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शनिवार को एक दिन की न्यायिक राजधानी बनेगा जयपुर-हाईकोर्ट की स्थापना के बाद संभवत: पहली बार सभी जज जयपुर में करेंगे सुनवाई-अधिवक्ताओं का न्यायिक बहिष्कार

Jaipur to Become One-Day Judicial Capital as All Rajasthan High Court Judges Sit Together

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायिक इतिहास में संभवत: यह पहली बार ऐसा होगा जब जोधपुर मुख्यपीठ के सभी जज जयपुर पीठ में सुनवाई करेंगे।

शनिवार को सीजेआई के जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के चलते राजस्थान हाईकोर्ट के सभी जजों की सिटिंग जयपुर में तय की गई है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश से जारी हुए रोस्टर के अनुसार शनिवार को जोधपुर मुख्यपीठ के सभी जज जयपुर पीठ में सुनवाई करेंगे।

इतिहास में पहली बार 4 लार्जर बेंच

राजस्थान के न्यायिक इतिहास में शनिवार का दिन कई तथ्यों में ऐतिहासिक होने जा रहा है।

एक ओर जोधपुर और जयपुर के सभी जज जयपुर पीठ में सुनवाई कर ऐतिहासिक घटना बनने जा रही है।

वहीं दूसरी तरफ पहली बार राजस्थान हाईकोर्ट में 4 लार्जर बेंचों का गठन किया गया है।

4 लार्जर बेंच, 6 डिवीजन बेंच और 15 एकल पीठ

राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने 25 अप्रैल के लिए जारी किए रोस्टर के अनुसार 4 लार्जर बेंच, 6 खंडपीठ और 15 एकलपीठ का गठन किया है।

राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के बाद से संभवत: यह भी पहली बार है कि हाईकोर्ट के इतिहास में एक साथ चार वृहदपीठों का गठन किया गया है, जिसने इस फैसले को और भी खास बना दिया है।

इसके साथ ही हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए 6 खंडपीठ और 15 एकलपीठ का गठन किया गया है।

जोधपुर और जयपुर के सभी न्यायाधीशों को जयपुर में बैठकर सुनवाई करने के लिए निर्धारित किया गया है।

जयपुर में जोधपुर के मुकदमों की सुनवाई

नए रोस्टर में सबसे ज्यादा चर्चा में लार्जर बेंचों में वरिष्ठ न्यायाधीशों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

विशेष रूप से जस्टिस वीनीत माथुर, जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस नुपुर भाटी की लार्जर बेंच जयपुर में बैठकर जोधपुर मुख्यपीठ के दीवानी मामलों की सुनवाई करेगी।

ये सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संचालित होगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई, लेकिन तकनीकी चुनौतियां

शनिवार को मुख्यपीठ के सभी मामलों की सुनवाई जयपुर पीठ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी।

हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर वकीलों के बीच गंभीर चिंता भी सामने आई है। लंबे समय से मुख्यपीठ में हाईकोर्ट की वेबसाइट और इंटरनेट कनेक्टिविटी को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं।

बार एसोसिएशन द्वारा इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें भी की जा चुकी हैं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।

वर्तमान में हालात यह हैं कि हाईकोर्ट परिसर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान नेटवर्क की गंभीर समस्या बनी रहती है, जिससे सुनवाई बाधित होती है।

ऐसे में शनिवार को पूरे प्रदेश के मामलों की सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से करने का निर्णय जोधपुर मुख्यपीठ के वकीलों के लिए भारी चुनौती बन सकता है।

CJI का दौरा और सिटिंग अरेंजमेंट

राजस्थान हाईकोर्ट के सभी जजों के जयपुर में सिटिंग का मुख्य कारण देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का जयपुर दौरा माना जा रहा है।

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के शुक्रवार देर शाम जयपुर पहुंचने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

शुक्रवार को सीजेआई के साथ राजस्थान हाईकोर्ट के सभी जजों की मुलाकात हो सकती है।

सीजेआई शनिवार को सुबह कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित होने वाले रिटायर्ड जजों की कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।

यह कॉन्फ्रेंस रालसा के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

संभावित प्रभाव और आगे की राह

इस एक दिवसीय प्रयोग को न्यायिक प्रणाली में बड़े बदलाव की दिशा में एक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

फिलहाल, पूरे प्रदेश की नजरें शनिवार पर टिकी हैं, जब जयपुर एक दिन के लिए ‘न्यायिक राजधानी’ बनकर इतिहास रचेगा।

अधिवक्ता करेंगे न्यायिक बहिष्कार

राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार को जहां एक बड़ा ऐतिहासिक पल बनने जा रहा हैं दूसरी तरफ हाईकोर्ट से जुड़ी तीनो बार एसोसिएशन ने 25 अप्रैल को न्यायिक बहिष्कार घोषित किया हैं.

3 मार्च 2026 को तीनो बार एसेासिएशन ने बैठक कर 25 अप्रैल को स्वैच्छिक न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया था.

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर, राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर और राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की संयुक्त बैठक मेंअधिवक्ताओं ने 7 मार्च 2026 और 25 अप्रैल 2026 को न्यायिक कार्य को न्यायिक नहीं करने का निर्णय लिया था.

राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा शनिवार को लेकर जारी किए गए रोस्टर के बाद अधिवक्ताओं के सभी ग्रुपो में तीनो बार एसोसिएशन की ओर से 3 मार्च को जारी कि गयी सूचना लगातार प्रसारित कि जा रही हैं.

गौरतलब हैं कि राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 20 दिसंबर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को कार्यदिवस घोषित किया गया था। इस निर्णय का अधिवक्ताओं द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है।

इसी विरोध के तहत 3 मार्च को तीनो बार एसोसिशन ने 25 अप्रैल को भी विरोध करने का निर्णय लिया था.

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