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शांति बिना न्याय संभव नहीं और न्याय बिना विधि के शासन के टिक नहीं सकता: ACJ संजीव प्रकाश शर्मा

Peace Cannot Flourish Without Justice: Acting Chief Justice S.P. Sharma Highlights Mediation's Role at Commonwealth Conference in Jaipur

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि “शांति बिना न्याय के फल-फूल नहीं सकती और न्याय बिना विधि के शासन (रूल ऑफ लॉ) के कायम नहीं रह सकता।”

उन्होंने कहा कि आज के दौर में मध्यस्थता (मेडिएशन) अब केवल वैकल्पिक व्यवस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत की आधुनिक न्याय वितरण प्रणाली की मजबूत आधारशिला बनती जा रही है।

जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस, मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर स्वागत संबोधन देते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा कि न्याय का भविष्य टकराव में नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और मध्यस्थता में निहित है।

उन्होंने कहा कि लंबी न्यायिक प्रक्रियाओं के बजाय आपसी सहमति से विवादों का समाधान समाज में स्थायी शांति और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को मजबूत करता है।

मध्यस्था में राजस्थान दूसरा स्थान

उन्होंने राजस्थान में वैकल्पिक विवाद निस्तारण (ADR) और मध्यस्थता के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि “मेडिएशन फॉर द नेशन” अभियान के तहत राज्य में 40 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण किया गया।

राजस्थान ने करीब 25 हजार मामलों के समाधान के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया।

इसके अलावा विशेष लोक अदालतों के माध्यम से वर्षों से लंबित सैकड़ों मामलों का समाधान हुआ है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि राज्य सरकार और न्यायपालिका की संयुक्त पहल “समाधान” कार्यक्रम के तहत अब तक 50 हजार से अधिक विवादों का निस्तारण किया जा चुका है और बड़ी संख्या में अन्य मामले भी समाधान की प्रक्रिया में हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न्यायपालिका को कमजोर नहीं बल्कि और अधिक प्रभावी बनाती है।

इससे अदालतें उन मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकती हैं जिनमें न्यायिक निर्णय आवश्यक है, जबकि आम नागरिकों को कम समय में, कम खर्च में और सौहार्दपूर्ण तरीके से न्याय मिल सकता है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था केवल प्रभावी होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे मानवीय, सहभागी और समाज की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील भी होना चाहिए।

तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, मध्यस्थ, विधि विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और न्यायिक अधिकारी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन में शांति स्थापना, मध्यस्थता, न्यायिक सुधार और रूल ऑफ लॉ को सुदृढ़ बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

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