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मानसरोवर ओपन गार्बेज डिपो मामला: NGT का सख्त आदेश, खुले में कचरा जलाने पर रोक और जवाब-रिपोर्ट के लिए अंतिम मोहलत

NGT Takes Strict Action on Open Garbage Depot Near Wonderland Park Jaipur; Govt, Collector & PCB Asked to Submit Report

भोपाल/जयपुर। राजधानी जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में वंडरलैंड पार्क के पास संचालित लगभग 15 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैले ओपन गार्बेज डिपो को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अब और अधिक सख्त रुख अपनाया है।

पूर्व में गठित संयुक्त समिति और रिपोर्ट तलब करने के आदेशों के बाद, इस मामले में हुई सुनवाई में एनजीटी ने स्पष्ट किया कि खुले कचरा डंप का संचालन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का गंभीर उल्लंघन है और इससे नागरिकों के स्वस्थ जीवन के अधिकार पर सीधा प्रहार हो रहा है।

एनजीटी ने नगर निगम जयपुर और अन्य संबंधित एजेंसियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश देते हुए खुले में कचरा जलाने की किसी भी गतिविधि पर तत्काल रोक लगा दी है।

एनजीटी ने मामले को 30 मार्च 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए यह आदेश दिया है कि यदि अगली सुनवाई तक नियमों का पालन नहीं हुआ और स्थिति में सुधार नहीं दिखा, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह आदेश सचिन ढाका की ओर से दायर शिकायत पर दिया गया है, जिसमें जयपुर के मानसरोवर स्थित राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की भूमि (खसरा नंबर 270, ब्लॉक ‘सी’, सेक्टर-4 RIICO, फन किंगडम रोड) पर अवैध रूप से संचालित कचरा डिपो को चुनौती दी गई है।

वर्षों से जारी अवैध कचरा डंपिंग

एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता स्नेहा चतुर्वेदी और शुभम सोनी ने दोहराया कि वर्ष 2021 से यह स्थल लगातार प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट का बड़ा केंद्र बना हुआ है।

घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके से सटे इस क्षेत्र में खुलेआम कचरा जमा किया जा रहा है, जबकि इसके लिए न तो कंसेंट टू एस्टैब्लिश (CTE) लिया गया है, न कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) और न ही कोई पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) प्राप्त की गई है।

इसके बावजूद प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते यह अवैध कचरा डिपो आज तक संचालित हो रहा है।

पेयजल स्रोत और एयरपोर्ट पर भी खतरा

याचिकाकर्ताओं ने एनजीटी को यह भी बताया कि यह कचरा डंप पीएचईडी के ट्यूबवेल और जल टंकी के बेहद नजदीक स्थित है, जो मानसरोवर की एसएफएस कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत हैं।

खुले में पड़े कचरे और संभावित खतरनाक अपशिष्ट के कारण भूजल के दूषित होने का गंभीर खतरा बना हुआ है, जिससे स्थानीय निवासी जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।

इसके अलावा, यह स्थल जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के भी काफी निकट है।

खुले कचरे के कारण बड़ी संख्या में पक्षी यहां आकर्षित हो रहे हैं, जिससे बर्ड स्ट्राइक का जोखिम बढ़ गया है।

एनजीटी ने इसे न केवल पर्यावरणीय बल्कि विमानन सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा माना है।

खुले में कचरा जलाने पर एनजीटी सख्त

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कचरे को कई बार खुले में जलाया जाता है, जिससे जहरीली गैसें फैलती हैं और वायु प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है।

इस पर एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि खुले में कचरा जलाना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नगर निगम सहित सभी संबंधित एजेंसियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का सख्ती से पालन करना होगा।

समिति ने किया साइट निरीक्षण, रिपोर्ट लंबित

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) की ओर से एनजीटी को बताया गया कि गठित संयुक्त समिति ने 10 जनवरी 2026 को स्थल का निरीक्षण कर लिया है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

समिति ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए ट्रिब्यूनल से तीन सप्ताह का समय मांगा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

वहीं जयपुर जिला कलेक्टर, नगर निगम ग्रेटर जयपुर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) सहित अन्य प्रतिवादियों ने भी अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा है।

न्यायिक सदस्य जस्टिस शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने सभी प्रतिवादियों को आदेश दिए कि वे निर्धारित समयसीमा में जवाब दाखिल करें।

एनजीटी ने यह भी कहा कि यदि रिपोर्ट और जवाबों में उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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