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4 दिन में 181 नामांकन : 8 साल बाद चुनाव में रिकॉर्ड उत्साह-बार काउंसिल चुनाव बना हाई-वोल्टेज मुकाबला

Bar Council Elections 2026: Mobile Phones & Cameras Banned Inside Polling Booths to Ensure Fair Voting

महिला आरक्षण से बदली तस्वीर, पुराने-नए चेहरों में सीधी टक्कर, 22 अप्रैल को 84 हजार 247 वकील करेंगे वोटिंग

जोधपुर/जयपुर। प्रदेश में वकीलों की सबसे बड़ी नियामक संस्था राजस्थान बार काउंसिल के 8 साल बाद होने जा रहे चुनाव में नामांकन लगातार जारी हैं।

राजस्थान बार काउंसिल के बहुप्रतीक्षित चुनावों ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लिया है।

सिर्फ 4 दिनों में 181 अधिवक्ताओं द्वारा नामांकन दाखिल किए जाने से साफ है कि इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और हाई-वोल्टेज होने वाला है।

राजस्थान बार काउंसिल के कुल 25 सदस्यों के चुनाव होने जा रहे हैं, जिसमें से 23 सदस्य सीधे मतदान के जरिए चुने जाएंगे, वहीं 2 सदस्य सह-नामित होंगे।

पहली बार राजस्थान बार काउंसिल में 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

22 अप्रैल को इन सदस्यों के लिए प्रदेशभर के करीब 84 हजार से अधिक वकील मतदान करेंगे। पुरे जयपुर रिजन में कुल 22 हजार से अधिक अधिवक्त मतदान करेंगे.

4 दिन और 181 नामांकन

गुरुवार को नामांकन के चौथे दिन तक कुल 178 अधिवक्ताओं ने अपने नामांकन दाखिल किए हैं।

सोमवार 23 मार्च से शुरू हुए नामांकन के पहले दिन जहां 16 अधिवक्ताओं ने नामांकन दाखिल किए थे।

वहीं मंगलवार 24 मार्च को 59, 25 मार्च (बुधवार) को 60 अधिवक्ताओं ने नामांकन दाखिल किए।

गुरुवार को चौथे दिन 46 अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल सदस्य बनने के लिए नामांकन दाखिल किए हैं।

कुल मिलाकर अब तक 181 अधिवक्ताओं ने दावेदारी ठोक दी है, जो इस चुनाव को बेहद प्रतिस्पर्धी बना रहा है।

25 सदस्यीय काउंसिल, 23 पर सीधा चुनाव

राजस्थान बार काउंसिल के कुल 25 सदस्य चुने जाएंगे, जिनमें 23 सदस्य सीधे मतदान से चुने जाएंगे, वहीं 2 सदस्य सह-नामित होंगे।

22 अप्रैल को प्रदेशभर के 80 हजार से अधिक अधिवक्ता मतदान करेंगे, जो इस चुनाव को निर्णायक बनाएगा।

नामांकन के अंतिम दो दिन

राजस्थान बार काउंसिल के सदस्यों के लिए 23 मार्च से 28 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जा रहे हैं।

प्रत्याशी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक नामांकन पत्र भौतिक रूप से या रजिस्टर्ड डाक/स्पीड पोस्ट के माध्यम से जमा कर रहे हैं।

ऐसे में अब नामांकन के लिए दो दिन बाकी रहे हैं।

2 को अंतिम प्रत्याशी सूची, 22 को चुनाव

29 और 30 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी, जिसके बाद 31 मार्च 2026 को प्रत्याशियों की प्रारंभिक सूची प्रकाशित की जाएगी।

नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 2 अप्रैल 2026, शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है।

अंतिम प्रत्याशी सूची 2 अप्रैल को शाम 5 बजे के बाद जारी की जाएगी।

मतपेटियों का संकलन 22 से 28 अप्रैल तक किया जाएगा और 29 अप्रैल 2026 को मतगणना होगी। परिणाम मतगणना पूर्ण होने के तुरंत बाद घोषित किए जाएंगे।

निर्वतमान चेहरों की फिर एंट्री

चुनाव में इस बार पुराने और अनुभवी चेहरों की भी जोरदार वापसी हो रही है।

निर्वतमान चेयरमैन भुवनेश शर्मा समेत एक दर्जन से अधिक मौजूदा सदस्य अब तक नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

जयपुर से शाहिद हसन, भुवनेश शर्मा, सुशील शर्मा, डॉ. महेश शर्मा, हरेंद्र सिंह, चिरंजीलाल शर्मा, कपिल माथुर और घनश्याम सिंह राठौड़ जैसे नाम फिर से मैदान में उतर चुके हैं।

इन नेताओं का दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अधिवक्ताओं के हित में बड़े फैसले लिए और अब अधूरी योजनाओं को पूरा करने के लिए दूसरा मौका जरूरी है।

महिला आरक्षण से बदली चुनावी तस्वीर

इस बार पहली बार 5 सीटें महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जिससे चुनाव में नया संतुलन और प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रहा है।

60 से अधिक महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:

शालिनी शेरोन, सारिका चौधरी, निधि खंडेलवाल, सुमन शर्मा, संगीता शर्मा, सुमित्रा कुमावत, साजिया खान, प्रमिला शर्मा, तारामणि शर्मा, बीना शर्मा, मोबिना खान, आरजू खान, रेखा शर्मा, शशी जैन, बबीता शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, सुनीता शर्मा, सोनू सैनी, शिल्पा शर्मा, वंदना शर्मा, बिंदिया शर्मा, नीतू सिंह आदि।

महिला अधिवक्ताओं का कहना है:

“यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि नीतिगत बदलाव और बराबरी की भागीदारी का अवसर है।”

महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि यह चुनाव केवल प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि नीतिगत बदलाव और समान भागीदारी का प्रतीक बनेगा।

चुनावी मुद्दे और अधिवक्ताओं की अपेक्षाएं

इस बार के चुनाव में प्रमुख मुद्दों में अधिवक्ता कल्याण योजनाएं, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, युवा अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता, न्यायालयों में बुनियादी सुविधाएं, पारदर्शिता और बार काउंसिल की जवाबदेही शामिल हैं। युवा अधिवक्ता खास तौर पर यह चाहते हैं कि नई नेतृत्व टीम उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने।

चुनावी मुद्दे क्या हैं?

इस बार चुनाव सिर्फ पद का नहीं, बल्कि नीतियों और सुधारों का चुनाव बन गया है।

मुख्य मुद्दे

अधिवक्ता कल्याण योजनाएं
स्वास्थ्य बीमा और पेंशन
युवा वकीलों के लिए आर्थिक सहायता
न्यायालयों में बुनियादी सुविधाएं
पारदर्शिता और जवाबदेही

खासकर युवा अधिवक्ता नई नेतृत्व टीम से व्यवहारिक सुधार और मजबूत समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।

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