सरदारशहर (चूरू)। कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करती है जहां दुख की गहराई के बीच भी इंसानियत की सबसे उजली किरण दिखाई देती है।
ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य नागौर के जेएलएन अस्पताल में देखने को मिला, जब जोधपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजेंद्र सिंह भाटी ने अपनी पत्नी के निधन के बाद उनका नेत्रदान कर मानवता की मिसाल पेश की।
रविवार सुबह का वह सफर शायद किसी ने भी इस तरह खत्म होने की कल्पना नहीं की थी। जोधपुर से सरदारशहर लौट रहे अधिवक्ता राजेंद्र सिंह भाटी अपनी पत्नी दुर्गा रानी भाटी के साथ फॉर्च्यूनर कार में बैठे थे।
गाड़ी ड्राइवर चला रहा था। सुबह करीब 7 बजे नागौर-लाडनूं हाईवे पर सूरपालिया गांव के पास अचानक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे परिवार की खुशियां पल भर में छीन लीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फॉर्च्यूनर कार एक टैंकर को ओवरटेक कर रही थी। तभी सामने से पशुओं के चारे से भरा ट्रक आ गया और तेज टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पीछे से आ रहे टैंकर ने भी कार को टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रक और टैंकर भी पलट गए और फॉर्च्यूनर कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। कार में सवार अधिवक्ता राजेंद्र सिंह भाटी, उनकी पत्नी दुर्गा रानी भाटी और ड्राइवर घायल हो गए। सूचना मिलते ही सूरपालिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तुरंत नागौर के जेएलएन अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने तीनों का इलाज शुरू किया, लेकिन गंभीर रूप से घायल दुर्गा रानी भाटी को बचाया नहीं जा सका। कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
दुर्गा रानी भाटी की उम्र मात्र 49 वर्ष थी। वे एक सादगीपूर्ण और परिवार के प्रति समर्पित महिला के रूप में जानी जाती थीं। उनके पति राजेंद्र सिंह भाटी जोधपुर हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। उनका बेटा हिमांशु रंजन सिंह भाटी भी जोधपुर हाईकोर्ट में वकालत कर रहा है, जबकि बेटी कृतिका भाटी जयपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।
पत्नी के निधन की खबर से अधिवक्ता भाटी गहरे सदमे में थे। लेकिन इसी दर्द और शोक के बीच उन्होंने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
अधिवक्ता राजेंद्र सिंह भाटी ने डॉक्टरों से कहा कि उनकी पत्नी अब इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन अगर उनकी आंखों से किसी को रोशनी मिल सके तो यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सुकून होगा। उन्होंने तुरंत पत्नी के नेत्रदान की अनुमति दे दी।
डॉक्टरों की टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर दुर्गा रानी भाटी की आंखें सुरक्षित निकाल लीं, ताकि दो जरूरतमंद लोगों को रोशनी मिल सके।
दुर्गा रानी भाटी का यह नेत्रदान अब दो लोगों की अंधेरी जिंदगी में रोशनी बनकर जाएगा। एक मां, एक पत्नी और एक संवेदनशील इंसान के रूप में उनका जीवन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन उनकी आंखें अब भी किसी के जीवन में उम्मीद की रोशनी जगाएंगी।
इस दुखद हादसे ने जहां एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया, वहीं अधिवक्ता राजेंद्र सिंह भाटी का यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन भले ही अनिश्चित हो, लेकिन इंसानियत के छोटे-छोटे फैसले दुनिया को बेहतर बना सकते हैं।