अधिसूचना के जरिए जयपुर शहर के दायरे को लगभग दोगुना कर दिया गया।

इससे शहर का क्षेत्रफल करीब 3 हजार वर्ग किलोमीटर से बढ़कर लगभग 6 हजार वर्ग किलोमीटर हो गया।

सरकार का तर्क है कि इससे शहर का योजनाबद्ध विकास बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

हालांकि, कोर्ट ने इस फैसले के औचित्य पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई बिना उचित आधार और प्रक्रिया के नहीं की जा सकती।

बिना मास्टर प्लान के विस्तार

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 679 गांवों को जेडीए क्षेत्र में शामिल करने का फैसला बिना किसी वैध मास्टर प्लान, जोनल डेवलपमेंट प्लान और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के लिया गया।

मौजूदा मास्टर प्लान 2025 में इन गांवों को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि नया मास्टर प्लान 2047 अभी तैयार भी नहीं हुआ है। ऐसे में सीधे गांवों को जोड़ना कानून और प्रक्रिया की अनदेखी है।

पंचायतो की कोई सलाह नहीं

याचिका में यह भी कहा गया कि यह पूरा विस्तार एक आंतरिक समिति की रिपोर्ट पर आधारित है। शुरुआत में केवल 272 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 679 गांव कर दिया गया।

इस प्रक्रिया में न तो ग्राम पंचायतों से कोई सलाह ली गई और न ही किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ या पर्यावरणीय अध्ययन को आधार बनाया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ेगा बड़ा असर

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस फैसले से लाखों ग्रामीण सीधे शहरी नियमों के दायरे में आ जाएंगे, जिससे उनकी पारंपरिक व्यवस्था और अधिकार प्रभावित होंगे।

इसके अलावा गोचर भूमि, चरागाह और अन्य सामुदायिक संसाधनों के खत्म होने का खतरा भी बढ़ जाएगा। साथ ही, अनियंत्रित रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई गई है।

कोर्ट ने मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और JDA को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब देने को कहा है। साथ ही, अगली सुनवाई तक संबंधित गांवों में किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर रोक लगा दी गई है।

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