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प्रोबेशन में होने के बावजूद डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी जॉइन करने से नहीं रोका जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Doctors on Probation Cannot Be Denied Senior Residency: Rajasthan High Court

स्वास्थ्य विभाग को आदेश- चयनित डॉक्टरों को तुरंत रिलीव करें; सीनियर रेजिडेंसी के लिए असाधारण अवकाश देने का आदेश, 12 मार्च तक जॉइन कराने के निर्देश

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने मेडिकल अधिकारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई डॉक्टर सरकारी सेवा में प्रोबेशन अवधि के दौरान भी सीनियर रेजिडेंसी के लिए चयनित हो जाता है, तो उसे जॉइन करने से रोका नहीं जा सकता।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को आदेश दिया है कि चयनित डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से उनके-अपने मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंसी जॉइन करने के लिए रिलीव किया जाए।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश डॉ. विवेक लबाना, डॉ. अदिति जैमन, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. हनुमान प्रसाद लांबा, डॉ. केशव चतुर्वेदी, डॉ. प्रदीप पायल, डॉ. नरेंद्र कुमार और डॉ. अर्चना मीणा सहित कई अन्य डॉक्टरों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है।

सभी याचिकाओं में समान तथ्य और विवाद होने के कारण अदालत ने इन्हें एक साथ सुनकर साझा आदेश पारित किया।

ये है मामला

याचिकाकर्ता डॉक्टरों ने एम.डी./एम.एस. की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल ऑफिसर (M.O.) के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। नियुक्ति के साथ ही वर्तमान में ये सभी प्रोबेशन अवधि में थे।

इसी दौरान इन डॉक्टरों ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंसी के लिए आवेदन किया और NEET-PG मेरिट के आधार पर उनका चयन भी हो गया।

उन्हें विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट के पद पर नियुक्ति के आदेश भी जारी कर दिए गए थे।

लेकिन समस्या तब उत्पन्न हुई जब स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें मेडिकल ऑफिसर पद से रिलीव करने से इनकार कर दिया।

विभाग का तर्क था कि प्रोबेशन अवधि के दौरान डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी के लिए अवकाश नहीं दिया जा सकता और इसलिए वे अपने पद से हटकर सीनियर रेजिडेंसी जॉइन नहीं कर सकते।

डॉक्टरों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

विभाग के इस निर्णय से परेशान होकर डॉक्टरों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विभाग ने उन्हें रिलीव नहीं किया और न ही स्टडी लीव या एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव (असाधारण अवकाश) देने का आदेश जारी किया।

डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि यदि वे बिना अनुमति के सीनियर रेजिडेंसी जॉइन करते हैं तो उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

इसलिए उन्होंने अदालत से मांग की कि विभाग को निर्देश दिया जाए कि उन्हें रिलीव किया जाए या कम से कम एक वर्ष का असाधारण अवकाश प्रदान किया जाए ताकि वे अपनी सीनियर रेजिडेंसी पूरी कर सकें।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष

डॉक्टरों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को कई सरकारी परिपत्रों और नियमों का हवाला दिया।

उन्होंने बताया कि 2 अप्रैल 2018, 22 फरवरी 2021, 24 मार्च 2022 और 5 जुलाई 2022 के विभागीय परिपत्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि मेडिकल अधिकारी उच्च अध्ययन या प्रशिक्षण के लिए अवकाश ले सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि 5 जुलाई 2022 के परिपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शैक्षणिक गतिविधियों के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) आवश्यक नहीं है और मेडिकल अधिकारियों को सीनियर रेजिडेंसी के लिए असाधारण अवकाश दिया जा सकता है।

इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के मामलों में पहले भी हाईकोर्ट ने कई आदेश पारित किए हैं, जिनमें डॉक्टरों को सीनियर रेजिडेंसी जॉइन करने की अनुमति दी गई थी।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि सीनियर रेजिडेंसी को मेडिकल ऑफिसर के लिए उच्च शिक्षा (Higher Education) नहीं माना जा सकता।

सरकार का यह भी कहना था कि विभागीय नियमों के अनुसार केवल वही मेडिकल अधिकारी स्टडी लीव या अन्य अवकाश के पात्र होते हैं जिन्होंने अपनी प्रोबेशन अवधि पूरी कर ली हो।

चूंकि याचिकाकर्ता अभी प्रोबेशन अवधि में थे, इसलिए उन्हें अवकाश देने का कोई औचित्य नहीं है।

सरकार ने इस संबंध में 30 जनवरी 2019 के एक विभागीय परिपत्र का भी हवाला दिया।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में यह विवादित नहीं है कि सभी याचिकाकर्ता मेडिकल ऑफिसर के पद पर प्रोबेशन में हैं और उनका चयन सीनियर रेजिडेंसी के लिए हो चुका है।

अदालत ने विशेष रूप से 5 जुलाई 2022 के परिपत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया है कि मेडिकल अधिकारी सीनियर रेजिडेंसी के लिए अवकाश प्राप्त कर सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि यह परिपत्र नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ प्रोबेशन में कार्यरत मेडिकल अधिकारियों पर भी लागू होता है।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीनियर रेजिडेंसी के लिए दिया गया अवकाश असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave) होगा, जो सेवा लाभों जैसे पेंशन, वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य लाभों में शामिल नहीं किया जाएगा।

कोर्ट का अंतिम आदेश

हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता डॉक्टरों को तुरंत उनके पद से रिलीव किया जाए ताकि वे अपने-अपने मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंसी जॉइन कर सकें।

हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि उन्हें राजस्थान सेवा नियम, 1951 के तहत असाधारण अवकाश प्रदान किया जाए।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सीनियर रेजिडेंसी के दौरान मिलने वाला स्टाइपेंड ही उन्हें मिलेगा और यह अवधि पेंशन या वेतन वृद्धि जैसे सेवा लाभों में नहीं जोड़ी जाएगी।

कोर्ट ने विभाग को आदेश दिया कि डॉक्टरों को 12 मार्च 2026 तक रिलीव कर दिया जाए, ताकि वे अपने सीनियर रेजिडेंसी प्रशिक्षण में शामिल हो सकें।

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