जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने राजसमंद जिले में ‘गौरव पथ’ सड़क निर्माण से जुड़े भूमि विवाद मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए जिला कलेक्टर को विस्तृत सर्वे कराने के आदेश दिए हैं.
‘गौरव पथ’ के लिए भूमि अधिग्रहण किए बिना जमीन का उपयोग करने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कि गयी हैं.
याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार के दो अलग अलग बयानों ने मामले में कई सवाल खड़े कर दिए.
जस्टिस संजीत पुरोहित की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं की जमीन का वास्तविक उपयोग हुआ है या नहीं, इसका स्पष्ट और वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर कोर्ट में पेश की जाए।
ये हैं मामला
यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है जिनमें आरोप लगाया गया था कि सरकार ने राजसमंद में गौरव पथ सड़क निर्माण के लिए संबंधित भूमि का उपयोग कर लिया, लेकिन न तो विधिवत अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाई गई और न ही प्रभावित भूमि मालिकों को मुआवजा दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि उनकी जमीन के उपयोग की जांच कर उचित मुआवजा दिलाया जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गयी कि विभाग लगातार अपना रुख बदल रहा है और आशंका है कि जांच प्रक्रिया इस तरह से की जा सकती है जिससे उन्हें उनके वैधानिक मुआवजा अधिकार से वंचित किया जा सके।
सरकार के विरोधी बयान
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने स्वयं मौखिक रूप से जमीन सड़क निर्माण के लिए दे दी थी।
हालांकि बाद में दाखिल अतिरिक्त हलफनामे के साथ प्रस्तुत साइट निरीक्षण रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि याचिकाकर्ताओं की भूमि पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ।
अदालत ने इन दोनों बयानों को परस्पर विरोधाभासी बताते हुए गंभीर आपत्ति जताई।
रिपोर्ट पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने गौरव पथ के लिए भूमि की निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए पाया कि रिपोर्ट किसी तकनीकी या वैज्ञानिक पद्धति से तैयार नहीं की गई और उसमें अलग स्याही से वाक्य जोड़ने जैसी संदिग्ध स्थिति भी दिखाई देती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की रिपोर्ट पर भरोसा करना उचित नहीं माना जा सकता, इसलिए निष्पक्ष और विस्तृत सर्वे की आवश्यकता है।
तीन सप्ताह में रिपोर्ट
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एकलपीठ ने राजसमंद जिला कलेक्टर को तीन सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण याचिकाकर्ताओं की उपस्थिति में ही किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट रिपोर्ट तैयार की जाएगी।