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राजस्थान में मैनुअल वाहन फिटनेस जांच पर पूरी तरह रोक, 15 अप्रैल 2026 से केवल ATS से ही जारी होंगे फिटनेस सर्टिफिकेट

No Manual Vehicle Fitness Certificates in Rajasthan After April 15, 2026: High Court

ATS उपकरण के बिना RTO-DTO नहीं कर सकेंगे फिटनेस प्रमाणपत्र जारी, हाईकोर्ट ने ATS परमिशन के लिए भी की समय-सीमा तय

जोधपुर। सड़क सुरक्षा से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में Rajasthan High Court ने बड़ा फैसला देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि संपूर्ण राजस्थान राज्य में 15 अप्रैल 2026 से किसी भी वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के माध्यम से ही जारी किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने इसके अलावा किसी अन्य माध्यम, व्यवस्था या योजना के तहत फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा दी है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है।

खंडपीठ डिवीजन बेंच ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 62(1)(b) में किए गए संशोधन को पूरी तरह वैध और जनहित में बताया। साथ ही, न्यायालय ने इसे सड़क सुरक्षा के लिए अनिवार्य सुधार करार दिया।

केंद्र के आदेश से शुरू हुआ विवाद

यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब केंद्र सरकार द्वारा मोटर वाहन अधिनियम के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया को मैनुअल सिस्टम से हटाकर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के माध्यम से करने का प्रावधान किया गया।

इसके तहत परिवहन वाहनों के लिए फिटनेस जांच पूर्णतः मशीन आधारित और स्वचालित प्रणाली से की जानी है, ताकि मानवीय हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों को समाप्त किया जा सके।

राजस्थान सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए, लेकिन ATS की स्थापना में देरी और तकनीकी चुनौतियों के कारण कई निजी फिटनेस सेंटरों ने अदालत का रुख किया।

एकल पीठ ने पहले राज्य सरकार को कुछ राहत देते हुए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में विशेष अपीलें दायर की थीं।

ATS व्यवस्था को हाईकोर्ट की पूरी मंजूरी

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नियम 62(1)(b) के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की एकमात्र वैध व्यवस्था अब ATS ही है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह संशोधन केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और पारदर्शिता से सीधे जुड़ा हुआ है।

हाईकोर्ट ने माना कि मैनुअल फिटनेस प्रणाली में भ्रष्टाचार और तकनीकी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि ATS प्रणाली मशीन आधारित, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त है। इस व्यवस्था से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सड़कों पर केवल तकनीकी रूप से फिट वाहन ही चल सकेंगे।

15 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया है कि—

15 अप्रैल 2026 के बाद राजस्थान में किसी भी प्रकार का फिटनेस सर्टिफिकेट ATS के अलावा किसी अन्य माध्यम से जारी नहीं किया जाएगा।

यह आदेश तब भी लागू होगा, जब किसी जिले में ATS की संख्या सीमित हो और वाहन मालिकों को फिटनेस जांच के लिए दूसरे जिले जाना पड़े।

हाईकोर्ट ने कहा कि सुविधा की कमी कानून को टालने का आधार नहीं बन सकती, जब मामला जनहित और सड़क सुरक्षा से जुड़ा हो।

FIJA-2018 योजना पर भी अहम निर्देश

अदालत ने FIJA-2018 योजना के तहत चल रहे निजी फिटनेस केंद्रों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की।

ATS स्थापित होने तक—

जिन फिटनेस केंद्रों के पास वैध लेटर ऑफ ऑथरिटी (LOA) है, उन्हें केवल तब तक संचालन की अनुमति होगी, जब तक संबंधित जिले में कम से कम एक ATS स्थापित नहीं हो जाता।

LOA की अवधि समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का विस्तार नहीं दिया जाएगा।

ATS स्थापित होने के बाद FIJA-2018 के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति स्वतः समाप्त हो जाएगी।

यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी जिले में ATS स्थापित नहीं है, तो अंतरिम व्यवस्था के रूप में सीमित समय तक FIJA केंद्र काम कर सकते हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं होगा।

RTO और DTO को लेकर सख्त रुख

राजस्थान हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) और जिला परिवहन कार्यालयों (DTO) को लेकर भी सख्त आदेश जारी किए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि जिन RTO/DTO के पास ATS के अनुरूप उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, वे किसी भी स्थिति में फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं करेंगे।

नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

ATS आवेदन प्रक्रिया और समय-सीमा तय

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि ATS स्थापना के लिए अब तक 168 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इनमें से 38 आवेदनों को प्रारंभिक पंजीकरण प्रमाणपत्र (PRC) जारी किए जा चुके हैं। 84 आवेदन आवश्यक शर्तें पूरी न करने के कारण खारिज किए गए हैं।

शेष आवेदनों को तय समय-सीमा में निस्तारित करने का आश्वासन दिया गया।

30 दिनों में ATS को अनुमति

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पहले से प्राप्त आवेदनों का निस्तारण 60 दिनों के भीतर किया जाए और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 30 दिनों में ATS को अनुमति दी जाए।

31 जुलाई 2025 से पहले प्राप्त आवेदनों का निपटारा 31 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से किया जाए।

20 लाख रुपये की सुरक्षा राशि भी बरकरार

अदालत ने ATS स्थापित करने के लिए 20 लाख रुपये की सुरक्षा जमा राशि की शर्त को भी पूरी तरह वैध ठहराया।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह राशि किसी भी तरह से मनमानी नहीं है।

ATS जैसी उच्च तकनीकी और संवेदनशील व्यवस्था के लिए आर्थिक स्थिरता और जवाबदेही आवश्यक है।

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