जयपुर, 24 सितंबर
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य के खिलाफ याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता पर ₹50,000 की कोस्ट लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने पूरन चंदर सेन की ओर से दायर याचिका पर सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका बिना आधार, बोगस और राजनीतिक रूप से प्रेरित है, जिसे केवल सस्ती पब्लिसिटी के लिए दायर किया गया है।
अधिवक्ता पूरन चंदर सेन ने यह आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराने की मांग की थी कि सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) 2019 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के लिए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य जिम्मेदार थे।
निचली अदालत और सेशन कोर्ट ने मामले में एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट में दायर हुआ।
संसद में पारित कानून
जस्टिस सुदेश बंसल ने अपने फैसले में कहा कि याचिका में यह तक नहीं बताया गया कि कोई अपराध अलवर जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में हुआ हो, जहाँ यह शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई।
अदालत ने माना कि संसद में पारित कानून को लागू करना अपराध नहीं ठहराया जा सकता और न ही मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
आचार संहिता का पालन करें
हाईकोर्ट ने अधिवक्ता की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि वकीलों को पेशेवर आचार संहिता का पालन करना चाहिए, न कि न्यायालय का समय बर्बाद कर “फ्रिवोलस याचिकाओं” से प्रचार पाने की कोशिश करनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए अधिवक्ता पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया और यह राशि Litigants Welfare Fund में चार सप्ताह के भीतर जमा कराने का आदेश दिया।
अदालत ने साथ ही याचिकाकर्ता अधिवक्ता को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी आधारहीन याचिकाओं पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।