हाईकोर्ट में लंबित फैसले से पहले परीक्षा कराने पर उठे सवाल, 31 मार्च तक देना था फैसला
जयपुर/नई दिल्ली। राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर चल रहा विवाद अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
इस बार मामला परीक्षा को स्थगित करने की मांग को लेकर है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में सूरजमल मीणा की ओर से दायर एक ताजा मिसलेनियस एप्लिकेशन में याचिकाकर्ता ने मांग की है कि 5 और 6 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित SI/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा को कम से कम 4 सप्ताह के लिए टाल दिया जाए।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 2021 की SI भर्ती परीक्षा से शुरू हुआ था। उस समय बड़े पैमाने पर पेपर लीक, नकल और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए थे।
जांच में यह सामने आया कि यह कोई सामान्य गड़बड़ी नहीं बल्कि एक संगठित और व्यवस्थित अपराध था।
कई जिलों में FIR दर्ज हुई और संगठित गिरोहों की संलिप्तता सामने आई। आरोप लगे कि भर्ती प्रक्रिया के कुछ अंदरूनी लोग भी शामिल थे।
इसी आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 28 अगस्त 2025 को पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था।
नया विज्ञापन और नया विवाद
भर्ती रद्द होने के बाद राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने 2025 में नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया।
लेकिन यहां से एक नया विवाद शुरू हुआ। 2021 परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों को आयु में छूट (Age Relaxation) नहीं दी गई।
यही मुद्दा लेकर कई अभ्यर्थी फिर हाईकोर्ट पहुंचे।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
इस पूरे मामले में अब तक कई महत्वपूर्ण आदेश सामने आ चुके हैं:
- हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 30 अक्टूबर 2025 को एक आदेश के जरिए अभ्यर्थियों को प्रोविजनल रूप से परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी।
- हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 13 नवंबर 2025 को एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी, यानी अभ्यर्थियों की परीक्षा में भागीदारी पर रोक।
- इसी बीच अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट में दायर अपीलों पर 31 मार्च 2026 से पहले फैसला करने का आदेश दिया। साथ ही कहा गया कि सभी पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहें।
अब नई याचिका क्यों?
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से दायर अपीलों पर लंबी सुनवाई के बाद 19 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित (Reserved) रखा था।
करीब ढाई माह बाद भी राजस्थान हाईकोर्ट ने इन अपीलों पर अपना फैसला नहीं सुनाया। वहीं, दूसरी ओर परीक्षा की तारीख घोषित कर दी गई है, जो कि चार दिन बाद 5 और 6 अप्रैल 2026 को है।
ऐसे में अगर परीक्षा पहले हो जाती है, तो याचिकाकर्ता और अन्य अभ्यर्थियों का अधिकार पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दलीलें
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की इस याचिका को शीघ्र सुनवाई के लिए मेंशन किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
याचिका में दलीलें
अभ्यर्थियों ने याचिका में दलील दी है कि अगर परीक्षा पहले हो जाती है और बाद में फैसला आता है, तो पूरा मामला केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
परीक्षा में शामिल होने का मौका खत्म हो जाएगा। बाद में कोई राहत भी बेकार हो जाएगी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ 4 सप्ताह की देरी से सरकार या आयोग को कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा, लेकिन अभ्यर्थियों का भविष्य बच सकता है।
याचिका में कहा गया कि 9 जनवरी 2026 के आदेश में ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फैसला परीक्षा से पहले आना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को यह मामला सुप्रीम कोर्ट में मेंशन किया गया।
कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले को 2 अप्रैल यानी गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
इसका मतलब है कि अब सुप्रीम कोर्ट इस पर गुरुवार को सुनवाई करेगा।
अभ्यर्थियों पर क्या असर?
इस पूरे विवाद का सीधा असर लाखों युवाओं पर पड़ रहा है:
2021 के अभ्यर्थी: न्याय और अवसर की मांग कर रहे हैं।
नए अभ्यर्थी: परीक्षा में देरी की आशंका के चलते पशोपेश में हैं।
चयनित अभ्यर्थी: अनिश्चित भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत इस विवाद में फंस गई है।