जोधपुर, 12 सितंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में नाबालिग बालक की कस्टडी उसके दादा को सौंपने का आदेश दिया हैं.
यह आदेश जस्टिस मनोज कुमार गर्ग और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने दादा की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.
याचिकाकर्ता दादा रहीसुद्दीन खान ने अपने नाबालिग पोते की कस्टडी की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की.
बच्चे का हित दादा की देखरेख में
याचिका में दादा कि ओर से बताया गया कि उसने 6 वर्ष की आयु से लेकर लगभग 13 वर्ष की आयु तक बालक की देखरेख की है. इस दौरान उसे बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित पारिवारिक माहौल उपलब्ध कराया गया.
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बच्चे का सर्वोत्तम हित उसके दादा की देखरेख में ही सुरक्षित रहेगा.
अदालत ने बच्चे की मां के पास वर्तमान कस्टडी को “अवैध” करार देते हुए तुरंत बच्चें को दादा को सौंपने का निर्देश दिया.
साथ ही, दादा को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया कि वह बच्चे की उच्च शिक्षा, चिकित्सा और स्वस्थ वातावरण की पूरी जिम्मेदारी निभाएं.
15 लाख की फिक्स डिपॉजिट
कोर्ट ने आदेश दिया कि बच्चे के नाम से एक राष्ट्रीयकृत बैंक में 15 लाख की फिक्स डिपॉजिट कराई जाए, जो उसके 18 वर्ष का होने तक सुरक्षित रहेगी.
अदालत ने स्पष्ट किया कि बालक के पिता जो इस समय कतर (दोहा) में कार्यरत हैं, को 18 वर्ष की आयु तक बच्चे को भारत से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होगी.
लेकिन यदि बच्चा विदेश यात्रा करना चाहता है, तो वह केवल दादा के साथ ही जा सकेगा।
मां को मिलने की अनुमति
हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी दादा को सौपते हुए आदेश दिया हैं कि बच्चे की मां हर वैकल्पिक महीने के दूसरे रविवार को बेटे से मिल सकती हैं.
अदालत ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया है कि मां बच्चे की शांतिपूर्ण परवरिश में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें.
आदेशों का उल्लंघन होने पर याचिकाकर्ता दादा को हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने की छूट दी हैं.