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9 दिन बाद जयपुर हाईकोर्ट के बाहर वकीलों का धरना खत्म, 7 सूत्रीय समझौते पर बनी सहमति

Jaipur High Court Lawyers End 7-Day Protest After Seven-Point Agreement with Police Administration

मेडिकल नेग्लिजेंस प्रकरण में SIT गठित, 20 दिन में आरजीएचएस जांच और एक माह में पूरी होगी विस्तृत पड़ताल; डीसीपी साउथ की अगुवाई में कार्रवाई का भरोसा

जयपुर। राजधानी जयपुर में पिछले 9 दिनों से हाईकोर्ट के बाहर चल रहा अधिवक्ताओं का धरना बुधवार देर शाम करीब 7 बजे समाप्त हो गया।

अधिवक्ता जितेन्द्र शर्मा की माताजी का एक निजी अस्पताल में मौत होने पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए वकीलों ने हाई कोर्ट के बाहर धरना शुरू किया था.

पांच महीने पहले निजी अस्पताल में अधिवक्ता जितेन्द्र शर्मा की मां की मौत हुई थी, जिस पर मुकदमा भी दर्ज किया गया. फिलहाल मामला कोर्ट में है और सोमवार (16 फरवरी) से वकील हाई कोर्ट के बाहर धरने पर बैठे थे जिसके चलते शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई थी.

बाद में अधिवक्ताओं ने निजी अस्पताल के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए. मेडिकल नेग्लिजेंस और आरजीएचएस से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन का पटाक्षेप आज पुलिस प्रशासन, परिवादी पक्ष और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के बीच बनी सात सूत्रीय सहमति के बाद हुआ।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यालय में आयोजित बैठक में डीसीपी (दक्षिण) राजर्षि राज, बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल, महासचिव दीपेश शर्मा, परिवादी एडवोकेट जितेंद्र शर्मा, एडवोकेट अनिल चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

सौहार्दपूर्ण वातावरण में चली लंबी चर्चा के बाद सभी पक्षों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद धरना समाप्ति की घोषणा की गई।

7 सूत्रीय मांगों पर बनी सहमति

धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने मेडिकल नेग्लिजेंस के आरोपों की निष्पक्ष जांच, आरजीएचएस योजना में कथित अनियमितताओं की पड़ताल और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई थी।

आज बनी सहमति के अनुसार आरजीएचएस से जुड़ी शिकायतों की जांच 20 दिनों में पूरी की जाएगी। संबंधित विभाग को जांच पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

मेडिकल नेग्लिजेंस के आरोपों की निष्पक्ष जांच हेतु मेडिकल बोर्ड का पुनर्गठन किया जाएगा। यदि आवश्यकता पड़ी तो ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) से भी सहयोग लिया जाएगा।

जांच पूर्ण होने तक संबंधित अस्पताल को आरजीएचएस पैनल से अस्थायी रूप से डी-एम्पैनल करने की अनुशंसा की गई है।

थाना मानसरोवर में दर्ज प्रकरण संख्या 859/2025 की जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी जाएगी।

डीसीपी साउथ राजर्षि राज के नेतृत्व में गठित एसआईटी एक माह में जांच पूरी करने का प्रयास करेगी।

प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों की एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) जांच कराई जाएगी।

जांच की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से बार एसोसिएशन और परिवादी पक्ष को उपलब्ध कराई जाएगी।

बार एसोसिएशन की मध्यस्थता रही निर्णायक

इस पूरे घटनाक्रम में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर की भूमिका अहम रही।

बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने कहा कि अधिवक्ताओं की मांगें न्यायोचित थीं और उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना था। उन्होंने बताया कि प्रशासन और पुलिस ने सकारात्मक रुख अपनाया, जिसके चलते सहमति बन सकी।

महासचिव दीपेश शर्मा ने कहा कि बार हमेशा न्याय व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के पक्ष में है और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

डीसीपी ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन

डीसीपी (दक्षिण) राजर्षि राज ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।

उन्होंने कहा कि एसआईटी गठन का उद्देश्य तथ्यों को शीघ्रता से सामने लाना है। दस्तावेजों की एफएसएल जांच कराई जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एक माह की समयसीमा में जांच पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है और आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों की सहायता ली जाएगी।

7 दिन बाद लौटेगी रौनक

धरना समाप्त होने से हाईकोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र में सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू होंगी।

पिछले एक सप्ताह से विरोध प्रदर्शन के कारण यातायात और आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब सड़कें फिर से खुलेंगी और आमजन सुगमता से आवागमन कर सकेंगे।

अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की ढिलाई बरती गई तो वे पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। फिलहाल, प्रशासन और परिवादी पक्ष के बीच बनी सहमति को सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

19 को जो समझौता हुआ वही आज भी हुआ

गौरतलब हैं कि सीजेआई के दौरे से पूर्व हाईकोर्ट प्रशासन और हाईकोर्ट बार पदाधिकारियों के बीच 19 फरवरी को वार्ता हुई थी.

उस वार्ता में बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल, महासचिव दीपेश शर्मा सहित कई पदाधिकारी और अधिवक्ता भी शामिल हुए थे.

वार्ता के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने समझौता होने की बात कहते हुए धरना 15 दिन के लिए स्थगित करने का ऐलान किया था.

हाईकोर्ट बार अध्यक्ष की घोषणा के कुछ ही देर बाद ​धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं ने धरना समाप्त करने से इनकार किया हैं.

6 दिन बाद अब पुलिस प्रशासन के साथ हुए समझौते में भी वे ही बिंदू तय किए गए है जो अधिकांश बिंदू 19 फरवरी के समझौते में किए गए थे.

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