शिमला: पोंग डैम विस्थापितों के पुनर्वास में हो रही देरी को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर पर सख्ती दिखाई है।
हिमाचल प्रदेश ने श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर को 23 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर अगली सुनवाई में कलेक्टर मौजूद नहीं होते हैं तो उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कड़ी दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई की जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस चिराग भानु सिंह की बेंच ने यह आदेश पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़े मामले में दिया।
हालांकि, इससे पहले 4 सितंबर की सुनवाई में कलेक्टर को व्यक्तिगत पेशी से छूट मिल गई थी।
उनकी ओर से बताया गया कि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और नामांकन पत्रों की जांच के चलते उनकी प्रशासनिक व्यस्तता है।
हाईकोर्ट ने इस वजह से 4 सितंबर की सुनवाई में उनकी व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी थी, लेकिन अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का सख्त आदेश दिया।
यानी अब 23 सितंबर की सुनवाई में कलेक्टर को खुद कोर्ट के सामने आकर मामले की स्थिति बतानी होगी।
मामला सिर्फ कलेक्टर की पेशी तक सीमित नहीं है। यह पोंग बांध विस्थापितों को राजस्थान में जमीन देने और हाईकोर्ट के पुराने आदेश की पालना से जुड़ा है।
इसी मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने विस्थापितों के पुनर्वास में देरी और जमीन आवंटन को लेकर राजस्थान सरकार पर नाराजगी जताई थी।
पोंग बांध विस्थापितों से जुड़ा है पूरा मामला
दरअसल, पोंग बांध बनने के बाद हिमाचल के कई परिवार विस्थापित हुए थे। उनके पुनर्वास और राजस्थान में जमीन देने से जुड़ा मामला लंबे समय से कोर्ट के सामने चल रहा है।
इसी मामले में हाईकोर्ट के पुराने आदेशों की पालना को लेकर कार्यवाही चल रही है।
हाईकोर्ट यह देख रहा है कि विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़े उसके आदेशों को किस तरह लागू किया जा रहा है।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार को विस्थापितों को जमीन देने में देरी को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी।
अब हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से तलब कर लिया है।
हाईकोर्ट चाहती है कि संबंधित अधिकारी खुद कोर्ट में मौजूद होकर बताए कि विस्थापितों के पुनर्वास और जमीन आवंटन को लेकर अब तक क्या कार्रवाई हुई है और हाईकोर्ट के आदेशों की कितनी पालना की गई है।
हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि विस्थापितों को दूर रेगिस्तानी इलाकों में भेजने के बजाय राजस्थान के फेज-1 वाले इलाकों में जमीन देने पर ध्यान दिया जाए।
इसी मामले में अब श्रीगंगानगर के कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।
23 सितंबर को खुद होना होगा पेश
सुनवाई के दौरान श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर की तरफ से व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए आवेदन दिया गया था।
इसमें बताया गया कि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा हो चुकी है। अभी नामांकन पत्रों की जांच का काम चल रहा है। ऐसे में कलेक्टर के लिए हिमाचल हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पहुंचना संभव नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस स्थिति को देखते हुए मौजूदा तारीख पर उन्हें पेशी से छूट दे दी। लेकिन यह छूट सिर्फ इसी सुनवाई तक सीमित रही।
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि 23 सितंबर को कलेक्टर को खुद कोर्ट में मौजूद रहना होगा।
पेश न होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अब अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी। इस दिन श्रीगंगानगर कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में मौजूद रहना होगा।
हाईकोर्ट के आदेश से साफ है कि इस बार सिर्फ लिखित जवाब या किसी दूसरे अधिकारी की मौजूदगी से काम नहीं चलेगा।
कलेक्टर को खुद कोर्ट के सामने पेश होकर मामले की स्थिति बतानी होगी।
अगर वह तय तारीख पर पेश नहीं होते हैं तो हाईकोर्ट ने उनकी मौजूदगी सुनिश्चित कराने के लिए सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी है।
यानी चुनाव की व्यस्तता के कारण कलेक्टर को अभी राहत मिल गई है, लेकिन पौंग विस्थापितों के मामले में 23 सितंबर को उन्हें हिमाचल हाईकोर्ट के सामने खुद पेश होना ही होगा।
पहले भी मिल चुकी है पेशी से राहत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि जुलाई 2026 में भी कलेक्टर को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी गई थी।
उस समय संसद के मानसून सत्र के चलते उनकी व्यस्तता का हवाला दिया गया था।
अब स्थानीय निकाय चुनाव का हवाला देकर एक बार फिर पेशी से राहत मांगी गई।
हाईकोर्ट ने इस बार भी आवेदन स्वीकार कर लिया, लेकिन अगली सुनवाई के लिए कोई भी छूट देने से इनकार कर दिया।