जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए अजमेर स्कूल की महिला प्रिंसिपल के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।
कक्षा 12 की छात्रा की लंबे समय तक अनुपस्थिति पर उसका एडमिशन रद्द करने पर प्रिंसिपल के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चार्जशीट में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे प्रिंसिपल के खिलाफ अपराध सिद्ध होता हो, जबकि छात्रा की अनुपस्थिति लगातार बनी हुई थी।
कोर्ट ने कहा कि संस्थान ने नियमों और बोर्ड के निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की है।
जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता प्रिंसिपल अमिता पांडे की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अजमेर के एक निजी स्कूल Acme Academy से जुड़ा है, जहां एक छात्रा लंबे समय तक अनुपस्थित रही।
स्कूल प्रशासन ने उसे कई बार नोटिस और सूचना दी, लेकिन छात्रा ने संस्थान जॉइन नहीं किया।
अंततः, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्कूल ने छात्रा का नाम उपस्थिति रजिस्टर से काटते हुए उसका एडमिशन रद्द कर दिया।
इस निर्णय के कारण छात्रा बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी।
छात्रा और परिजनों ने की शिकायत
इस कार्रवाई से नाराज होकर छात्रा और उसके परिजनों ने संस्थान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद मामला प्रशासनिक और आपराधिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ा।
अजमेर जिले के गेगल थाना क्षेत्र में एक मुकदमा भी दर्ज कराया गया, जिसमें छात्रा के परिजनों ने याचिकाकर्ता प्रिंसिपल अमिता पांडे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 341 तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत आरोप लगाए गए थे।
इसी आधार पर प्रिंसिपल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू कर दी गई।
इसी आपराधिक कार्रवाई को याचिका के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
स्कूल की मान्यता ली वापस
छात्रा के परिजनों की शिकायत पर शिक्षा निदेशक ने स्कूल की कक्षा 11 और 12 की मान्यता/अपग्रेडेशन वापस ले ली।
संस्थान ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने पहले ही मान्यता रद्द करने के आदेश को मनमाना और कानून के विपरीत मानते हुए उस पर रोक लगा दी थी।
हालांकि विभाग के इस आदेश पर राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को स्टे कर दिया।
याचिकाकर्ता प्रिंसिपल की दलीलें
याचिकाकर्ता प्रिंसिपल अमिता पांडे की ओर से अधिवक्ता अरिहंत समदड़िया ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि छात्रा 27 अक्टूबर 2023 से लगातार अनुपस्थित थी और उसे 16 नवंबर, 30 नवंबर और 14 दिसंबर 2023 को सूचित भी किया गया कि उसकी उपस्थिति शून्य हो चुकी है।
अधिवक्ता ने कहा कि स्कूल प्रशासन द्वारा छात्रा को लगातार चेतावनी दी गई थी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके बावजूद छात्रा की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद स्कूल प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई की।
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा 30 जून 2025 को शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उचित नहीं है।
अधिवक्ता ने कहा कि चार्जशीट में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता ने उक्त धाराओं के तहत कोई अपराध किया है।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि संबंधित छात्रा (शिकायतकर्ता) को लगातार अनुपस्थित रहने के कारण विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर से नाम हटाया गया था। यह कार्रवाई माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई थी।
हाईकोर्ट का क्या आदेश?
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामला विचारणीय है और इसमें विस्तृत जांच की आवश्यकता है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के आदेश देते हुए मामले को 6 सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने के आदेश दिए।
अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी है।