जयपुर, 18 सितंबर
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि सेवानिवृत्त कर्मचारी को समय पर उसकी सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ नहीं दिए जाते हैं, तो विभाग को उस पर निर्धारित दर से ब्याज चुकाना होगा.
जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल की एकलपीठ ने यह आदेश आदेश सेवानिवृति कर्मचारी लक्ष्मीनारायण माथुर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.
याचिकाकर्ता जयपुर डेयरी के तहत करौली दुग्ध उत्पादक संघ में कर्मचारी के तौर पर 30 मई 2020 को सेवानिवृत्ति ली थी.
उन्हें समय पर ग्रेच्युटी और अवकाश राशि नहीं दी गई.
जिसे लेकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका लंबित रहने के दौरान विभाग ने राशि का भुगतान तो कर दिया, लेकिन भुगतान में हुई देरी को लेकर कर्मचारी ने ब्याज की मांग की.
हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972की धारा 7(3A) का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियोक्ता 30 दिन के भीतर ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं करता है तो उसे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दर से ब्याज देना होगा.
केन्द्र सरकार की अधिसूचना 1 अक्टूबर 1987 के अनुसार नियोक्ता को 10% वार्षिक ब्याज देना होगा.
इसके साथ ही अदालत ने कहा कि Privilege Leave Encashment में देरी होने पर भी 5 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करना होगा.
इस मामले में हुई देरी के चलते हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाग 12 सप्ताह की अवधि में यह ब्याज याचिकाकर्ता को नहीं चुकाता है तो ग्रेच्युटी पर ब्याज दर 12% और अवकाश नकदीकरण पर 9% वार्षिक हो जाएगी.
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त ब्याज का भार जिम्मेदार अधिकारियों पर डाले जाने के आदेश दिए हैं.