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साइबर अपराध सीमाओं से परे है, इसलिए जवाब भी राष्ट्रीय और समन्वित होना चाहिए-ACJ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा

National Cyber Security Seminar Concludes in Jaipur; Call for Stronger Legal and Judicial Framework

साइबर सुरक्षा को लेकर तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेस का समापन, सम्मेलन की सिफारिशें भेजी जायेगी विस्तृत रिपोर्ट के रूप में सरकार और सुप्रीम कोर्ट को

जयपुर। देश में तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य और बढ़ते साइबर अपराध के बीच जयपुर में आयोजित हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सम्मेलन की तर्ज पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित होंगे।

राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में ये बात कही है।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन को देश के मुख्य न्यायाधीश ने सराहा और आश्वासन दिया है कि इस प्रकार के साइबर सुरक्षा सम्मेलन देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित किए जाएंगे। जिससे न्यायपालिका की तकनीकी और कानूनी चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए बधाई दी।

जयपुर के झालाना स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में साइबर सिक्योरिटी को लेकर आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार का समापन समारोह संपन्न हुआ।

कार्यक्रम केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा, सीनियर मोस्ट जज जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी, जस्टिस विनीत माथुर, जस्टिस इन्द्रजीत सिंह, जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल सहित हाईकोर्ट के न्यायाधीश, सभी जिला न्यायाधीश, सीजेएम, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) के तत्वावधान में आयोजित इस महाआयोजन में साइबर लॉ विशेषज्ञों और न्यायिक अधिकारियों ने साइबर अपराध की चुनौतियों पर मंथन किया।

राजस्थान का अनूठा और प्रथम प्रयास

जस्टिस शर्मा ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि न्यायपालिका तकनीकी चुनौतियों को लेकर गंभीर है और एक मजबूत राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की दिशा में अग्रसर है।

सम्मेलन को सफल बताते हुए जस्टिस शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मेलन अपने आप में अनूठा और प्रथम प्रयास है, जहां साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध के बढ़ते खतरों पर गहन मंथन किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक साइबर क्राइम को लेकर “हर कोई समस्याओं की बात करता रहा है, लेकिन अब समय समाधान देने का है। साइबर अपराध सीमाओं से परे है, इसलिए जवाब भी राष्ट्रीय और समन्वित होना चाहिए।”

उन्होने आहवान किया कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इस कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों का सार पेश करते हुए वक्ताओं का आभार जताया।

उन्होंने अपने संबोधन में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट के जजों, केंद्रीय कानून मंत्री, राजस्थान हाईकोर्ट जजों के साथ प्रदेशभर के न्यायिक अधिकारियों और पुलिस विभाग का आभार जताया।

विशेष पाठ्यक्रम का अनुरोध

समारोह को संबोधित करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब साइबर क्राइम के सिर्फ आंकड़े गिनने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए न्यायिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और त्वरित जांच ही असली समाधान हैं।

उन्होंने न्यायिक अकादमियों से विशेष साइबर अपराध प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया।

साइबर कोर्ट के लिए मुख्यमंत्री का आभार

कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में साइबर थानों की तर्ज पर साइबर कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री द्वारा साइबर कोर्ट और साइबर थानों की घोषणा को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इसे देश में पहला कदम बताया और तारीफ की।

उन्होंने कहा कि यदि विशेष साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित होते हैं, तो SHO और सब-इंस्पेक्टर स्तर पर उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए।

नए दृष्टिकोण की जरूरत

समारोह में जजों और न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि—

“आज आंखों से दिखने वाली चीज भी सत्य हो, यह जरूरी नहीं। डीपफेक और एआई के युग में न्यायाधीशों को ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने की जरूरत है।”

उन्होंने बताया कि सम्मेलन की सभी सिफारिशें विस्तृत रिपोर्ट के रूप में सरकार और सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएंगी, ताकि साइबर अपराध से निपटने के लिए नए नियम और ठोस नीतियां बनाई जा सकें।

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