जयपुर। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में कथित तौर पर हुए करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की सुस्त जांच पर सख्त नाराजगी जताई है.
जस्टिस अशोक कुमार जैन की अदालत ने एसीबी अधिकारियों को साफ शब्दों में नाराजगी जताते हुए कहा कि “अब तक प्रकरण में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है” और “इतना समय बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।”
हाईकोर्ट ने अब मामले में एसीबी को दो सप्ताह के भीतर प्रभावी और ठोस कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं, मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता TN Sharma की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने यह आदेश दिया हैं.
अदालत में पेश हुए डीआईजी, मांगा समय
सुनवाई के दौरान एसीबी के डीआईजी और मामले में गठित विशेष जांच दल (सीआईटी) के मुखिया आनंद शर्मा स्वयं अदालत में पेश हुए।
उन्होंने मामले की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए जांच पूरी करने के लिए और समय की मांग की।
हालांकि अदालत इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी। हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि लंबे समय से जांच लंबित है, लेकिन अब तक कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया।
27 शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Poonamchand Bhandari ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने 27 विस्तृत शिकायतें दस्तावेजों और साक्ष्यों सहित एसीबी को सौंपी हैं। इसके बावजूद एजेंसी ने किसी भी मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने बताया कि अब तक केवल एक प्रकरण में एफआईआर दर्ज की गई, वह भी चार महीने पहले। आश्चर्यजनक रूप से उस मामले में भी शिकायतकर्ता के बयान हाल ही में, चार दिन पहले लिए गए।
इससे जांच की गति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अदालत पूर्व में भी एसीबी को कार्रवाई के निर्देश दे चुकी है, लेकिन हर बार एजेंसी समय मांगकर मामले को टालती रही है।
आरटीआई से खुलासा: आदेश में व्हाइटनर से बदलाव
याचिका में यह कहा गया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार एक प्रकरण में संबंधित अधिकारी ने कार्यादेश पर व्हाइटनर लगाकर समयावधि में कई बार बदलाव किया।
यह आरोप अपने आप में गंभीर प्रशासनिक अनियमितता की ओर संकेत करता है।
इसके बावजूद एसीबी ने ऐसे मामलों में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि जांच एजेंसी जानबूझकर कार्रवाई में देरी कर रही है, जबकि पर्याप्त दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। उस दिन एसीबी को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।