टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

कहीं ऐसा न हो जाये भारत के प्रधानमंत्री को भी अमेरिका का राष्ट्रपति उठाकर ले जाए – विवादित बयान मामले में बाड़मेर के नेता को हाईकोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर रोक-जांच जारी”

Rajasthan High Court Grants Relief to Barmer Leader Over ‘PM Abduction’ Remark, Arrest Stayed

जोधपुर/बाड़मेर। राजस्थान की राजनीति में बयानबाज़ी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

अमेरिका “भारत के प्रधानमंत्री का अपहरण” कर सकता है, जैसे कथित विवादित बयान देने वाले बाड़मेर के स्थानीय नेता फतेह खान को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है।

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक अहम आदेश में नेता की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, साथ ही यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला ऐसा नहीं लगता, जिसमें गंभीर आपराधिक अपराध बनता हो।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस जांच जारी रहेगी और मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।

हाईकोर्ट के जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने यह अहम आदेश दिया हैं.

बयान बना विवाद की जड़

पूरा विवाद उस बयान से जुड़ा है, जिसमें फतेह खान ने एक सार्वजनिक सभा के दौरान अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा था कि अमेरिका ने कुछ समय पहले किसी देश के राष्ट्रपति का अपहरण किया और भविष्य में भारत के प्रधानमंत्री के साथ भी ऐसा हो सकता है।

फतेह खान पर आरोप हैं कि उसने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका भारत को “कैप्चर” कर सकता है।

इसी दौरान उन्होंने कथित रूप से कहा कि “वेनेजुएला की तरह भारत के प्रधानमंत्री के साथ भी ऐसा हो सकता है…”

इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई और मामला तूल पकड़ गया।

FIR दर्ज, देशविरोधी बयान का आरोप

सार्वजनिक सभा में दिए गए इस बयान के बाद मामले में बाड़मेर पुलिस ने कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 197(1)(D) के तहत मुकदमा दर्ज किया।

दर्ज एफआईआर में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फतेह खान का बयान देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करता है और समाज में अस्थिरता और अशांति फैलाने वाला है।

शिकायत में यह भी कहा गया कि इस प्रकार का बयान देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है और जनता में गलत संदेश देता है।

याचिकाकर्ता का पक्ष-राजनीतिक बयान

याचिकाकर्ता फतेह खान की ओर से अधिवक्ता विशाल शर्मा ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और कानून के प्रावधानों के विपरीत है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा कि जिस भाषण को आधार बनाकर मामला दर्ज किया गया है, उसकी सामग्री को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है और उसे गलत तरीके से “राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल” बताया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कथित भाषण में ऐसा कोई भी तत्व मौजूद नहीं है, जिससे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 197(1)(D) के तहत अपराध बनता हो।

अधिवक्ता ने जोर देकर कहा कि केवल अनुमान या आशंका के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती, जब तक कि स्पष्ट और ठोस सामग्री उपलब्ध न हो।

स्थानीय अधिवक्ता ने दी शिकायत

याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि शिकायत एक स्थानीय अधिवक्ता द्वारा व्यक्तिगत या राजनीतिक दुर्भावना के तहत दर्ज कराई गई प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य केवल उन्हें अनावश्यक रूप से कानूनी उलझनों में फंसाना है। इस प्रकार की शिकायत को आधार बनाकर FIR दर्ज करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि उनके मुवक्किल एक जिम्मेदार नागरिक हैं और उन्होंने अपने भाषण में किसी भी प्रकार की हिंसा, विद्वेष या असंवैधानिक गतिविधि को बढ़ावा नहीं दिया। इसलिए, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन भी है।

सबसे महत्वपूर्ण तर्क यह रखा गया कि FIR में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया (prima facie) भी किसी अपराध का गठन नहीं करते। ऐसे में गिरफ्तारी जैसी कठोर कार्रवाई न केवल अनुचित होगी, बल्कि न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ भी होगी।

अधिवक्ता ने कहा कि एफआईआर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19) को दबाने की कोशिश है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि उनका बयान एक राजनीतिक टिप्पणी था, जिसे संदर्भ से हटाकर पेश किया गया और अनावश्यक रूप से आपराधिक रंग दे दिया गया।

“पहली नजर में गंभीर अपराध नहीं”

याचिकाकर्ता आरोपी नेता फतेह खान की ओर से दी गई दलीलें सुनने के बाद जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपों में गंभीर आपराधिक तत्व स्पष्ट नहीं दिखता।

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी राजनीतिक बयान को सीधे आपराधिक श्रेणी में रखना उचित नहीं है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल आधार है।

हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस को जांच जारी रखने का अधिकार है और वह तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय संदर्भ से जुड़ा बयान

मामले में यह भी उल्लेख किया गया कि फतेह खान ने अपने बयान में अमेरिका और वेनेजुएला के संदर्भ का हवाला दिया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वैश्विक राजनीति में ऐसी घटनाएं हो रही हैं और भारत को भी सतर्क रहना चाहिए।

हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रकार के उदाहरण देकर देश की छवि और संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की गई।

सरकार को नोटिस

कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं।

राज्य की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने नोटिस स्वीकार कर लिया है, जबकि दूसरे प्रतिवादी को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

सबसे अधिक लोकप्रिय